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मरय जस और उसक सथ एक दसर क आनद लत ह। एमª जस और म कई वरष स डटग कर रह ह। वह ह 45 क उमर म भ शनदर। हमर यन जवन बहत सकरय ह और ह

मरय जस और उसक सथ एक दसर क आनद लत ह। एमª जस और म कई वरष स डटग कर रह ह। वह ह 45 क उमर म भ शनदर। हमर यन जवन बहत सकरय ह और हम अभ भ ह पगल परम मझ यद ह क एमª जस न शरआत म मझ कस बतय थ क उसक पत क एक बमर ह अशलल फलम क सगरह ज मन समय-समय पर शकरवर क उपयग कय शनवर क, जब व घर पर अकल हत थ, त वह उनह दखत थ और इस परकर उस बठत थ कमक य जस क वह कहत ह, कम स कम उस चज स शरआत करन क लए सलभ ह जसक वह पछ कर रह थ उसक पत। उसन मझ ज बतय, उसक अनसर उस परकर क फलम उस आकरषत नह करत, हलक शयद कई इस थड सधरग। सच त यह ह क एक दन ऐस आएग जब हम उसक ह सकग पर दपहर घर पर अकल रहन क दरन, उस फलम यद आई और उसन उनम स एक लगन क जद क वह थड उतसहत ह गई, इस फलम क समनत म डयज नगरटस कह गय उस नम क पलस अधकर, ठक ह, शर करन क तरत बद और लन क बद इसक अलव, उसक सगरह क बकस पर एक नजर डलन स उस पत चल क व फलम नह थ। परन, यद कमक नह ह और कछ बखर क लए यह इसक लयक ह, लकन इसस अधक कछ नह, इसलए हम फलम दखन जर रखत ह लकन थड धयन दकर कयक हम खद क समरपत कर दत ह उन कछ अवसर क लभ उठए जब हम अकल ह सकत ह। मर पस एक अशलल वडय टप थ जसम चर फलम शमल थ वभनन वषय क सथ, हटर, लसबयन, जफलय और समलगक, और पहल म उस दन क बद हम ज अवसर मल, मन उस उसक दखन क लए रख दय, और यह सच ह क जस ह पहल गन शर हआ मन पहल ह दख लय थ क आपक यह कस लग, और हमन पगल क तरह पयर कय, थड दर बद हम अगल वषय पर चल गए। लसब क हमन उस एक सथ लपट हए और थड ठक हत हए दख, और हलक उसन कछ नह कह, हमन भ नह कह दशय क ववरण ख जन स यह सपषट थ क वह अपन सथत बनए रखन चहत थ क वह वषय उस आकरषत नह कर पय। फर अगल फलम शर हई जसम द दख एक कतत क सथ लडकय ज उसक लग क छन स उततजत ह गई, एमª जस न टपपण क उनह नशल दवए दन पड और वह वकत थ, लकन वह फर भ नह भटक। कछ नह, जबक फलम म लडकय उसक हसतमथन कर रह थ इस चसन, और वस भ और भ चज ज आप कलपन कर सकत ह, मन उसस कह क यह थ इसस लभनवत हन वल पलत पश मलक क सखय सरववदत ह उनक भतर क भवन सपषट रप स सभ आवशयक सवचछत, फलम म ह कई कशश क बद लडकय कतत क चदन क लए रज करन म कमयब ह गई उनम स एक और लडक न ऐस कय, जसक बद स लडक क इसक भरपर आनद लन पड कठर धल, और ऐस नह लग रह थ क वह दखव कर रह थ। इस दशय म वसतव म रगणत थ और हलक एमª जस न यह नह कह कस न भ अचनक मर पछ नह पकड, ज म दख रह थ और उसस बहत उतसहत थ उसन मझ इतन बतहश मख-मथन दय क मझ कछ कषण क लए लग क वह मझ यह दन ज रह ह। चल हन। अभ भ मर वरय क उसक मह म रखत हए, वह लडकय क तरह दखत रह उनहन एक-दसर क लटत हए, अपन पर खल हए और अपन हठ क अलग करत हए आदन-परदन कय इस तरह स उसक पर चत क पर तरह स खलकर पश कय और दसर उसन कतत क उस सवदषट फल क ओर नरदशत कय, ज जलद ह चटन लग। गहन और नरतर तरक स, बहत ह कम समय म उपलबध हसल क एकधक ओरगसम इसन मझ यह दखन क लए बहत अधक उततजत कर दय क उनहन कय कय और आनद लय दख रह ह क म फर स कस कठर हत ज रह ह। पछल समलगक फलम म कवल द बहत अचछ लग थ। मसल और वशल पछ स यकत। जब मन दख क म सखत ह त मन ऐस सच ऐस इसलए थ कयक हम ज दख रह थ, और उसन मझ एक खरब नजर स दख, अपन पछ पर हथ रखन, और फर दबर हसतमथन करन, मझ यकन थ क ज म दख रह थ वह मझ उततजत कर रह थ, लकन दलचसप बत यह नह थ जब म हसतमथन कर रह थ य मर आन क बद उनहन कई टपपण नह क। उस दन क बद म एमª जस क कतत क सथ ऐस करत हए दखन क बर म कलपन करन लग बड, मझ नह पत कय, बस एक वशल कतत क लड क सथ उसक बर म सच रह ह उसक कस हई चत न उस कफ दर तक चद, इसस म कफ उततजत ह गय। फर एक दन ऐस आय, जब हम अकल रहन जरर थ कयक कम क करण हमर लए अपन सझ करन असभव ह गय थ कषण भर म, उस अपन दसत वकटरय क ओर मडन पड, ज यह भ जनत ह हमर, यह दखन क लए क कय वह हमर लए अपन घर छड सकत ह और सभगय स हमर लए दसर ओर, उसन उसस कह क उस दपहर हम उसक पत और बटय क घर ज सकत ह व बहर थ और बहत दर स पहचग... उसक इन दसत क पस एक बहत बड कल लबरडर कतत थ इसक मलक क अनसर मतरपरण और मलनसर। उसक नम "ननक" थ और वह लगभग 3 वरष क थ सल। खर, उस दपहर हम अकल ह रहन हग ननक घर पर थ, हलक हम उस बगच म छड दत थ जह उसक पस बहत कछ थ आजद और अकल खलन म मज आय। एक-दसर क सघन क बद हम ननक हत हए घर म चल गए वसतर स और कय न इस अतरग भग म थड अववकपरण तरक स कह जए जब हम "मसबत म" गए त एमª जस बगच म रक रह। बद कछ पय, हम लय म आन लग और अपन "खल" शर कर दय। एमª जस उसन अपन शरट और पट उतर द, और मन पय क उसक पस कई अडरवयर नह थ, ह, सबस छट पट ज मन अपन जवन म कभ दख ह और मन उस खरद थ मर लए, मझ लगत ह क यह सपषट थ क उसक मन म कछ अलग थ। एमª जस वह बहत हट और सकस ह, उसक गल और सखत गड ह, जस दख कर म हर बर उसक दवन ह जत ह। एक और दन, एक रमचक जघन बल, सवर हए और अचछ तरह स मडए गए, और मधयम लकन गहर रग क नपलस क सथ उततम सतन. वह उस शरब क करण बहत कमक थ ज उस बनत थ हमश पर कषमत स और धर-धर हम गरम हत गए। मर उगलय पहल स ह उसम थ चर, और उसन मर उगलय भग द। जब हम ऊचई पर थ त ननक चललन लग। नह मझ नह पत क कय उस पत थ क हम कय कर रह थ और कररवई म शमल हन चहत थ य कय, लकन वह चप नह हआ. चल चललओ और चललओ, वह हम कट रह थ। जब तक मन अतत यह नह कह, "म दखग क कय म उस कतत क चप कर सकत ह," उसन मझस कह। उसन कह क उस इतन कमक मत छड, और चक इसम कफ समय लग, इसलए उसक उगलय ऐस करग व ज आन वल थ उस पर करन क परभर हन वल थ। म बहर बगच म गय और वह वह अपन पछ हल रह थ और मर ओर दख रह थ मझ बतओ तम दन वह कय कर रह ह? मन उनस सपरक कय उसक सर क सहलय, यह भल गय क मर हथ म उसक चत क खशब आ रह ह। जस, ननक मर हथ क सघन लग और उतसकत स उस चटन लग। ऐस दख गय उस सवद पसद आय, उसन मर उगलय क बच स सर रस चट लय। घर म परवश, मन ननक क वह रकन क लए कह, जस क वह मर बत सनन वल ह, और मझ दए बन खत मन दरवज पर तरह फट कए बन छड दय। म लवग रम म लट आय, जह एमª जस उस समय वइन क एक और गलस खतम कर रह थ उस कषण वह कफ "खश" थ, और यह मझ उतन ह अचछ लग रह थ कमक हन बहतर हग कयक वह कछ भ करन म सकषम ह। मन उसस कह, "एक बर क लए तम ह "अचछ लडक, कय तमन अपन मलक क इतजर कय य नह?" वह मझ उततर दन स कस बच गय? म समझ गय क वह मर इतजर नह कर पय और हसतमथन कर चक ह। एमª जस सफ पर नगन बठ थ, शरब क एक और गलस प रह थ हम आग बढन क लए तयर थ जब ननक सफ क एक कन क पस पहच और उसन अपन बड कल नक उसक पर पर रख द। वह डर गय और चललय, बड कतत क अचनक घसपठ स डर गय। "इस जनवर क यह स ल जओ, उसन मझ डर दय ह।" मत!" उसन कह। मन उसस कह क कछ भ गलत नह थ, म सरफ दलर चहत थ और उसन मझस कह क ऐस नह थ। उसक लए यह मयन रखत थ क वह उस बहर ल गई। उस कषण, ननक न उस चटन शर कर दय हथ और वह उसक सर पर हथ फरत हए थड शत ह गई। "वह, छट कतत," उसन कह, "तमन त मझ इतन डर दय, ननक। मन ऐस नह कय। दबर कर न?" और ननक उसक पर क चटन शर कर दत ह। "ऐस मत कर, शत रह, तम बहत बर कतत ह," उसन उसस कह। लकन ननक नह रक; और अपन नक क उसक चत क कषतर क करब लन लग। वह मन उसक बड सर क धकक दन क कशश क, लकन वह इतन जदद और मजबत थ क मझ धकक दन पड उसक चत क खशब स कफ उततजत ह जओ. मन कह, "लगत ह वह तमह पसद करत ह।" बहत, दख तमन उस कतन उतसहत कर दय ह।" एमª जस न नच दख और जब उनहन अपन आख खल त उनहन लटकत हई लल पछ क एक टकड बहर नकलत दख लफफ। व लगभग 18 य 20 सम क लग रह थ। एमª जस क चहर कफ कवत जस थ, वह तब बहत लल ह गई थ उसन उस बड चमकदर लल लड क दख। "भड म जओ, यह वसतव म बहत बड ह, वह पछ" वह कहन म कमयब रह। शरब न उस बहत उततजत कर दय थ और कतत क बड लड न उस और भ अधक उततजत कर दय थ, वशषकर यह जनत हए क उस वशल पछ क करण वह थ। नह म दर दख सकत थ. मन उस इस छन क कशश करन क आदश दय। "मझम हममत नह ह, यह मझ कट सकत ह।" मन उसस कह क शयद उस यह बहत पसद आएग। मर आगरह पर उसन आखरकर उसन नरणय लय और थड नच झककर उस हलक-हलक मसलन लग औजर, जबक मन अपन पछ उसक पठ स हत हए उसक पस तक पहचई उसक पर गड रगड. उस यह बहत पसद आय हग कयक उसक लड बड हन लग थ और वकसत करन क लए। ननक क पत थ क वषय कय ह और उसन अपन नक उसक रसल चत म डल द। एमª जस दवर. पहल त वह उछल और लगभग मझ गर ह दय, लकन मन उस बत दय वह लट जएग और मझ दखन दग क वह कय करग, क यद वह ऐस नह करग त म उस अलग कर दग। मझ यह पसद आय और मझ यकन थ क म इसक आनद उठऊग। इसस पहल क वह कछ कहत और जस ह लट, ननक थ भत-परत क तरह चत क चटन। एमª जस करहन लग, उसक आख मड गई सफद। ननक न उस बन रक अपन जभ स चट और उसन हर पल क आनद लय। उसन अपन टग चड कर ल और उसक हथ न उसक हठ क अलग कर दय। उस जतन सभव ह उतन अदर जन क अनमत दन। भगन बद नह हआ, लकन सब कछ ज रस नकल, कतत न उस पर अपन जभ फरत हए चट लय। भगनस और वह जनत थ क वह सहन वल ह। ननक अथक थ, आओ चट और उसक चत चट. अब उसस और बरदशत नह ह रह थ, उसन अपन गड क जतन ऊपर उठय ज सकत थ उठ लय। मर त बस यह थ क म भ उस वह चट सक. ननक उसक गड चटन लग पगल क तरह भ. उसन उस इतन जर स चट क उसक हलक स चख नकल गई: "यसससससस म!" ऐस, वस ह चत और वस ह गड, मर छट कतत!" श बहत बढय थ और म पर तरह स अपन आप म थ। वह पहल स ह वरयपत कर रह थ और खश क और अधक चख नकल रह थ, कई ओरगसम। क उनहन उस इस तरह प लय जस क उन पर कई आधपतय ह गय ह। मझ इतन आनद कभ महसस नह हआ, और कस जनवर स! इसस मझ थड ईरषय भ हई। उस अब कई परवह नह थ क वह कय कर रह थ, रकन म बहत दर ह चक थ. वह उस कतत क और अधक चहत थ और वह बस यह चहत थ क वह उसक चत और उसक गड क चटन बद नह करग। जब कमततजन कम हन लग त उसन अपन आख खल और ननक स मर ओर दख अभ भ उसक गड चट रह थ, उसक चहर पर तरह चमक उठ। उनहन मझस कह, "मझ वशवस नह ह रह क मन उस ऐस करन दय।" मन उसस कह क कछ भ गलत नह ह और मझ खश ह क उस यह पसद आय अनभव। म उस आरम दन और उसक जलन क शत करन क लए दसर पय लन गय उसक गल म महसस हआ. ननक न उसक लग क चटन जर रख। यह अभ भ मट और बहत थ दशयमन। एमª जस न उसक ओर दख, और उसक नजर उसक वशल लग पर पड और दख क वह पहल ह ठक ह चक ह मन उसस कह: "मझ वह लग चहए ज तम दख रह ह, तमहर अदर।" म इतन थ इतन उतसहत क वह इस और बरदशत नह कर सक, और यह जनत हए क वह उसक दमग स बहर ह चक थ, म जनत थ क अगर मन थड जर दय, त वह ज म कहग, उस करन स मन नह करग। एमª जस न कछ नह कह और फर मन ननक क उसक सर पकडकर उसक ओर ल गय उस और जब हम उसक सलट स सटमटर दर थ, मन इस ऑरडर कय, मझ आशचरय ह "आप वसतव म चहत ह क म यह कर परय, आप जनत ह क आप ज भ कहग म वह करग" मन उततर दय। "ऐस कर" जस क मर सर न पषट क क म चहत थ क वह यह कर, वह वह ननक क पस पहच और उस हसतमथन करन क लए तयर कय। फर, मझ आशचरय हआ, उसन घटन क बल बठकर मझस कह इसस तम और भ उततजत ह जओग, उसन उस वशल, गरम लड क अपन मह म डल लय। म मन उसस कह क वह इतन शतर न ह, क ज म चहत थ वह उस अपन अदर डलन थ बलल. लकन एमª जस अपन कम कर रह थ और लड क चसन और चसन शर कर दय यह बढत गय और बढत गय। वह सर हलत हए कतय क तरह हफन लग. इस अपन मह क अदर डलन स, ननक क यह पसद आय हग कयक उसन ऐस करन शर कर दय थ थड झटक. थड दर बद वह उठ और उसक सथ सफ पर लट गय सदर गड ऊपर उठई और उसन मझस हमर चदई म मदद करन क लए कह दसत। उसक चत अभ भ बहत गल थ और मन ननक क अदर जन म मदद क। वह। वह आकर पर बहत आशचरयचकत थ: "अर, यह इतन बड ह, और यह बहत गरम ह!!" ननक न शर स ह उस ऐस चदन शर कर दय जस क उसक पस कई भत ह। कई चतन नह. मन त बस उस बहत तज स धकक दकर चदत हए दख थ बड लग उसक अदर और बहर। व हर धकक क सथ चखन लगत वह वशल लड. एमª जस भ जनवर क समन गत स पछ क ओर चल गय, बहत मजबत। ननक उस ऐस चदत रह जस यह ह एकमतर चज थ ज वह जनत थ। कर, बन रक, अदर-बहर, बर-बर, और इस तरह वह लगभग 20 तक पहच गय मनट, हमश एक जस. एमª जस कवल हफ सकत थ और रक सकत थ, कफ समय ह गय थ वह अपन गत जर नह रख सक और लगतर हमल क सहन करत रह, उसक परतयक परवषट क सथ हव पकडन क कशश कर रह ह। वह पसन स लथपथ थ. एमª जस भ वह थ, खश स करह रह थ, उसक आख उसक सर म घम रह थ, उनक ओरगसम क परसतवन. "ओह, ऊऊऊऊहह, ऊऊऊऊह" - वरय क पहल धर महसस करन क बद वह चललय। उसक परतडत यन म गरमहट। ननक आए और उसक अदर आए, इतन सर उछल। एमª जस न सच क वह कभ नह रकग। और म नह चहत थ क वह चल जए, इसलए उस वरय क उसक अदर रख, बहत गरम। म इसक मतर पर वशवस नह कर सक कतत क वरय ज उसक चत स नकल। उस उसक यन स बहत हए बहर फक दय गय उसक पर। उसक अदर और भ बहत कछ रह हग, एमª जस न खद क ढकन क कशश क अधक बहर आन स रकन क लए बलल। आखरकर मर लड इस और बरदशत नह कर सक तमश, और मझ तरत खद क खल करन क जररत थ। वह सब कतत क वरय दख एमª जस क चत स बहर नकलन मर लए बहत मशकल थ, इसलए मन अपन लड क नरदशत कय एमª जस क मह म और उसन मझ उतसकत स तब तक चस जब तक म उसक अदर नह आ गय मह थड दर आरम करन क बद, उसन बहत ह शरमनक भव स मर ओर दख और कह: "नह म वशवस नह कर सकत क मन कय कय ह, म वशवस नह कर सकत क कस जनवर न मझ इस तरह चद। इस तरह, आप भयनक ह, लकन आप मर मलक ह और यह बत मझ सबस जयद पसद ह दनय" मन उनस कह क जब तक ऐस ह, इसम कई समसय नह ह एक जनवर और कई दसर आदम नह, जब तक मझ इसक जनकर न ह, और वह वसतव म कतन पहचनत ह क ननक न उसक सथ ज कछ कय थ, उसन उसक आनद उठय थ। तब म उसन उततर दय क वह मर अलव कस अनय परष क सथ ऐस नह करग, जब तक क म न ह जऊ आदश दय, लकन उस यकन थ क उस इस ननक क सथ दहरन हग। भ उनहन अपन उतसह म कह, क अगर हमर पस ननक जस कतत हत, त वह नशचत रप स ऐस करत त वह अतत मर सथ धख करग, कयक उस कछ ओरगसम क अनभव ह चक थ। जस मन उनह पहल कभ महसस नह कय थ। हलक, उसन मझस इसक जकर कस स न करन क कह जब वह अपन दसत और ननक क सथ हत थ त उस बहत कछ छपन पडत थ। क समन।