कल म बहत कल थ । म उठकर तयर ह गय म अपन गलब सकरट और मर सफद बलउज पर डल दय, लकन म panti नह पहन थ । यह बहत गरम थ, म अपन टरसवसटइट म स एक फर स करन चहत थ । कलज क लए जओ और हमश क रप म एक ओडस म परकग । सभगय स वह एक परकग सथल बड खल थ और वह म अपन कर छड दय ह । म थड दर ह चक थ, लकन शकषक अभ तक शर नह कय गय थ । मन नटस लन क लए अपन नटबक नकल और धयन दय । मर नटबक म कगज क सफद चदर कवल मर कलपन परजवलत करन क लए और मर ज रह ह क लपड क बढव जर रखन क करण । मर पर क बच झनझन मझ ललच रस ह क सरफ मर मन क उकसव क सथ बहर आन चहत थ क सथ भर दय । मझ यद ह क मर पस पट नह थ इसलए मन अपन आसपस दखन शर कर दय । वह मर दई ओर लइन म समन तन सट क लए कन, गर थ, और बहत खन क रप म वह सकल टम क लए वलबल परथओ । म उस जनन क लए बहत कम ह । हम मशकल स एक सथ ककष क कछ दन ह । म जनत ह क अगर तम मर बत सनग नह ह, म कस भ सकत ह क वह समलगक य मर जस दव नह दख ह । हलक, मन अपन खल शर कय । म अपन सकरट सध और मर पहल स ह गल छ शर कर दय । मर उगलय न एक गलकर आकर म मर भगशफ क छडखन क और कभ-कभ lierly म परवश कय। मन सच थ क ज मझ छआ कन थ और वह अपन नरम जभ क सथ और फर स वकलपक । म सवधन स अगर कई भ मझ दख दखन क लए बदल मज आय । मर शरर म तपमन नयतरण रहत लइन तक चल गय। म कषण भर क लए बद कर दय । मन अपन सतषट जर रखन क लए महलओ क कमर म जन क फसल कय। जब म बथरम क पस गय म एक जगह ह जह म बहतर ह सकत ह यद कय । म लइबरर म पहच जह अलग-अलग फलर ह। जतन क फरश सबस कम कच कर रह ह और म वह गय थ । नरसर क बच सबस अलग कन म, म अपन कपड उतरन शर कर दय । पहल मर बलउज मन जलदबज म इस अनबटन कय और इस कतब क बच रख दय । त मर बर मर सतन क मजबत स मकत छड । मझ लग क व जलद ह एयर कडशनर ज थड शत थ नच कठर । म अपन सकरट कम और मर जत ल लय पर तरह स नगन ह । आह कय एक खश ह। बस तथय यह ह क कई मझ वह स दर कर सकत ह मर कमचछ एक हजर तक बढ गई । म धर-धर दसर तरफ कदम क ओर चल गय। मन कस तरह क शर न मचन क कशश क। यह बहत जलद थ और वह कई लग क जब म पसतकलय क पस नह थ । लकन आप कभ नह जनत क लग कह ज रह ह । जब म सढय पर पहच त मन ऊपर दख और यह भ लफट लबत थ । कई आदलन नह। म सढय स ऊपर गय और अगल सतर तक चल गय । वचर ह क मर कपड दर थ मझ और भ गरम । म फरश क बच अतम चरण पर बठ गय और हसतमथन करन क लए बहर नकल गय। मर करच पहल स ह मर उगलय क सथ गल थ मर सथ फर स नगणय । वह बहर रहन हग और मर उगलय क अधक स अधक उतसह स बहर नकलन हग । मर भगशफ पडय उस यन रस और मर उगलय क वनरत क सथ उततजक रखन क लए । मर सकस क गध मर पस आन क लए और अधक मर गरम ह क पहल स ह अपन सबस अचछ रप म थ उततजत करन क लए शर कय गय थ । म धम ह गय, एक पल क लए आकश खलन लग और मर शरर कप गय । हर झटक पसतकलय क ठस कदम म मर रस नल महसस कय । यह सबस अचछ थ । म अचनक उठ गय । दर म मन सन ह कस क नच कदम जन । म अपन कपड लन क लए नच भग गय । म अपन बलउज, मर सकरट और चपपल पर डल दय । वह मर बग म डल दय और मझ लफट ह क सभगय स मर सतर पर थ करन क लए नरदशत कय । जस ह मन दरवज बद कय, मन दख क ज लग सढय स नच आए व मर ककष क सहपठ थ ।
