यश क सथ मर यन जगत (2)। इसक 29 सम क खज औजर। सबस पहल म उन सभ लग क धनयवद दन चहत ह who have written to me as a result of reading my story. चहन आपक बत द क य सब सच ह, मझ पत ह क यह कई लग ऐस ह कहत ह लकन मझ वशवस ह आप लग क लखन क तरक स बत सकत ह क व वसतव म ह य नह नह। अतत!!!! अपन कहन जर रख रह ह, और यह सपषट करन लयक ह म इस इस उममद म लखत ह क वह, मर चचर भई जसस, बद म इस पढग। व इसक करण खज लग। उसक घर पर उस रत क बद, हम उठ और हमन हमश क तरह वयवहर कय, यन जस कछ हआ ह नह, ऐस लग रह थ रत क अधर म कछ ऐस थ जसन हम पर तरह स और हमश क लए बदल दय कल हम भलन क बमर ह जएग और हम अभ भ सलद क तरह तज रहग, य शयद ऐस ह हग क हम बदमश थ हहहहहहह. उस अवसर क बद कछ वरष बत जयग; एक करसमस उसक मत-पत, उसक भई और वह मर घर छटटय बतन गए और कस वह हमश मर सथ सत थ (ह), नए सल क रत, मर भई चल गए, मर चचर भई-बहन, मर परम और म एक डसकथक म। हम नच रह थ और शरब प रह थ सच त यह ह क हम सभ बहत नश म थ, दर सबह हम वपस लट मर घर और मर कमर म, म और मर एक चचर भई एक ह बसतर पर सत थ मर पर क पस फरश पर वह "स रह थ।" सच त यह ह क म थ वसतव म नश म और थक हए (खर हम सभ थ); मर चचर भई पहल स ह थ स रह थ और म अचनक मरफयस क बह म गरन लग थ मन महसस कय क उसक हथ मर सतन क सहल रह थ, बशक कस भ अचछ महल क तरह अचछ आदत, मन सन क नटक कय तक म उसक दलर क आनद ल सक, लकन जब व मर नपलस क अपन हठ स चसन लग और मर सस तज ह गई भर और भर हन क करण, म नटक करन जर नह रख सक और उस एहसस हआ क ऐस कय ह आलगन क सथ म अपन आप क उसक सथ जमन पर खच लत ह (यह सब बहत सवधन स करत ह तक ऐस न ह)। मर चचर भई क जगओ ज मर बगल म स रह थ)। पहल स ह जमन पर यश न मझ चमन शर कर दय, अपन सथ आकरमण करत हए मर मह म जभ फरत हए उसन अपन हथ स मर गल चत क सहलय, उसम अपन उगलय डल रह ह। ऊऊओहहहह यह अहसस बहत सवदषट थ न कवल कछ वरजत कय ज रह ह बलक यह खतर भ ह मर चचर भई जग जएग और हम खजग और हम वह एक परवरक पल बतएग। खर, म आपक कय बतऊ, एडरनलईन मर खन म दड रह थ, मन सन मर दल मर सर म जर-जर स धडक रह थ और मझ ऐस महसस ह रह थ जस हव मर छत स बहर नकल रह ह। उततजन। थड दर बद जसस "नच उतर" और मर लग चसन लग। कलररस उस समय जब उसन अपन उगलय मर छट स दरर म डल उउउइइइइइइ (वह) यह सबस अचछ ह), कछ कषण क बच उसन अपन चड जभ मर गद स लकर मर भगशफ तक चलय और वपस मममममम, जब तक म और नह रक सकत और ऐठन क सथ फट नह जत चरमतकरष जसन मर नपलस क नक क खड कर दय मन व फट जन चहत ह। जब उस मर यन क रस महसस हआ और मर ऐठन महसस हई त वह उठकर बठ गय उसक चहर क दखकर म उसक आख म वह भव दख सकत थ ज ईमनदर स कह त मझम झलक रह थ बहत डर लगत ह. अचनक और अचनक उसन मझ चर खन चत कर दय "कतत" क सथत और मझ बतए बन पन चल जत ह, मन यह सब जन दय, भगवन। क म चखन चहत थ!!!! यश क लग भयनक ह, लकन म यह कभ नह जनत थ मन इस दख थ, उस सबह भ नह, मन इस कवल महसस कय थ और कवल एक चज ज म आपक बत सकत ह इसस मझ बहत दरद हआ, भल ह म अब वरजन नह रह!!!, लकन जस बद म मझ पत चल क मर चचर भई क लग 29 सम लब थ 16 सम मट, और इसलए इतन दरद हत ह (म 1.62 सम लब ह), हलक मझ कहन हग क यश मर बर म वचरशल थ कयक उनहन मझ पर पर धयन नह दय। मर लए यह भयनक थ!!!! कयक उस बशरम आदम न मझ दरद क बर म शकयत करत हए दख लय थ लकन फर भ उसन मर कलह क नह छड और म जतन भ अपन आप क छडन क कशश करत लकन उस सए न मझ जन दय!!!!!! मन पड और रन क हलक-हलक चख नकल खर, यह बलकल भ सखद नह थ, मझ उललघन महसस हआ!!!!! लकन उसन मझ तरछ कर दय मर करह क शत करन और उनक सथ जगन स बचन क लए तकए पर सर रख कजन वह सल पर चढए जन क कछ दर बद कछ घटत हआ। आशचरय क बत ह, उस अपर पड क बच म ज यश न मझ पकडकर दय उसक वशल उपकरण क सथ, मर शरर उसक तरह खश स ऐठन लग मर दसर चरमसख क अनभव वह!!!! इस बर यह बहत अलग थ कयक यह थ एक दरदनक आनद. लकन एक बर जब मर ऑरगजम बत चक थ, दरभगय स म अब और नह कर सकत थ मर चचर भई क सथ चदन जर रख, कयक मर यन पर तरह स सख गई थ और यह थ उसक सथ यन सबध बनन और भ अधक दरदनक थ, और हमर लए यह 40 मनट जतन आसन थ चद रह थ और उसक आन क कई रसत नह थ, इसलए मन उस कट और जतन ह सक म कर सक रहई, बचर एक बर फर परशन ह गय और हलक उसन मझ मजबर करन क कशश क इस खन क बद, म पहल स ह उसस बहत परशन थ और मन उसस कह क बस बहत ह गय अगर वह शत नह हआ त म अपन चचर भई स बत करग, जसस वह बहत नरज हआ और मझ छडकर चल गय।' दखत ह दखत वह उठ और बहत गसस म अपन लए नयय पन क लए बथरम म चल गय मर सथ दसर बर अपन हथ, लकन सच, फर भ इतन समय लग गय वह कम स कम 15 मनट आग!!!!! अतत!!! क कहन यह खतम नह हत, और हलक मर पहल उसक सथ यन सतर बहत दरदनक थ, मझ कछ हद तक आनद क अनभव हआ, त उस तरख स मर हसतमथन सतर बढ गए, आपक सवसथय क लए सब कछ!!!! करन क लए जर..
