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कयक मन आपक भम क परम स रग भगलक वतवरण म रत हए दख ह, जस क "असटरयस पटरय कवरड" क छद म दरशय गय ह, ज तटय चटटन पर टटन वल बहदर कट

कयक मन आपक भम क परम स रग भगलक वतवरण म रत हए दख ह, जस क "असटरयस पटरय कवरड" क छद म दरशय गय ह, ज तटय चटटन पर टटन वल बहदर कटबरयन लहर क गरजन और ऊबड-खबड असटरयन भम क जगल, चरगह और घस क मदन क हरयल क बच बन ह, "पहड क हर और खनज क कल", पथव क मनसटरल, वकटर क गत क रप म मनअल कहत ह, और समदर और जमन क लग क आवज स खश ह, एक ऐस समय म जस हम 1935-1945 क बच क दशक म डल सकत ह और लगभग एक छट स शहर म, कटबरयन सगर क कनर पर बस हआ ह और जह ह ह, वह नह ह, अलकत हवलय जनक परचन जड सदय क लगतर वसमत क बद लब समय स भल द गई ह और जनक अरथवयवसथ, मछल पकडन, उतकषट डयर गय क पलन-पषण क बच कमबश आरम स बस हई ह। भम और सब तथ मकक क खत, एक अचछ परवर क एक यव महल मरएल रहत थ, जस क उस समय कह गय थ, ज कभ-कभ एक खशमजज, मसकरत हई, बतन लडक थ ज उस समय अचछ शषटचर म थ, लकन ज वरष पहल उदस, उदस क मनवय रप म बदल गई थ... मनवय दरभगय, सकषप म... यह वह असभय यदध थ जसन 1936 स 1939 तक सपन क तबह कर दय थ, पछल वरष म पद हई नफरत क एक शरखल क वसफट, ऐस नफरत जसन उसक परय परम स अधक उसक जन ल ल, लकन इस नकसन क भरपई उसन उस एक और बट दकर क, एक फल स भ अधक उतपद, उस बलतकर क, ज उसन उन परष म स एक क हथ झल थ ज उसक पयर परम क "घमन क लए" ल गए थ,(1) और तब स, उसक जवन स सर खशय गयब ह गई, उसक जगह दरभगय न ल ल। यह तक क वयवहर म उसक मत-पत न भ उसस मह मड लय, कयक उस समय एकल म बट, और उसस भ अधक उसक जस "सममनत" परवर क बच, सबस अपमनजनक अपमन थ; सबस बड समजक शरमदग, और इसन उस यव महल क पकष म कछ नह कय ज कवल एक हदयहन अपरध क नरदष शकर थ, कयक नरणयक बत, जहर तर पर, "खद क जन दन" थ और मरन तक खद क बचव नह करन थ, जस क समय पर मरन, उसक वश म थ, यह उस पर नरभर थ, ज पसद करत थ क हमलवर उस मरकर सतषट ह, जस उनहन उसक परम क मर डल थ। ऐस नह ह क उनहन सध तर पर उस पर आरप लगय, ज उनहन नह कय, लकन वयवहर म, उनहन उस एक सकड क लए भ समरथन य सतवन दए बन, उसस दर कर दय। और उनक बट, उनक मत-पत क पत क सबध म, यह वयवहर म नह, बलक हर तरह स उनक उपकष थ। उनक बच उसक बर म बत करन लगभग वरजत थ, और अगर व कभ उसक जकर करत थ त उस "वह बचच" कहकर बलत थ। सकषप म, बचर मरएल क रत शशवत थ। एकमतर वयकत जसन उसक दख म सतवन द, वह उसक अपन बट थ, ज अब लगभग चर सल क ह, और जसम उसन अतत म, कभ भ कम न हन क इचछ रखन क अपन सर कषमत लग द थ। उनहन शहर क चरच म समय-समय पर जकर उनक पडगरसत आतम क आरम दलन म भ सहयग कय। वह, चरच क पछ और अत म एक एकत सइड चपल म पज जन वल वरजन मदर ऑफ गड क समन घटन टकत हए, अपन परशनय क रत हए, उस अपन दख बतत हए, उनह वरजन पर उतरत हए जस वह उनह पयर करन वल और समझदर म पर उतरत थ क उसक अपन म, जसन उस अपन गरभ म वकसत कय और दरद क सथ उस इस दनय म रख, वह नह थ। अत म, मरएल क एक और सहर मल, वह थ उसक दद जआकवन, वह महल ज पहल स ह परपकव स अधक उमर क थ, एक सतत सपनसटर और अपन म क घर और परवर क सव म एक अनभव स भ अधक, ज उसक जनम क बद स ह जयदतर उसक दखभल कर रह थ, और अगर वह उसक जवक म हत, त नशचत रप स वह उसस अधक पयर नह कर सकत थ। मरएल क जवन इस तरह गजर, जसम अपन बट क परत समरपण और पहल सथन पर अपन पत क कठन चरतर क परत सवकत और समरपण और फर अपन म क असवकत क अलव और कई उतर-चढव नह थ, हलक वह, नशचत रप स, लब समय स अपन बट और अपन पत क परत उस शतलत क बरकरर नह रखत अगर उसक पत उस पर इस नह थपत। और तथय यह ह क उनक पत वसतव म एक पत थ, वयकतगत और परवरक सममन क वसतव म अतरजत इचछ न चज क बदतर बन दय थ, हलक, गहर म, खद क बवजद, कयक अचछ परयस क बवजद उनक लए अपन पत क नह लन मशकल थ, उसक मस क छट स टकड, उसक अपन खन क बद कयक व उसक बट क मस और खन थ ज बदल म उसक थ। लकन उनक करततवय क अधक परबल भवन, क कय शभयमन थ और कय अशभनय थ, न उनह वह करन क लए मजबर कय ज एक पत और दद क रप म उनक भवनए उनक लए परतकल थ। यह दरभगयपरण एकरसत एक दन कम ह गई। यह अनक म स एक थ, उनम स कई एक थ जसक लए मरएल सवरगय मत क शरण म चरच गई थ। जस ह वह चरच स बहर नकल, एक वयकत ज न लब थ, न छट थ, न बदसरत थ और न ह सदर थ, उसक पस आय... सबस घस-पट वयकत म स, सकषप म, और अचक लकपरय गण क सथ; एक सधरण करयकरत जसक पस कई रहसय नह ह। वह आदम बड सहजत स उसक पस आय कपय एक कषण क लए कषम कर, मस मरएल। म आपक सथ एक महतवपरण वषय पर चरच करन चहत ह ज आप और मर बच समन ह। मरएल न उस वषय क सर स पव तक दख, एक पल क लए भ छपन क कशश कए बन, उस समजक अतर क ज उनक बच मधयसथत करत थ। म कलपन नह कर सकत क आपम और मर बच कय समनत ह... सजजन... और 'सजजन' शबद क उचचरण इतन वशषट सवर म कय गय थ क यह सपषट थ क ज वशषण वह वसतव म उनह समरपत करन चहत थ वह उनक दवर कह गई बत क बलकल वपरत थ। ठक ह ह... मस - (और यह, उस आदम न उसक परत वह लहज इसतमल कय ज उसन पहल उस समरपत कय थ) - ह, हम दन क बच कछ समनत ह... और बहत महतवपरण भ ह, म आपक वशवस दलत ह... वह बट ज आपक पस ह, बस... अगर उस समय मरएल पर हथड स वर कय गय हत, त वह अधक चकत नह हत। वह लडखड गई और चक क सखत फरश स नह टकरई कयक उस वयकत न पर वनमरत क सथ उस सध पकड रख थ। लकन, लकन!... आप कय कह रह ह?... इसस आपक कय मतलब ह? वशष रप स कछ नह, मस... बस, मन ज कह... क आपक बट हमर बट ह, कयक म उसक पत ह... और उसक पत क रप म, म भ उसस पयर करत ह। कय आपक एहसस ह क आप कय कह रह ह? कय आपक एहसस ह क म अभ आपक रपरट कर सकत ह? बशक म ऐस करत ह, यद आत ह... लकन... म जखम लन पसद करत ह, कयक आपक बट मर बट ह... कपय चल जओ!... मर नजर स दर ह जओ!... म तमस नफरत करत ह! कय आप मर बत समझ रह ह? म तमस नफरत करत ह!... शकर मनओ क तम कस भ तरह उसक नद नह करन चहत!... बहत सर लग पहल ह मर चक ह!... इस दश म पहल ह इतन खन बहय ज चक ह क और भ अधक बहय ज सकत ह!... चल जओ; कपय, म आपस नवदन करत ह, म आपस वनत करत ह... मझ अब और मत सतओ!... बस इतन ह... तब बहत ह गय, पच सल पहल... नह, मस। म नह ज रह ह, लकन म आपक कस भ तरह स चट नह पहचन चहत... शत ह जइए, कपय, और मर बत सनए... कवल एक चज ज म चहत ह वह ह आपक आतम क रहत दन और उस बट क पकष लन ज मर भ ह... मरएल क बर-बर बहश महसस हई, और उस आदम क उस पकडन पड तक वह फरश पर न लढक। फर उस आदम न उसक हथ पकड लय और, उस कछ हद तक सवसथ करत हए, उस शहर क चरह पर बन आरकड क ओर ल गय, जह उसन उस आरकड क छत क सहर दन वल जवत पतथर क सतभ म स एक पर सहर दय। तम दख, यद आत ह; मर लए, मझ कछ नह चहए. म कवल यह चहत ह क मर बट एक अकल म स न आए... उसक एक अतम नम ह... तक आप शत ह सक... फर, म चल जऊग... म आपक जवन क लए... य बचच क लए दबर समन नह आऊग... वह आदम चप रह और मरएल न अपन नगह उठई, उसक ओर दखन क लए नह, ज उस पटग म भ नह दखन चहत थ, बलक कछ मनट क लए मन म आकश क चतन करत रह, जसक बद, जस क वह अभ-अभ एक जबरदसत सदम स उबर ह, उसक आवज कस भ अनय क तलन म अधक धम थ। बत, उनहन कह मझ जन द... वह आदम एक तरफ हट गय और वरतपरवक उसक समन बहत अधक गभर हकर झक गय। मरएल फर उसस दर जकर, बन सर घमए, बन कई शबद जड, चलन लग... इसक बद क दन म, पत क बन वयकल म न उस घणत परण स भगत हए, उस परचत घर म खद क एकत म रख लय, ज उसस दबर बत कए बन, उसक पस दबर आए बन, उस दन-ब-दन परशन करत थ, कयक ऐस कई जगह नह थ जह वह जत थ क वह तरत उस सबस अधक आगरह क सथ दखत हए परकट नह हत थ; दनय क सबस बड बशरम क सथ उस दखत ह रकषस उस उठ ल गय। उसन उस अपन परम क हतयर और खद क बलतकर घषत करन क बर म भ सच। लकन उसन कभ ऐस नह कय. आशक रप स इसलए, जस क उनहन सवय उनस कह थ, वह नह चहत थ क रषटरय धरत पर और अधक रकतपत ह, बलक, एक असपषट "मझ नह पत क कय" क करण भ, जसन उनह, सटक रप स, उस आदम क सथ रक... वह उसस अपन पर आतम स नफरत करत थ; छह सल पहल उसन उस ज असमत नकसन पहचय थ, उसक लए उसन उसस इस दनय क सभ बरइय क कमन क... लकन, आशचरय क बत ह क, वह उसक मतय भ नह चहत थ। फर एक दन उसक पत न यह कहकर उस चक दय कय आप मरएल क जनत ह?... उनहन मझस सरफ आपक सफद हथ मग थ!...सच कह त, उसन इस बत क अनसन कर दय, लकन जब उसक पत न हसन बद करक जर रख, त चज बहत अलग थ। यह सचमच मजदर थ! एक बवकफ आदम, एक दख इलकटरशयन ज आज सबह कछ चज ठक करन आय थ, जसक पस आपस शद करन क नटक करन क अलव कई बहतर वचर नह थ... लकन, ज अवशवसनय थ, वह उसक दससहस थ जब उसन कह क आप उसक इरद क जनत थ और आप वरध नह कर रह थ... और यह तब थ, "कसरय" वल बत और उसक शनय वरध क सथ, जब मरएल क पत क आकषप म दलचसप ह गई आप कय कहत ह पतज? तम कय सनत ह बट. उस कसन न दव कय क कछ दन पहल उसन तमह चरह पर रक थ और तमस कह थ क वह तमस शद करन चहत ह... और तमन उस 'नह' नह कह थ! (शर पत क ओर स नई हस)... कलपन कजए! हम उस आदम क तलश करन हग!... उस समन आन हग!... आपक उस बतन हग क म उसस शद करन क लए सहमत ह... लकन आपक उसस यह वद करवन हग क शद क बद वह मझ परण ववहक अनमत दग तक म जह चह ज सक, यह तक क वदश म भ... बदल म उस परयपत धनरश क पशकश कर... मझ यकन ह क वह सवकर करग... जस क आप कहत ह, वह एक बदमश ह, लकन बन कस नतकत य शलनत क एक बदमश भ ह... और यह, पत वसतव म हरन थ। चल, म कछ समझ नह. य त उसक बट अचनक पर तरह स पगल ह गई थ, य वह वह थ ज पगल ह गय थ। लकन बत यह थ क वह वह सन रह थ ज वह सन रह थ... कई और रसत नह थ... फर, पगल वह नह थ। लकन बर बत य ह क उनक बट बलत रह कय आपक एहसस ह, पतज?... मर बट क पस एक मनयत परपत पत, एक नम, एक उपनम हग!... सभ बचच क तरह... कई भ कभ भ उस पर उगल नह उठ सकत... आप पर नह... म भ नह, हलक यह मर लए बहत कम मयन रखत ह... लकन... लकन बट... तमह उसक सथ रहन हग!... और हम!... एक मसटर नबड क सथ... एक नयमत इलकटरशयन... एक सधरण करमचर, सकषप म... कतन शरम क बत ह, मर भगवन!... हम सभ क लए कतन शरम क बत ह!... नह पतज... कस क भ यह नह जनन हग क मर पस कन ह। ववहत... उनक अनमत स, म जह उचत समझत वह रहन ज सकत थ... जह कई मझ नह जनत थ... वदश म शयद... और आप कह सकत ह क म अपन पत क सथ गई थ, बन यह बतए क वह कन ह... य उनक एक सवधजनक जवन क आवषकर कर रह थ... और वह ममल वह रह गय, कम स कम कछ समय क लए, कयक हम पहल स ह जनत ह क उस समय, वरष 40-41 म, मत-पत कस थ: उनक समदर... त जब पतज न कह कपय चप रह, म इतन सर बकवस सनन जर नह रखन चहत! मरएल चप थ और कमर स गयब ह गई, लकन बत यह ह क उसक वचरशल पत न यह सचन शर कर दय क उसक बट कय कह रह थ और, लगभग मनट क बजय घट क हसब स, उस यह अधक स अधक पसद आय, इसलए ववह समरह बहत अधक दन क बद नह, द सपतह य, कस भ ममल म, कछ और दन म मनय जन लग, कयक अजब "दलह" क वद सवकर करन म कई समसय नह थ। "दलहन" क पत इतन दयल थ क उनहन उसस पछ। समरह नरजन शहर क चरच म और कस भ दन सबह क शरआत घट म हआ, जसम उपसथत "दलह", "दलहन" क मत-पत, परवर क एक परन नकर और चच जकवन तक समत थ, बद क द गवह क रप म हसतकषर करत थ, दन परश रकरड और अदलत क रकरड म, ज "परचन शसन" क अनसर समनय थ, ज आमतर पर हत थ, क सचव और अदलत क कछ अधकर, ववह करयकरम बनन क लए चरच क पवतर सथन पर गए। कनन तर पर आधकरक एक अनय वसत, चक सथनय अदलत भ सवल रजसटर थ, जस ह ववह परमण पतर पर ह गय, मरल क बट क रजसटर बदल द गई, जस नई शद क वध बचच क रप म पजकत कय गय थ। फर, दन आवशयकतओ क पर करन क बद, बलकल नए पत और पतन सपषट इचछओ क सथ अलग ह गए, अपन कनन पत क अपन बक दन म फर कभ नह दखन क इचछ क सथ। इस करण स, अगल ह दन और दर-सवर, पत दवर शहर म सथपत वदयत करयशल म, घर क परन नकर, जसन गवह क रप म समरह पर हसतकषर कए थ, वयपक ववहक परधकरण स ससजजत थ, ज पहल स ह वध पत क अपन कनन पतन और पतन क दन थ, सथ ह ऐस वधवत हसतकषरत दसतवज क बदल म सहमत धन क चक भ दन थ। लकन ऐस हआ क मरएल क पतक घर क वफदर कलरक न आत ह उस करयशल क छड दय: अपन जब म मदरक चक क सथ, कयक उसक पत न इस असवकर कर दय थ, और लब समय स परतकषत ववहक परधकरण भ उसक कबज म थ, लकन अहसतकषरत। वह उधम मचन वल पत अब मग कर रह थ क, अगर मरएल क ऐस अनमत चहए, त उस इसक तलश क लए खद ह जन हग, और उसक जमन पर: मछल पकडन वल उस सधरण इलक म जह वह रहत थ और कम करत थ। मरएल न सवकर कर लय, इसलए, एक बर फर, अगल दन, और दपहर क शरआत घट म, वह पडस क परवश दवर पर थ, उसक नक क शलषम झलल और उसक सवद कलकओ म समदर क गध और सवद, तज मछल क गध और सवद क सथ-सथ नकटतम कटबरयन सगर क गध और सवद, हल ह म वलपत हन वल सबह क उन दर क घट म एनकस और बहत एकत बदरगह क बजर म उतर। मछल पकडन वह तरत बहर नकल, थड और आग और एक कध पर झकत हए, ज खरब पथरल और लगभग धल भर सडक क छट समदर तट स अलग करत थ, ज सडक क बई ओर फल हआ थ, ज कई मटर नच थ, जसम हर घट छट लकन वयसत मछल पकडन वल बदरगह थ, दई ओर और कछ हद तक मरएल क समन, अत म और गल क दई ओर, लगभग उस कदर म जह पडस समपत हत थ। वह वयकत, ज दसतवज क अनसर चरच और अदलत दन म परसतत हआ, मर कहलत थ; मउर एसटवज और जमन, पतथर क कनर स खड हए और मरएल क ओर चल, उसस मलन क लए, जब तक क दन आमन-समन नह थ और मशकल स एक मटर क दर पर थ। जब ऐस सथत आई, त मरएल इधर-उधर नह भग, बलक "शघर ह और दई ओर" "परवश" कर गई; चलए, यह सध मदद पर थ आइए इस कषटपरद ममल क यथसभव सकषपत बनए। म जतन जलद ह सक समपत करन चहत ह तक म ज सक और उस फर कभ न दख सक... और यह कहत हए, उसन मउर क चक और परधकरण दन सप दय, जस पर वह वधवत हसतकषर करन चहत थ। बशक, परधकरण क वछत परभव क लए, इस कम स कम द गवह क हसतकषर क सथ परमणत करन हग, कयक मन सपन म भ उममद नह क थ क "वह" आदम नटर क समन हसतकषर करन क लए सहमत हग, ज सबस परभव हग; लकन द गवह परयपत हग, कयक उनक पहचन और पत दखई दग, जसस उनक गरफक गवह क पषट करन आसन ह जएग, और वह, उस परवश म, उनह ढढन मशकल नह हग। मर न, वसतव म, ज दसतवज उस सप गए थ, उनह अपन हथ म ल लय। उसन अपन नम पर हसतकषरत चक क एक हजर एक बर पलट कर दख और यह बत वयपक ववहक परधकरण क कगज क सथ भ हई, तक, सकषप म, मरएल ज चह वह कर सक, जब तक क, वसतव म, अपन पत स अलग न ह जए, वह एक शबद भ कह बन। आखरकर, मउर न महल क दन दसतवज लट दए, जस उसन उनह दए थ। मरएल नह. यह वह नह ह ज म चहत ह, पस, तमह वह दन क बदल ज तम मझस चहत ह। चल, अगर तम सचमच चहत ह क म उस कगज पर हसतकषर कर, त तमह उन शरत पर सहमत हन हग ज म तम पर लगत ह, न क व शरत ज तमहर पत और तम चहत ह... मरएल क पर शरर तरत अकड गय; कहत हए वह एक कदम स जयद, एक लब डग पछ क ओर बढ कभ नह!... कभ नह, कय तम मझ समझत ह?... तम मझस कभ भ कछ भ अनड हसल नह करग!... तम कभ भ, कभ भ, मर आनद नह उठओग! मर भ नह!...उसक परतकरय सनकर मउर जर-जर स हसन लग। इसम कई सदह नह ह क आपक अवरणनय सदरत, परयतम... मर महल (और उसन इन अतम द शबद म ज रग डल, उसस मरएल क कन तक शरम गए) लकन नह; चतत न ह य सतरक न रह, कयक मर इरद बलकल भ सह रसत पर नह ह, मन लजए... कमचछ... हलक, नशचत रप स, उसक सदरत मझ कफ हद तक आकरषत करत ह, इसलए म एक नशचत तरक स इसक आनद लन चहग... आप कह सकत ह... मर एक पल क लए चप ह गय, और अपन आख मरएल पर टकए रख ज पल-पल और अधक लल हत ज रह थ... म तमह बतऊग क म तमस कय चहत ह. बस, उस दख... नह, उस मत दख... उसक परशस कर!... उसक बर म सचकर मतरमगध ह जओ!... और दन म कछ घट उसक सगत क आनद ल... सकषप म, तस दन क लए, तमह यह आन हग, इस पडस म, और मर सथ इन गलय और मड स गजरन हग... समय-समय पर समदर तट पर भ... और समय-समय पर मर घर आन... मरएल न उस आग नह बढन दय। सबस ठड सवर म, ज उस मल, सथ ह अधक कठर, तख और अधक तरसकरपरण तरक स, उसन उस रक। तमह वह मझस कभ नह मलग!... तम मझ अपन समय क एक भ कषण अपन सथ सझ करन क लए सहमत नह करग!... चक ल ल और इस खतम कर द... यह एकमतर ऐस चज ह ज तमह मझस कभ नह मलग!... बलकल सह, मरएल... न ह तम मझ कभ कस अनय तरक स अपन अनरध पर सहमत करग... तम जवन भर, अपरवरतनय रप स मझस जड रहग... और कय... कनन, धरमक और नगरक, मर ओर स ह... तम सभ क लए मर पतन और महल ह कनन उददशय... आपन उन दसतवज पर हसतकषर कए ज इसक पषट करत ह... सवचछ स... म, वह अकल थ, आप अपन परवर स घर हए थ... म सवल गरड क पस ज सकत थ और उस पर घर छडन क दव कर सकत थ... व उस सवचछ स य बलपरवक मर घर ल आएग, कयक महल क पत क सथ उस तरह रहन हग, जस पत क पतन क सथ, और घर छडन एक अपरध ह... व उस मर घर ल आएग और... अगर मन उसक सथ बलतकर कय त मझ पर कन आरप लगएग?... म आपक कनन पत और पतन ह और मझ आपक जतन चह उतन आनद लन क कनन अधकर ह... मरएल डर हई थ... बन बल... बन हल-डल... उस जबरदसत आतक पर परतकरय करन म सकषम हए बन जसन उस जकड लय थ... "ह भगवन, मर भगवन, मन कय कय ह! मन खद क सप दय ह, इस पतत, भयनक आदम क हथ और पर बध दए ह!" उसन अपन आप स बर-बर कह, कयक वह जनत थ क वह, वह आदम जसस वह अपन जवन म सबस अधक नफरत कर सकत थ, सह थ जब उसन कह... सब, ठक ह... यह उसक हथ म थ... वह उसक सथ ज चह कर सकत थ... तम नरणय कर, मरएल। य दन म द य तन घट क लए मर उपसथत क तस तक सहन कर... और यह बत द क उसक कपड क एक बल क भ छए बन... और फर वह वयपक परधकरण ल जसक आप बहत इचछ रखत ह... आपक मन क अधक शत क लए, एक नटर क समकष हसतकषरत भ, य अनशचत कल क लए, डमकलस क तलवर तक, जस दन आप कम स कम उममद कर, म पत और पतन क रप म अपन अवभजय अधकर क दव कर सक... वस, ज मन इस आपक पस लन क बर म कह थ, एक दपहर य दसर क मर घर पर, कय यह नह ह हम दन अकल रहग... इस सबध म शत रह, कयक मर म मर सथ रहत ह, त हम हर समय उनक सथ रहग... और, आप मझ उन सवततरतओ क बर म बतएग ज वह मझ दत ह... अगर म उनक उपसथत म आपक अपमनत करन क सहस करत ह त यह मझ मर डलग!... मरएल न बन यह जन क कय करन ह, उसक ओर दख... अत म उसन कह म तमह एक बलतकर और हतयर कहकर ननद कर सकत ह! सच ह... लकन मन अभ-अभ तमस शद क ह, और तमहर परण सवकत क सथ, फर बलतकर बत... मन, अतत, तमहर कलकत सममन क लए इस तरह क समधन क लए सहमत दकर, अपन मरखत क लए सशधन कय ह!... फर स मउर चप रह, उसक चहर पर परतकरयओ क दखत हए, ज, नशचत रप स, उसक कठर चहर क बर म लनत द रह थ लकन यह भ सच ह क "लल हतयर" क इसस भ बर इलज हग... आखरकर, म उस समह क हसस थ जसन परम क "मर डल"... बशक, मन गल नह चलई, और आप यह अचछ तरह स जनत ह: जब दसर न गल मर त म बलकल आपक सथ थ... लकन इसस कई फरक नह पडत... म हतयर क समह स थ, इसलए म भ थ... म एक हतयर ह, इसलए... दवर स दवर तक! और भगवन मर आतम पर दय कर... कय यह सच नह ह? मर क ओर स एक और वरम, उसक ओर दखत हए, जसन तब तक कस भ अनय चज क तलन म उस अधक ललस स दख, कयक उस अतयधक नफरत करन वल वयकत क भषण ज दश ल रह थ, उसन उस पर तरह स नरश कर दय थ। आप धरमक और कटटर कथलक ह, ठक ह महदय? नशचत रप स! बलकल; यह तरकक बत ह... सवभवक बत ह... त... लगभग हर दन, अगर सरफ हर दन नह, त आप "हमर पत" क पररथन करग। बशक तमहर पस ह! और आप शत स यह पठ करग, "और मर अपरध क वस ह कषम कर जस म उन लग क कषम करत ह जनहन मझ अपमनत कय ह", ठक ह?... लकन मझ लगत ह क यह आपक लए कर औपचरकत स जयद कछ नह ह... आप इस ऐस कहत ह जस तत ज सखय जत ह उस दहरत ह। य, म गलत ह, और कय आप सचमच उन लग क मफ करत ह जनहन आपक ठस पहचई ह?... कय आप मझ उस भयनक बरई क लए मफ करत ह जसक लए मन आपक परशन कय थ? मर क ओर स एक और वरम, जबक मरएल अधक स अधक नरश ह गई, जब तक क वह पर तरह स नहतथ महसस नह करन लग कयक वह बहत भरमत थ। और अगर मर न उस धयन स दख, त मरएल न भ उस तरह मउर क दख। और बड बत यह थ क वह उसम सपषटत, उसक आख म ईमनदर दखन लग थ... क वह उस धख नह द रह थ; क म अपन दल हथ म लकर उसस बत कर रह थ... और वह, वह सपषटत, वह अतरनहत ईमनदर, वह बत थ ज उस सबस अधक परशन करत थ। य, कय यह वह पशवक, भयनक वयकत नह थ? वह उस रकषस क चहर यद करन चहत थ, लकन ज कभ नह दख, उस यद रखन मशकल ह, असभव ह... और सच त यह ह क वह उस जगल, पशवक परण क दखन भ नह चहत थ, य एक बर भ उसक ओर दखन नह चहत थ... उसन अपन बचव करन क कशश क, लकन एक जनवर, एक अमनवय जनवर क रप म अपन शकत क सथ, वह पर तरह स उस पर हव ह गय और उसक सथ वह कय ज वह चहत थ और जब तक वह सबस अचछ समझत थ, कयक वह कवल रन, और रन, और भ बहत कछ कर सकत थ। चललन लकन एक बत उस पर सपषटत क सथ यद थ: उसक सस, उसक बदबदर, मतल पद करन वल सस, गध... इतन कछ दमग म आय क वह अवरणनय असहनय गध सपषट ह गई, सथय रप स मजद... कछ कषण क लए, उस वशवस ह गय क वह भयनक कषण फर स वसतवकत बन रह थ, वह दरगध इतन वसतवक थ जस उसन महसस कय थ... इतन अधक क वह उलट करन क कगर पर थ... एक बर फर उसन अपन आगरहपरण दषट समन खड आदम पर जम द... नह; इन हल क दन स पहल उसन वह चहर कभ नह दख थ... फर उसन उस गध पर धयन कदरत कय ज उस अजब चज स कह अधक नकल रह थ। उसक सघन क कषमत न खद क इस तरह स लग कय जस शयद उसन पहल कभ नह कय थ, उस आदम क सबस छट घरण अण क भ समझन क कशश कर रह थ जसन उस लगभग, लगभग, पगल कर दन क हद तक चकत कर दय थ... लकन उस अकथनय रप स बर यददशत क बर म, उसक इदरय क एक भ बर एहसस नह हआ। नसदह, मउर स बलकल भ दरगध नह आ रह थ... उसक गध म कई इतर य कलन नह थ, कवल सवचछत क अचक अनभत थ। बदबदर, सगधत सबन क एक अनथ सफई, कयक नशचत रप स उपयग कय जन वल एकमतर सबन घर क बन हग, सड वल, मरल क पसद क हसब स बहत महग टयलट सबन क तलन म कह अधक कशल। ह; सवचछ गध वह ह ज मरएल न मउर स गरहण क। सवचछ इतर-रहतत क गध, कयक एकमतर सगध ज परष न छड वह एक परष क तलन म अधक मजबत थ, वह वशषट गध, समनय रप स, मनव लग क परतयक परष वयकत दवर नषकसत क जत ह, कयक महल वरग भ इस सतरण बरकय, बरकय म परकट करत ह, ज क, मरदन और सतरण दन, यन गतवधय म इतन परमख परभव नभत ह, हलक, मन लजए, वयकत क परकतक वशरम क सथत म, बलक, यह हम, वयवहरक रप स, असततवहन लगत ह। लकन मज क बत यह ह क मरएल क मरदनग क ऐस गध बहत सखद लग। फर उसन मउर क ओर ऐस दख मन उसन उस पहल बर दख ह, और, वसतव म, यह कह ज सकत ह क ऐस थ, कयक तब तक, वसतव म, उसन उसक ओर नह दख थ। बशक, वह उस पहचनत थ, लकन वह उस नह जनत थ, उसन कभ भ उस इतन दलचसप स नह दख थ क वसतव म दख सक, जन सक और पत लग सक क वह वसतव म कस थ, उसक वशषतए, उसक शकल-सरत... और उसन ज दख उसस उस बहत खश हई। वशषकर उसक आख; व नसतज, सपषट आख, जनम कस भ तरह झठ, झठ कभ घसल नह बन सकत। और, आखरकर मरएल न हर मन ल; उसन "वजत क दय" क समन आतमसमरपण कर दय और उस आदम क वरध जर रखन म असमरथ ह गय जसक बर म वह अब नह जनत थ क कय सचन ह। यह सच थ क वह उसस नफरत करत थ कयक उसन कभ नह सच थ क कई भ नफरत कर सकत ह, यह सच ह क, कछ सकड पहल, वह अपन हथ स उसक गल घटन म भ सकषम थ... लकन अब वह ऐस करन म सकषम नह थ... इसक अलव, वह थक गई थ... बहत, बहत थक हई... इसक अलव, भरमत; कई भ नरणय लन म असमरथ, कयक वह कस भ सपषटत क सथ सचन म वयवहरक रप स असमरथ ह। और उसन खद क घटनओ म बह जन दय... कयक उस आदम, मउर न उस कय बतय थ ठक ह... मर... ठक ह? ह मम। मउर एसटवज... आपक सव क लए... ठक ह मउर। ठक ह, कल तक... आज म जन पसद करग... म थक गय ह... मझ अचछ महसस नह ह रह ह... कल म आऊग... लगभग चर बज... य दपहर सढ चर बज... म द घट आपक सथ रहग। सढ चर बज स सढ छह बज तक; तख; एक मनट भ जयद नह, एक मनट भ कम नह... इस तरह, तस दन तक... और फर... ह मरएल। म अपन बत रखग, नटर क समन आप ज चहत ह उस पर हसतकषर कर दग और म आपक जवन स गयब ह जऊग... आपक जवन स और उसक जवन स... ठक ह, आपक बट। म त शपथ खऊग, परनत तम त कवल परमशवर क शपथ खत ह, और म उस पर वशवस नह करत; म कस भ अचछ "लल" क तरह नसतक ह। त, म आपस वद करत ह... मरएल चल गई, लकन, जस क उसन मउर स भ वद कय थ, अगल दन और तज स समय क पबद (2) क सथ उसन उस पडस क मखय सडक स आत हए दख, सबस चड और सबस सध और सबस ऊपर, सबस लब। मउर पछल दन क तरह उस कनर पर और कमबश उस मखय सडक क ऊचई पर झक कर उसक इतजर कर रह थ। जस ह उसन उस दख, वह उसस मलन क लए बहर जन क लए पतथर क दवर स अलग हकर उठ खड हआ। जब व दन मल, अपन मल सथत स कछ हद तक समन दर पर, मउर न पर शषटचर क सथ उसक सवगत कय: वह उसक हथ क धर स चमत हए, लगभग वरसय क तरह शरदध स उसक समन झक। आन क लए धनयवद, मरएल। आप कह चलन चहग? दख मउर, आइए शर स ह चज सपषट कर द। म यह आनद क लए नह ह, कयक म वसतव म ज चहत ह वह यह ह क जतन जलद ह सक आप पर स नजर हट जए और फर कभ आपक न दख य आपक बर म कछ भ न जन, बलकल कछ भ नह। इसलए मर चपलस करन क कई जररत नह ह, कयक न त मझ यह पसद ह और न ह म इस चहत ह। मन यह आपक सथ आन क वद कय थ, बदल म कछ खस चज क लए, त मझस इसस अधक न मग, आपक समन मर उपसथत, मर कपन नह, दन म द घट और तस दन क लए। म आपस बत नह करन चहत, न ह मझ य य व करन म कई खस दलचसप ह. आप वह कर ज आप चहत ह, जह चह चल य जए और आपक उचत लग, म खद क आपक सथ जन तक ह समत रखग, जह भ आप जएग, लकन आपक सथ नह जऊग, कयक आपक कपन वह ह ज म कम स कम चहत ह... म दख रह ह क आप मझ मफ नह करत ह। मरएल न तरत कई जवब नह दय. वह एक सकषपत, बहत सकषपत कषण क लए चप रह, जब तक क उसन आह भरत हए अतत कह नह कषम क ईसई करतवय क बर म आपन कल ज कह, सचचई यह ह क यह ससमचर ह। एक ईसई और कथलक हन क नत मझ उस मफ कर दन चहए; यश, अपन उदहरण स, हम ऐस करन क लए मजबर करत ह... लकन मउर, मझ नह लगत क म कर सकत ह... तमन मझ बहत अधक चट पहचई ह... म तमह मफ करन चहग... नह, म नह करग, म चहत ह... लकन आप जनत ह क यश न खद भ कय कह थ: "आतम तयर ह, लकन मस कमजर ह"... म वह नह ह... म कवल इसन ह... और मझ नह पत क, एक दन, म तमह मफ कर पऊग... लकन आज, मझ खद ह, लकन नह; म नह कर सकत… मरएल; म आपक सथत क भल-भत समझत ह... बन कस उपय क आपक मन म मर परत ज घण ह, कयक म मनत ह क पच सल पहल मन आपक सथ ज शररत क थ, उसस भ बड शररत क दर करन बहत मशकल ह, लकन बस उसक बरबर करन बहत मशकल ह... इसलए म इस आपस बहतर समझत ह, बन कस सदह क, वशवस करत ह। लकन, कय आप एक बत जनत ह?... सभवत अगर वह मझस थड बत करन क लए सहमत ह जत... य, बस, मर बत सन... धर-धर वह उस मन क सथत पर कब प सकत ह, ज बन कस सदह क, उस अदर तक ख जत ह... मर एक पल क लए चप थ और मरएल, जहर तर पर, उसन ज कह, उस पर कहन क लए कछ नह थ, इसलए वह आदम जर रह सचमच मरएल। म यह बत अपन स जयद आपक लए कहत ह। य, कय तमह यद नह ह क जब म चरह पर तमहर पस आय थ, जब तम चरच स नकल रह थ और पहल बर तमन मझ दख थ और मन तमस बत क थ त मन तमस कय कह थ? मन उसस कह क म भ उसक आतम क शत करन चहत ह. मझ लगत ह, मझ पत ह क म उसक एहसनमद ह। मन ज कय वह ह चक ह और आप समय म पछ नह ज सकत... लकन म आपक दख क कम करन क कशश कर सकत ह... उसक लए आपक पड... आप नह जनत क म कय दग कयक ऐस नह हआ थ... मझ पर कय बझ ह, कयक वह अमनवय वहश कतन बर आदम थ जसन आपक सथ जस तरह स करर वयवहर कय थ... मझ आपक मदद करन क कशश करन क अनमत द, इसक लए आपक सतवन द... अपन मफ मग और, यद सभव ह, त अपन आतम क रहत दन क कशश कर... मरएल न एक बर फर उस आदम क ओर दख, जसन पहल कय... वह रकषस जसन एक दन उस इतन नकसन पहचय थ?... और महल क, क, यह आदम ज अब लगभग ललस स उसक बर म सच रह थ, और जस वह सबस अधक जच-परख क सथ दखत थ, वह उस पशवक परण क समन ह वयकत थ, वह रकतपपस जनवर ज बलकल भ मनव नह थ, अवशवसनय लग रह थ; असभव, ऐस कह ज सकत ह... कयक, एक बर फर, उस यकन थ क व आख झठ नह बलत... क उन आख म ज अफसस धडकत थ, वह रप, वह असधरण असततव, सकषप म, असदगध रप स, परमणक थ, वसतव म महसस कय गय थ। और, नसदह, उसक भरम, उसक घबरहट एक पल क लए भ कम नह हई, बलक हर मनट क सथ बढत गई जब वह उस अजब आदम स भ अधक उसक सथ रह। आखरकर, मन सवपन स नकलकर वह बल थड दर क लए समदर तट पर टहलन बर नह हग... दपहर आपक ऐस करन क लए आमतरत करत ह... यह अभ भ थड गरम ह, और समदर क ठडक नशचत रप स अचछ लगग... और बन कछ कह दन सढय स नच चल गए ज समदर तट क बढय रत पर समपत हई। व आग बढत रह, जब तक क व उस कनर स बहत दर नह थ जह पन पहच गय थ और व समदर क रख क समनतर, धर-धर, आरम स चलत रह। मउर न समय-समय पर उसस बत क, लकन अपन बतन जद म जर भ आग बढ बन, हर समय कशश करत रह क उस जररत स जयद परशन न कय जए, तक उस उसक समन उसक गभर चपप स बहर नकलन क कशश क ज सक। और इसलए, धर-धर, उसन उसस कछ मनसलबलस नकलन शर कर दय। वह पहल सर, आध सझ, दपहर ठक सढ छह बज समपत ह गई, जब मरएल न उस बतय क वह ज रह थ। मर उनक सथ वह गए जह व शम 4:30 बज मलग। कस भ अनय चज क तलन म बद पर अधक, और उस दख, एक दन पहल क तरह, एक सकड क लए भ अपन सर घमए बन, उसस दर चल गए। उन पहल द घट स ज व एक सथ चल, वह द घट एक सथ, लकन एक सथ मशरत नह, लगभग जरमनक समय क पबद क सथ, दन-ब-दन हत रह। हमश, भ, उस एकरसत क सथ, लगभग वशष रप स समदर तट पर और मउर क ओर स बतचत क खरच क सथ, कयक मरएल एक य दसर क तरह अपन शशवत मनसलबलस म फसत रह और, बलक, कछ परतकरयए। और मनसलबलस क बर म बत अचछ तरह स कह गई ह, कयक अगर मरएल न कभ भ एक डसलबल जर कय और, अकल रहन द, एक टरइसलबल य उचच सथन, त ऐस थ क सबस दरलभ घटन पर खश क घटय बजग, ज न कवल उस शहर क, बलक उस शहर क भ, जह व दन रहत थ, उस कषतर क नगरपलक इतहस म एक जगह क लयक हग। इस तरह चज चलत रह, एक दपहर तक, कमबश एक हफत और कछ दन म शम क सर क दरन, एक ऐस घटन घट ज, कम स कम उन लग क लए, वसतव म यदगर थ। उस असधरण दपहर म, व दन चल रह थ, लगभग हर पछल दपहर क तरह, समदर क कनर, महन रत स भ अधक पर चलत हए, जब मउर क अपन जत उतरन और अपन टखन स थड आग पन म उतरन क वचर आय। वह हस न करय करन शर कर दय, जस क अकसर हत ह जब हम इस तरह क मनरजन म सलगन हत ह, दसर ओर, मसम क समदर, पन क मधयम स कदन, छट मरन और पन क छरर क ऊपर उठन, मन लजए, लत मरन य ऊपर क ओर मरन। मउर और अधक हसन लग, एक बचच क तरह ऐस छट-छट बत, वसतव म बकवस क आनद ल रह थ, और उसन मरएल क भ गद समदर तल म उतरन क लए आमतरत कय। और ऐस नह ह क उस आदम क जर स भ उममद थ क वह खबसरत महल उसक नमतरण सवकर कर लग, कयक वह उसक लगतर इनकर स अचछ तरह स वकफ थ, लकन पहल चमतकर हआ ज उस अदवतय पर, फलहल, दर दपहर क हआ। कछ मनट तक वजन उठन क बद, आखरकर उसन अपन मन बन लय और अपन जत उतरकर, अपन बहद खबसरत और छट पर क पन म डल दय। लकन चमतकर यह नह रक, कयक यह भ उसन, और शयद पच सल पहल "उस" दन क बद पहल बर, अपन हस हव म उडई, तज, लपरवह, सथ ह, भरतय क भमक नभत हए, उसन पन म छट मर, मउर म तरल समदर ततव क छट धर छड, उसन ज गरषमकलन और करयतमक कपड पहन थ उस एक डमन क तरह दखन क लए नरधरत कय थ, हलक वह अजब ममल उछल स भ अछत नह थ। क, कमल "बदल" म, उसन उसक "आकरमकत" क जवब "सहन" दय हलक, सच बतन क लए, सबस बड, भयनक चमतकर, कई कह सकत ह, बद म हआ, जब, दल स हसत हए, व दन पन स बहर आए, ठक ह... आशचरयचकत रहए, दयल पठक स भ अधक, उनहन ऐस कय... हथ पकडकर!!!... अवशवसनय, लकन सच ह। मरएल क ओर स इस तरह क दयल भव क बवजद, यह अचछ तरह स कह जत ह क "गरब आदम क घर म खश अलपकलक हत ह", कयक उसक ओर स ऐस समय वयवहर तब तक जर रह जब तक सदरत क अपन पर क तलव क नच, बन कस तरल पदरथ क, रत क महसस करन म मदद मल, जस बद पर उसन जलद स, जस क एक एसप न कट लय ह, मउर क हथ छड दय, उसक चहर पर तरह स लल ह गय। दन क बच कछ मनट क शरमदग भर खमश छई रह जस मरएल न आखरकर तड। मफ कर मर, लकन म अभ जन चहत ह। म थक गय ह... मझ वसतव म जन हग... मझ इसक आवशयकत ह... यद आप चह, त कल म एक और घट क लए आपक सथ रहग... और उस समय, शम क मशकल स 5:30 बज थ, दपहर क सढ पच बज थ, इसलए मरएल एक घट क लए भ मउर क सथ नह रह थ। चत मत कर मरएल; कई बत नह, चह त चल जओ. और अगर वह कल वह नह ह... ठक ह, मत आओ, कपय... म उसक उललघन बलकल नह करन चहत। म ज चहत ह वह यह ह क सब कछ अचछ तलमल क सथ चल, बन आपक जयद दबव महसस कए... मझ अपन सममनत उपसथत दन क लए आपक लए कय आवशयक ह... कय आप चहत ह क म आपक सथ रह? नह - नह; कपय!... (उसक दवर उपयग कए गए जवत सवर न मउर क उसक परसतव क अनपयकतत क सकत दय, कयक सपषट रप स उसक हथ पकडन क वह ममल अतरगत ह उसक सथ उसक अचनक असहजत क करण थ) बहत-बहत धनयवद, मउर; म वसतव म इसक सरहन करत ह, लकन यह जरर नह ह... वस भ आपक बहत-बहत धनयवद, मरएल धनयवद स भर हई थ, लकन, अनजन म, वह चल गई। हलक, मउर धर-धर उसक सथ तब तक गय जब तक क वनमर पडस क कदरय सडक समपत नह ह गई, वह स शहर क शहर कषतर तक फल हई थ। लकन ऐस हआ क उसक बद स, एक नशचत तरक स, शनदर दपहर, कयक उसन मउर पर अपन हथ रख थ, मरएल क शषटचर, पहल त, उस खश दपहर क सबध म कफ भनन थ, कयक वह, अधक कटटरपथ तरक स, उसस अपन पररभक अलगव म लट आई थ; वह पहल अरध-मयटजम... और इसलए एक क बद एक दन बतत रह, मक कपन म चलन क उस शरआत एकरसत म, कस तरह स उस महल क शम क यतरओ क उदस मछल पकडन वल पडस म और जयदतर, सधरण शरमक क बलन क लए। दन चर-पच दन और बत थ, जब एक दपहर मउर न आत ह मरएल स कह आज दपहर क हम मर घर जयग. मर म न ऐस चकलट बनई ह क आप उगलय चटत रह जएग, दखत रह जएग; और आज सबह ओवन म बनए गए कछ मफन, ज सवद क खतम कर दत ह। आप दखग क आपक हर चज कतन पसद आन वल ह... "चल मर घर चल" शबद सनत ह मरएल क पर शरर अकड गय। ऐस लग रह थ मन उसक समन कस गहर खई स ह रह ह, जसम स वह कस भ कषण गरन वल थ, जसस एक परकर क आतक उस पर हव ह गय, जसस वह लगभग कपन लग। उनक कलपन स पच सल पहल क वह भयवह कषण यद आ गय। उसन खद क फर स बलतकर हत दख, वह भ असमत हस क सथ, लगभग "तब" स भ अधक, ज कछ कह रह ह। उसन उस भयनक रकषस क फर स दख, वह अमनवय जनवर उसक ऊपर थ, उस टटल रह थ, जबरदसत उसक अदर घस रह थ... और उसक भयकर रकष क खतम करन क लए उस असमनय कररत स मर रह थ... लकन, अब, उस आदम क पस एक चहर थ... एक चहर जसम, उनमतत कररत, परण और वसतवक बरई क अभवयकत स वकत हन क बवजद, मर क चहर पर तरह स पहचनन यगय थ... नह, नह, नह!!!... उसक घर नह!... नह, नह और नह!... म ज रह ह; म अभ ज रह ह!...इस तरह क असवकत क समन मउर लगभग अवक रह गय थ। उस इसम कई सदह नह थ क वह महल एक भयनक आतक क दर स गजर रह थ... उसक लए यह समझ स बहर थ, ह, बलकल, लकन उस करण स कम सचच और वसतवक नह थ। उसन उस शत करन क कशश क भगवन क लए मरएल!... शत ह जओ, कपय!... लकन... लकन... तमह कय ह रह ह? मन तमह पहल ह बतय थ... मर म घर पर ह; उस मझस डरन क कई बत नह ह... म आपक वशवस दलत ह... म आपस वद करत ह... नह... म उस कस भ तरह स नकसन नह पहचन चहत... इसस पहल क म उस नकसन पहचऊ... इसस पहल क म उस पर हथ रख, मन उस कलहड स कट दय... म कसम खत ह, यद आप चहत ह, हलक आप पहल स ह जनत ह क म भगवन म वशवस नह करत ह... क म नसतक ह... मरएल न फर स उसक ओर दख... और उसक चहर पर वह अभवयकत, वह अनत बरई, वह कषण भर पहल क परपडक कररत, महज जद स, गयब ह गई थ। कवल वह चहर, जसन कछ दन पहल, सचचई यह ह क उसन आतमवशवस जगय थ; बहत सर आतमवशवस... आतमवशवस स अधक कछ?... सच त यह ह, मझ नह पत थ... कवल उस दपहर, जब वह पन स बहर नकल त उसन खद क उसक हथ पकड हए पय, हलक उसन तरत उस छड दय, जस क उसन उस जल दय ह, फर, पहल स ह घर पर, जब उसन उस पल क यद कय, त उसन शत, आरम और लगभग खश महसस कय, उस नरकय दन क बद पहल बर... उस यह भ यद आय क उस दपहर, उसन उस हसय थ; सचमच हस, जस "उस" स पहल वह हस थ... और इसस वह चतत ह गय। वह इसक करण नह बत सक, कवल इतन ह क इसस वह तब तक चतत रह जब तक क वह असहज महसस नह करन लग। इसलए उसन खद स कह क शयद वह द रह ह और, इसस भ बर बत यह ह क वह उस आदम पर बहत अधक भरस कर रह ह, ज सकषप म, उसक जवन म सरफ एक दरघटन थ। और इस करण स, तब स, उनहन उन रप क बदल दय, ज हल ह म, उस पडस म उनक दर क रप म समन आ रह थ। अतत, अब और अधक शत हकर, वह मर क ओर मड मर इस "आउटग" क लए कषम कर... मझ नह पत क यह कस लए थ... आपक घर ज रह ह, आप कहत ह?... खर, सच त यह ह क मझ वसतव म ऐस महसस नह हत ह... लकन, फर भ, चल... उस दपहर क अचछ तरह स कह ज सकत ह क मछआर क पडस म मरएल क यतरओ स पहल और बद म एक सथपत कय गय थ, कयक मउर क म न उस पर ज परभव छड थ, वह शयद ह कभ दय गय ह। और वह अचछ महल वसतव म एक रमणय वदध महल थ, कयक वह बहत ह सरल और अतयधक दयल थ। वसतव म एक धनय आतम, जसस मलत ह वह उसस जड गय। और त और, उस दपहर ऐस हआ क, उसक आदत क वपरत, समय इस तरह बत गय क दपहर क सढ सत बज क बद उस यद आय क उस घर लटन ह, एक घट स कछ अधक दर स, ज उसक लए समनय नह थ, लकन लगभग अरचकर थ। भगवन, समय कस बत गय! मझ यह भ एहसस नह हत क म कस समय ज रह ह!... मर गरब बचच, इस समय उसक म दवर तयग दय गय! वह अचछ बढ औरत ज मउर क म थ, तरत उछल पड आह! कय आपक कई बट ह, शरमत मरएल? अचछ, ह, महदय। एक पयर स बट... चर सल क, बमशकल। बचच सदर हन चहए! मउर क म शरमत मनएल कछ सकड क लए सच म पड गई, फर तरत बल और म कहत ह, परय शरमत मरएल। कय आप कस दपहर अपन छट बट क हमर पस लन चहग? यह बस इतन ह ह, तमह पत ह? मझ बचच बहत पसद ह, और चक आप बहत सदर और अचछ ह, त आपक बचच वसतव म करम हग। ह, वह ह, महदय। और यद; म खश स इस आपक पस लऊग। कल, अगर यह आपक लए ठक ह! खर, यह मझ ठक कस नह लग सकत! कल, ह महदय। और आपक बहत बहत धनयवद, शरमत मरएल। कहन क कछ नह ह, शरमत मनएल। और जस ह वह दरवज क ओर मड, उसन कह कय तम मर सथ बहर जओग, मर? नसदह, मरएल और व दन बहर सडक पर चल गए, और उस हलक स चढई वल ढलन पर चलन शर कर दय ज पडस क अत तक थ। चलन क कछ दर बद मरएल न पछ मउर, मर जजञस क लए कषम कर, लकन... कय आपक म क वसतव म बचच क बर म कछ नह पत थ? कछ भ नह, म तमस वद करत ह... और, यह बहतर ह क वह वह नह जनत ज उस जनन क जररत नह ह... चत मत कर, मर। जब तक उसन दबर टपपण नह क तब तक व सडक पर चलत रह। ह, उसक म एक धनय आतम ह... म उसस पयर करत थ... और म कहग क वह बहत धरमक ह... मर जतन य उसस भ अधक... ह वह ह, मरएल; ह यह ह। उनक बच फर स सननट छ गय और ऊपर क ओर चलन भ जर रह। सच त यह ह क सडक क शरआत य अत स चलन वल सर इतन लब नह थ, यह इस बत पर नरभर करत ह क आप इस कस दखत ह, मर क घर स इतन दर नह थ; शयद द स, तन स मटर। और अब वह बलन वल थ मझ यकन ह क यह बत आपक हरन कर दग क ऐस म ऐस बट क कस जनम द सकत ह, ठक ह मरएल? (उसन कई जवब नह दय, लकन उसन जर रख) ह, उसन मझ बहत छट उमर स ह एक अचछ ईसई बनन क लए पररत कय, लकन, कय आप जनत ह? मर जवन बहत कठन रह ह. मर पत एक खनक और अरजकतवद थ; वह खदन म मर गय और, जब म मशकल स सलह सल क थ, म एक खदन म चल गय और यदध शर हन तक खदन स खदन म चल गय और म एक अरजकतवद मलशयमन बन गय। वस भ, जब म बस क दशक क शरआत म थ तब स ह धरमक परतबदधतओ न पन फर दय। त... आप वदयत तकनशयन कस बन? मउर जवब दन स पहल मसकरय खर, लगभग सयग स। मर पररभक शकषणक जञन पढन, लखन, जडन, घटन आद स आग नह बढ पय। बद म, मर अरजकतवद उगरत मझ लबरटरयन एथनयम म ल गई, जह मन कफ सभय ससकत और बजल क कछ जञन हसल कय, कयक मन शदध "मनरजन" क लए एक करस कय थ। फर, यदध क दरन, कयक म बजल क बर म कछ जनत थ, मन खद क यनट क टरसमशन सपनक, यन रडय ऑपरटर और सरवर म एक मरममत "तकनशयन" क रप म पय। और म यह ह, बजल क उपकरण क मरममत कर रह ह... दन चलत रह, और कस भ चज क बर म बत नह करत रह, जब तक क उसक घर उनक समन नह आ गय; 19व सद क उततररध क एक द मजल इमरत, कम स कम सततर क दशक म, ज सपषट रप स सभ जवन क वशषट मधयम वरग म इसक नवसय क सबदधत क दरशत ह, बलक अचछ तरह स सपनन, और दकषणपथ और हथड क सथ रजभकत। वह भगवन ह! समय बतत गय पत ह नह चल और दख हम तमहर घर स कतन दर ह, मउर। मर तचछत क कषम कर. चल, घम. म पहल ह उस कफ चलव चक ह! चत मत कर, मरएल; इसस कई फरक नह पडत... म उस उसक घर क दरवज तक ल चलग... मरएल न कई जवब नह दय; वह बस चलत रह. व दन बस चलत रह, लकन इस नयनतम अतम समय तक मन रह। आखरकर व अलवद कहन क लए महल क घर क गट पर पहच, जह उनहन एक-दसर क समन कय। खर, अब सचमच ऐस लगत ह जस "दवदव यदध अलवद कह रह ह।" ह; नसदह, यह सह ह। उसन पहल कह और उसन बद म जवब दय। इसक बद मरएल न सपषट वदई क सकत म मउर क ओर अपन हथ बढय। कल मलत ह मउर... कल मलत ह मरएल... आप बचच क अपन सथ ल रह ह, ह न?... बलकल मउर... चत मत कर लगभग सढ चर बज, ह न? ह। करब सढ चर बज...खर, इसस जयद कछ नह। कल मलत ह, ठक ह ह मर; कल मलत ह... जब उस रत मरएल अपन घर म दखल हई, त उसन अपन मत-पत क चमकर लटन म दर क लए मफ मग। व कछ हद तक आशचरयचकत थ कयक उनह अपन बट म मसकरहट जस कई चज पसद थ। पच सल क लब अतरल क बद उनहन अपन बट पर पहल बर लगभग मसकरहट दख... अगल दन, दपहर क ठक चर बज क बद, दपहर स कछ मनट पहल, मरएल, अपन बट क सथ घमककड म, मछआर क पडस स हत हए मखय सडक क ओर चल पड, शरआत घट क करण थड असरकषत थ, एक असरकष ज गयब ह गई जब, बलक आशचरयचकत हकर, उसन मउर क उस सथन पर इतजर करत दख ज हर दन समनय थ। वह उसक समन फल समदर कषतज क घर रह थ, इसलए उसन सतर क उपसथत क नटस करन स पहल ह उस अचछ तरह स दख लय थ, इसलए मरएल मर क इसक एहसस हए बन ह उसक पस आ गई, जब तक क उसन उसक अभवदन नह कय। शभ दपहर, मर। वह आदम उसक ओर मड, उसक उपसथत स सचमच आशचरयचकत ह गय। शभ दपहर, मरएल। कय आशचरय ह! सच त यह ह, मझ तमस इतन जलद उममद नह थ! तब भ नह जब आप पहल स ह मर इतजर कर रह थ! बशक, मर परय महल! म आमतर पर चर बज क आसपस घर स नकल जत ह. एक महल क लए कस परष क इतजर करन सह नह ह!... यह परष ह हन चहए, ज हमश, हमश, महल क इतजर करत ह... अत म उसन ज कह, अपरतयशत रप स, उसन मरल क इतन भयनक महसस करय, क, तरत, जस क वह एक सप क कटन पर परतकरय कर रह थ, और सबस ठड, सबस बरफल और कटन वल सवर क सथ ज उस उपयग करन क लए दय गय थ, उसन उततर दय चल चज सपषट कर द, मर; कपय। यह, क म हर दपहर यह आत ह, एक परष और एक महल क बच...उदधरण (और यह, उसक आवज न ज सवर अपनय, वह एक पत और मर सवम क सवर थ) स बलकल मल नह खत। म यह आनद क लए नह आय ह; म कस भ स आई ट ए म नह आत, लकन अनवरय ह। अभदर बलकमल दवर मजबर... मत भलए, कपय... और चल, उसक घर चल, कयक, सच त यह ह, म तमहर म क दखन चहत ह... म उस पसद करत ह... वह एक महन महल ह... एक महन वयकत... मउर न कछ नह कह; उसन उस "फलपक" क बलकल भ जवब नह दय जसन उस, पर तरह स, असरकष स भ अधक पकड लय थ... कम स कम कय उममद क ज सकत थ, ऐस परतकरय, ऐस अपमन जसक, उस यकन थ, वह इसक लयक नह थ... कय शतन महलओ क समझ सकत ह!, उसन खद स कह, जस वह उसक पछ चलन लग... कयक, जस ह मरएल न अपन छट मह बद कय, ज इस बर बलकल "पटमन" नह थ, वह उस पयर बढ औरत क घर क तलश म सडक पर चलन शर कर द, ज मर क म ड मनएल थ। लकन बड बत यह थ क, वह सवय आशचरयचकत थ क य बच-लग नकस कय हए; व आकषप ज उसन मउर पर लगए थ, वसतव म, वह अचछ आदम इसक यगय नह थ। अपन बचव म उनहन कह: "कय वह आपक दरभगय क लए दष नह ह?" और इस तरह क दव स उस उचत लग, लकन, सच त यह ह, पर तरह स नह। उसक लए इसम कई सदह नह थ क यह अवशवसनय लग रह थ क वह, मउर, और वह जनवर, वह अमनवय जनवर, एक ह वयकत थ; वह आदम... कयक मउर, जस आदम क वह जनत थ वह "उस" क परण नषध करत थ। खर, मउर अनगरह, वनमरत, कमलत थ... ईमनदर न ह मनषय क बनय। अचछ मरदनग क ऐस आदरश उसक दरभगय क करण कस ह सकत ह?... असभव... समझ स बहर... लकन ऐस ह थ, उसक अपन सहज सवकरकत क अनसर... ह सकत ह क यह सरफ वरग घण रह ह; वह जहर जसक लए उस समय क रजनतक वचर, इतन चरम, बए और दए दन, वसतव म जममदर थ, जनहन एक ईमनदर और यह तक क सवदनशल वयकत क एक नरसहरक जनवर म बदल दय, ज हद तक वनशकर थ। लकन वह आतरक ईमनदर और सवदनशलत, अतत, रजनतक नफरत म नहत पशवकत पर वजय परपत करत ह ज अतत वयकतगत ह जत ह और वरध वरग और वचरधर क सभ समजक बरई क जड क रप म पहचनत ह, तक ऐस चलक दमग इस वचर क अपन ऊपर ल ल क ऐस समजक वरग और इसक रजनतक-समजक अवधरणओ क धरत स उखड फकन, ज इन सभ क वयकतय म वयकत करत ह, सह कम ह। वस भ, एक बर फर मरएल न मछल पकडन वल पडस क उस सधरण घर म दपहर बतई; और, इसक अलव, यद पछल दपहर वह द मजल झपड स दर स नकल थ, त यह दसर भ दर स नकल, कयक यद पछल वल मउर और उसक म क घर स दपहर सढ सत बज क बजय बहत दर स नकल थ, त इस दसर म वह उकत घर स तब नकल जब कछ मनट क लए आठ बज चक थ; सकषप म बस घट और, पछल दपहर क तरह, मउर उसक सथ पहल क तरह परवश दवर तक नह गय, फर बहर नकलन क लए, ज परतषठत महल क लए पहल स ह शर ह चक थ, एक परय पडस, लकन, उसक कस भ वरध क बन, एक घर स अधक पतक हवल क दरवज तक, जह उनहन अतत समनय रप स "कल मलत ह" क सथ अलवद कह। और उस दपहर क बद स, मरएल अपन शरआत घट क करण कम स कम समय क पबद ह रह थ, शम क नयकत समनय बत ह गई। और यद ऐस कय जत ह, त अतत, उदधरण; हलक कसक सथ, म य बट क सथ, यह मरल क बलकल भ सपषट नह थ। लकन बत यह थ क हर दन वह पहल आत थ और, दन-ब-दन, अधक परसनन... अधक सतषट... और ऐस ह हआ, क जयद दन नह हए थ जब पहल बर वह अपन बट क सथ मउर क घर आई थ, एक सबह, लगभग गयरह बज, वह अपन बचच क सथ उस घर म बहत सदर सथत म आई, अपन बल म कघ क हई थ और सफ-सथर कपड पहन हए थ। यह पत चल क मर घर पर नह थ, बलक शहर म थ, पशवर घरल सहयत क लए कल क जवब द रह थ, जसन बहत ह अजब तरक स लडक क सन म नरश क एक परत भर द। उस दन क बद स, मछआर क पडस म सबह-सबह उस घर म दखन समनय और अववकपरण ह गय थ, कयक यह भल ह अजब लग, लकन वह अपन शनदर पतक हवल क तलन म, उस सथन पर, उस वनमर नवस म, अधक आरमदयक महसस करत थ; खर, उसक मत-पत क घर एक नवस सथन स अधक एक हवल जस थ, चह वह कतन भ शनदर कय न ह। वह, मउर और उसक म क घर म, उस सधरण पडस म, सचचई यह ह क मरएल क सहजत महसस हई। वह आम लग क बचच क उस सद पडस म रहत थ, जस क वह ऐस लग क बच पद हआ ह, अपन दत कट और, सकषप म, हमश क लए जवत रह। उसन ऐस आस-पडस म मतर बनय; मछआर क पतनय और जयदतर सधरण वयवसय क वनमर करगर, जस मउर क पतनय, जनक सथ वह घर क दरवज पर बठकर बतचत करत थ, उनह क तरह और, नशचत रप स, मउर क म, डª मनएल, उसक सथ थ, जनस लडक वसतव म पयर करत थ। ऐस भ हआ क, एक स अधक दपहर और द स अधक, डª मनएल बचच क सथ घर पर रह, जबक मरएल और मउर टहलन क लए बहर गई, यह और वह, हलक, जयदतर, समदर तट और समदर क कनर पर, भल ह व घमवदर चटटन थ ज लगभग लबवत रप स जगल कटबरयन सगर म गर रह थ। समदर क करब जन क यह आनद तब स गन बढ गय जब समदर म उफन आ गय, लहर इतन बढ गई क व वशल ह गई, उथल चटटन म तबदल चटटन पर टट पड, जब तक क उनहन मरएल और मउर क भग हए कपड क भग नह दय। इस परकर दन बतत गए, और उनक बद वह तस समय सम समपत ह गई ज मर न मरएल पर उस वयपक परधकरण पर हसतकषर करन क लए लगई थ जस वह उचत समझ, जसक सथ, वसतव म, उसन सभ कनन उददशय क लए अपन पतन, अपन पतन पर सभ नयतरण तयग दय। लकन हआ यह क आशचरय क बत यह रह क न कवल उसन ऐस कस बत क शकयत नह क, बलक इस बर म एक शबद भ कह बन वह रज सबह उस कमकज लग क घर जत रह। एक और बत, कयक धर-धर मउर और उसक म क छडन क समय लगतर वलबत हत गय, जब तक क वह अपन पत क घर क दरवज पर नह पहच गय, हमश मउर क आगरहपरण अनरकषण क तहत, रत क न बज, सढ न बज और, उन दन म अनसन, रत क दस बज तक! यह तक क एक दन, बहत खस कयक, कन जनत ह कय, मरएल क लए खद क उन द लग स अलग करन पहल स कह अधक कठन थ, ज बन कस सदह क, उसक अदर इतन गहरई स घस गए थ क वह रत क दस बज क बद तक पतक हवल म पहच गई... चल, उन हसस म, तब तक कछ ऐस कभ नह दख थ! सब कछ शत शत क रह पर चल रह थ, जब तक क, सदधत रप म, एक तबह नह घट। यह एक सबह क बत ह, जब वह, पहल क कई अनय लग क तरह, मउर और उसक म क घर पहच, त उसन सब कछ असत-वयसत पय, कई नह जनत क पडस क कतन नवस अदर थ, हलक पडसय क कहन अधक उचत हग, यह तक क उनक "चरमबल"(3) भ सथ थ। और उस अचछ महल क लए, ज मउर क म ड मनएल थ, अपन आख स र रह थ। ओह मस मरएल, कतन बड दरभगय ह! कतन अपमन ह! मस, कल रत "सवलस" (सवल गरड) न मर मर क पकड लय... व कहत ह क उसन एक आदम क "हतय" कर द!... ठक ह, वरष पहल... जब '36 क करत क बर म...मरयल न यह सन त उसक रग म खन बह गय। मउर, सवल गरड दवर हरसत म लय गय!... नशचत रप स "उस" क करण... समचर क सदम न उस वह जड कर दय और परतकरय करन म असमरथ ह गई; लकन यह लब समय तक नह रह, बस कछ कषण, कयक लगभग तरत ह उसन खद क सभल लय, खद स कह क यह कस भ बत पर पछतन क समय नह ह, ड मनएल क तरह रन क त बलकल भ नह, बलक कररवई करन क ह। इसलए, जस ह वह कहत ह, ऐस कषण म, उसन अपन बट क डन मनएल और अनय पडसय क सप दय, ज पहल स ह उसक दसत थ, और, वसतव म सरहनय सकलप क सथ, वह बरक म दडन क बजय उडत हए सडक पर चल गई। वह उनक मलकत पसट क सरजट कमडर स हई, ज समनय "सभयत" स कह अधक, जनवर जस चहर और आकरमक सवभव वल थ, यह करण ह क उन सभ क भड, बन अधक परयस क, दनय म सबस खरब "पसस" मन ज सकत ह। लकन मस मरयल और, नशचत रप स, उसक पत, न कवल शहर म, बलक पर कषतर म अचछ तरह स जन जत थ और सममनत थ, जसस उस गरड क परशन करन क उसक इचछ नगल गई, ज आखरकर, एक ऐस वयकत, एक अभशपत लल आदम और उसक शरष पर, एक सभवत हतयर म दलचसप लन लग, जसक सथ यह कह ज सकत ह क उसन मरएल क सथ वयवहर करत समय एक नशचत दयलत क भ इसतमल कय, ज उस बद तक नह पहच जह उसन अपन महल क भ बद क दखन क अनमत नह द, कयक उस पकड लय गय थ। सपरक म नह रहन क करण, वह अपन सबस करब परवर क सदसय स भ मलन म असमरथ थ, कयक उसस अभ भ पछतछ चल रह थ। जब मरएल न यह सन, त उस लग जस उसक रढ क हडड क मधयम स उसक शरर म एक परकर क ठड पसन बह रह ह, कयक वह अचछ तरह स जनत थ क "कशल पछतछ" म आम तर पर कय शमल हत ह: सबस अचछ ममल म, हरसत म लए गए वयकत क "अगरज म भ गन" क लए समरकय पटई, अतत क पलस शबदजल क अनसर, जसक सथ उसन कलपन क थ क बचर मउर क मह स भ खन बह रह हग और पटन स भ जयद उस लगद बन दय जएग। उसन वनत क, हसतकषप कय... उसन सवल गरड क यह कहकर उस दषमकत करन क भ कशश क क उसक सथ बलतकर ऐस नह हआ थ, कयक अगर मर न पच सल पहल उस दन उस पर हथ रख थ, त यह उसक पर सहमत स थ: यवक न उस इतन पसद कय थ क, हजर पयर म स, वह उस पर सहमत ह गई ज वह उसस चहत थ। और जब उसक ततकलन परम क हतय हई त वह उसक सथ थ। लकन यह उसक लए कस कम क नह थ, कयक, उस गर-कमशन अधकर क अनसर, भल ह उसन ज कछ भ कह वह सच थ, और उसन यह नह दख क ऐस कय नह हन चहए, वह हतय क आरप स बच नह सकत थ, कयक, उस समह क हसस हन क नत जसन उसक परम क गल मरकर हतय कर द, इसस कई फरक नह पडत क उसन वयकतगत रप स गल नह मर थ, कयक इस तथय न उन सभ क परभवत कय ज मलशयमन क उस समह क हसस थ। लकन यह पत चल क सवल गरड न उस कवल यह बत नह बतई थ, बलक कछ और भ बतय थ; कछ ऐस जसन उस पर तरह स परशन कर दय: क बद न शपथ ल और झठ गवह द क जलई 1936 क उन तरख, बस और बहत कम दन म, वह मडरड ज रह थ, ज मलशयमन क पहल कलम क हसस थ, ज सपन क रजधन क रकष म शमल हन क लए उस दन, 18 जलई क ओवएड स रवन हआ थ। सवभवक रप स, यह अपरतयशत समचर उस अवशवसनय लग रह थ कयक, पर तरक क सथ, यह कह गय थ क उसक समन आतम-दषरपण कय, ठक अपन ह बलतकर क... बशक, इसक कई मतलब नह थ। त, यह दखत हए क वह, बरक म, उसक पस करन क लए और कछ नह थ, लगभग बहर क तरह उडत हए, वह मउर और उसक म क घर लट आई और, जस ह वह पहच, सखत दढ सकलप क सथ उसन अब कस भ बजरग महल स बरक म उस बतई गई बत क सतयत क बर म पछतछ क। खर, नसदह यह सच ह, मस मरएल! कह ऐस त नह क शयद तमह पत न ह? नह, डª मनएल; मझ नह पत थ... मन सच थ क आप यह स थ, शहर स थ, और आप जलई '36 म यह थ, ठक ह, नह, मस। ह, हम असतरयन ह, और शदध सटक क ह, लकन खनन बसन स, मएरस परषद स, ओवएड क ठक बगल स। और ह, मस, मर मउर उन खनक क सथ चल गय ज 18 जलई 1936 क फसवदय स रजधन क रकष क लए रवन हए थ। मन खद सटशन पर उस अलवद कह... और, एक डर क सथ, मस... कलपन कजए; म यदध क लए ज रह थ... मरएल क कस और चज क जररत नह थ, कयक उस मउर क बगनह क सतयत क बर म कई सदह नह थ। और यह महतवपरण बत थ, यह जनत हए क वह नरदष थ... उसक लए समय हग क वह उस अपन समझ स पर रवय, खद क दष ठहरन क करण समझए... वह बचच क लकर घर लट आय। उस शत हन पड और सपषट रप स सचन पड; फर ठड स. वह घर म दखल हई और जस ह उनहन उस दख, उसक मत-पत उस दखकर घबर गए, हलक उनहन उसस कछ नह कह। उसक बट क चहर पर, हलक अभ भ व लकषण नह दख रह थ, इतन दन पहल क उदस स कह अधक कडवहट क भव, लकन चहर पर एक भव झलक रह थ, ज अपन अतयधक गभरत क करण, कछ भ अचछ नह हन क सकत द रह थ। सकषप म, शत शत क वह भवन उसस गयब ह गई थ, ज कभ-कभर लगभग हस खश म बदल जत थ, ज उनह बहत परसनन करत थ, उन अगल कछ दन म ज बत चक थ; कमबश, लगभग वह, ज लडक उस आदम क घर म फस गई थ, ज एक दन उनक बच परकट हआ, मन आसमन स गर ह, कछ ह समय म, मरएल क कमचलऊ पत बन गय। और ऐस नह ह क उनह अपन बट और उस अजनब क बच ऐस घनषठ सबध क सथत पसद थ, जसक बर म इसक अलव कछ भ नह पत थ, नससदह, वह एक गरब और सरल करयकरत थ, लकन, कम स कम, यह उनक बट क खश, जन क इचछ वपस द रह थ... और, अत म, और सभ पछतव क बवजद, सबस महतवपरण बत थ... मरएल उस कमर स गजर जह उसक मत-पत थ, वह मशकल स रक, बस उनक अभवदन करन और उनह चमन क लए, उनक सथ बत करन य चट करन क लए बलकल भ नह रक। इसलए वह लगभग पदल ह अपन कमर क ओर बढत रह; ह, कमर, कयक वह एक लवग रम, बडरम और पर बथरम थ। लवग रम म रक बन, वह सध शयनककष म चल गई, उसक बद उसक दद जआकन आई, ज जस ह उसक बट क घर पहच, ज भ आवशयक ह, उसक सव करन क लए उसक सथ ह गई। पहल स ह बडरम म, मरल न बचच क नरस क द दय। कपय, आट जआकन, ("लडक" न अपन दद जआकन क यह सनहपरण परवरक वयवहर दय)(4) बचच क खयल रख; म वसतव म थक गय ह... "चच" जआकवन न छट लडक क अपन बह म ल लय, उस नहलन क तयर क, जबक उसक "लडक" बसतर पर बठ गई और तरत पछ क ओर झक गई, और अत म बसतर पर चहर ऊपर करक लट गई। इस परकर कछ मनट बत गए, नरस न शश क नहलन क लए कछ मनट नह लए, दद, मरएल क म क मदद स, ज चपचप अपन और "चच" जआकवन क पछ अपन बट क शयनककष म पहच। बचच क दद और नरस न लगभग बचच क कपड पहनए, जबक उसक म, मरएल, चललत रह सवल गरड न मर क गरफतर कर लय ह। उनहन उस पर गरब जस इगनसय क हतय क आरप लगय... और बशक मर सथ बलतकर करन क भ आरप लगय... लकन अब मझ पत ह क सब कछ झठ ह; वह मउर नरदष ह; क यह वह नह थ; वह, भतक रप स, ऐस नह ह सकत थ... उस दन म ऑसटरयस म भ नह थ... मझ यह समझ म नह आय... द महलए, म और नरस, तरत उसक ओर मड गई, बचच क बर म एक पल क लए भल गई। आट जआकवन क आख खल हई थ लकन बन एक शबद बल; दसर ओर, मरएल क म न कह लकन... यह मउर कन ह?... जस आदम क आप दखन ज रह ह, क आप पर दन उसक घर म बतत ह? और, अतत, वह महन खज, अकलपनय जञन क दन थ। मरएल क म क पत थ क ह, सवल गरड दवर हरसत म लय गय यह मउर वह आदम थ जस लडक रजन दखन जत थ, लकन वह आदम भ थ जसस उसन हफत पहल शद क थ, हलक, ह, इस तरह क शद क कभ भ सपनन हन क कई इरद नह थ, लकन दषट इस तथय पर टक थ क, वसतव म, यह लगभग उस समय भग ह जएग जब इस मनय गय थ, कयक कनन क अनसर यह कई दशक तक असभव हग। लकन वह कलन महल यह भ जनत थ क, जब उसक बट न ऐस आदम स शद क, त उस यकन थ क यह आदम न त उसस जयद थ और न ह कम जसन पच सल पहल उसक सथ बरबरतपरवक बलतकर करक उस दरभगय क करण बन दय थ। और नससदह, उनक मन म उनक छट बट क लए ऐस वयकत स शद करन सभव नह थ: एक नफरत करन वल लल आदम, शर स ह, और सबस ऊपर, एक करर बलतकर। नह; वह, उस अचछ महल क लए, बहद समझ स बहर क बत थ। मरएल न तवर आगरह क सथ यह सबत करन क परयस कय क यह आदम वह आदम नह ह जसन उसक दरभगय क रच थ। इस सब क दरन आट जआकन हठपरवक चप रह, लकन म न सवल पछन बद नह कय। और वह आपक यह कय बतत ह क उसन ह आपक सथ बलतकर कय ह, यद उसन वसतव म ऐस नह कय?... इसक कई मतलब नह ह...नह; उसक पस यह नह ह... मझ भ यह समझ म नह आत... वह मझ जनत भ नह ह... म यह भ नह बत सकत क सवल गरड न उस कय हरसत म लय ह... उनहन उस गरफतर करन क लए कस आधर पर आधर बनय हग?... आरप कस लग, अगर यह कवल झठ पर आधरत ह?... एक वयकतगत परतशध?... इसक कई मतलब नह ह... न त वह और न ह उसक म यह स ह... व लगभग एक सल स भ कम समय पहल आए थ... एक सल, पहल ह पर ह चक ह, यदध क समपत क बद... और कई भ नह उनह यह पहल स जनत थ... मरएल कछ दर तक चप रह, मन सच रह ह। य धयन कर रह ह. वह अब बसतर पर नह लट थ, बलक बसतर क कनर पर बठ थ। फर, एक नशचत समय पर, कछ दर सचन क बद, वह "चच" जआकवन क ओर मड। उसन अपन आख उस पर जम द, पर तरह स नरकषण करत हए, पर तरह स तटसथ आवज म, लगभग बरफल, और जर स कह अधक शत चच; कवल आप ह जनत ह क मउर न मझस कय कह; क वह वह ह जसन मर सथ बलतकर कय, और इसलए, मर बट क पत... आपक और मर अलव, कई नह जनत थ क उसन मझस कय कह... और वह सवय, नशचत रप स... वह अचछ महल ज "चच" जआकवन थ, अब इस बरदशत नह कर सक और दरद, कडवहट स भर आसओ म बह गई। मझ मफ कर द, मर लडक!... मन यह तमहर भलई क लए कय!... तम अपन जवन म बहत कछ डल रह थ!... य तम उसक जवन म बहत कछ डल रह थ... और दख वह कय थ... एक लल हतयर और, इसक अलव, एक बलतकर!... एक मनव जनवर, कवल "नच कलब" क यगय!(5)... कय म इसक लए सहमत द सकत ह?... मझ कषम कर, मर लडक; मझ खद ह... म गलत ह सकत ह, मझ ऐस नह लगत, कयक मझ उस पर भरस नह ह, लकन म कवल तमहर रकष करन चहत थ, मर लडक... मरएल न तरत सच क आरप क बद औचतय क सथ, वसतव म, कछ भ वयवहरक हसल नह हग, कयक उन कषण म ज करन थ वह ठस, पटट सकषय ढढन थ ज मउर क बगनह क परदरशत करग, कयक उन कषण म नयय क नषपकषत म, हलय नफरत क तलन म अधक मधयसथत क गई थ; हल क तरसदय स अधक, बलक इस बत पर क उनहन बहत कम भरस कय। इस परकर, उनहन यह नषकरष नकल क न त सवल गरड और न ह पलस, अगर ममल उनक धयन म आय, त आरप लगन वल अभयजक भ कम स कम मउर क सपषटकरण क सतयत क सतयपत करन क जहमत नह उठएग। उन सभ क लए, वह कवल एक शपत लल पतर हग, ज उनह झठ स भरमत करन क कशश कर रह ह; खर, नरधरण करक उनक खलफ लगय गय आरप हग, ज क अपन लल-वरध चरतर क करण, ससमचर क समन सतय हन क लए कस भ पषट क आवशयकत नह थ। फर हम मउर क मकत करन क लए, परयपत सबत इकटठ करन क लए, और सथ ह सतयपत करन क लए, और तज स आग बढन पड; और, यद सभव ह त, शहर छडन स पहल, सवल गरड पसट स, नययक हरसत म जत समय। और, तरकक रप स, उसन सच क ज वयकत उसक सबस अचछ मदद कर सकत ह वह उसक अपन पत थ, एक ऐस वयकत ज अपन पश क लए पर कषतर म जन जत थ और सममनत थ, एक डकटर, ज उन सभ कषतर म एकमतर वसतवक वयकत थ। इसक अलव, वह हमश उन लग क परत उदर थ जनह उनक जररत थ, अपन फस क मग कए बन सभ क सहयत करत थ। फर, यद रग क पस परयपत समगर उपलबध थ, त वह उनस शलक लग, लकन यद नह, त वह कछ अड, कछ चकन, दध क एक जग... य, बस, एक अचछ कप शरब लग तक उस वपस क लए तयर कय ज सक। जस क अपकषत थ, बचर मरएल क पररभक "रटग" स नह बचय गय कयक उसन बन कस आवशयकत क, उन लग क सथ इतन जडकर "लब शरट" पहन ल थ, लकन नशचत रप स, अत म वह "घर स गजर", अपन कमर तक इसम शमल ह गई। उस दपहर उनहन मएरस क उस कषतर क दसत, सहकरमय स सपरक कय, तक व एक नशचत मउर एसटवज क बर म जनकर इकटठ कर सक, वशष रप स जलई 1936 क अठरहव स तईसव स सबधत, और वह सवय, उस दपहर, वह जन क लए नकल पड, यह दखन क लए क उनह कय पत चल सकत ह। अगल सबह, बहत जलद, मरएल फर स सवल गरड पसट पर थ, और उसन सच क वह मर रह ह, लकन खश स, कयक वह "सवलन" सरजट, ज मरएल क एक असल कफ क तरह लग रह थ, न उनह बतय क, सबस अधक सभवन ह, उस दपहर बद क रह कय ज सकत ह; लगभग नशचत रप स अगल सबह नवनतम। यह पत चल क उस असभय "सवलन" म नयय क कछ भवन थ और, हलक उसन "कशल पछतछ" म हर नह मन, जसन पछतछ कए गए "रगलय" क "करडनलस" स भर दय, कवल व ज "उनम स कस क आधपतय नह कहत", जस क "एल बसकन डन पबलस" न कह, उनहन मउर एसटवज स रपरट क अनरध करन क लए मएरस सवल गरड मखयलय क कल करन क भ कप क। और सभगय थ क उस पछल दपहर क, ह, जब दर हन क बजय पहल स ह रत ह चक थ, पहल रपरट मएरस स आई, जसन पषट क क उपरकत एसटवज, वसतव म, नगर पलक क एक परश क मल नवस थ और कम स कम, 18-19 जलई, 1936 तक उस क नवस थ। आइटम अधक; ऐस रपरट क अनसर, सबस सभवत बत यह थ क 18 य शयद 19 तरख क, वह खनक क मलशय कलम म स एक क सथ रल दवर मडरड क लए रवन हग। उनह उममद थ क सबह य दपहर तक इस दव क पषट ह जयग. वस भ, मधय-सबह मरएल मउर क उस सल म दख पई जसम वह रहत थ। जस ह वह उसक समन थ, और उस आरम स दख सकत थ, मरएल क दल उछलकर उसक गल म आ गय; और "कशल पछतछ" क नशन चहर पर और यह तक क बद क कपड पर भ, यह-वह, घव, चट और खन अवशष क रप म, यद रकत क छरर और हगओवर क रप म नह थ, बहत सपषट थ। आप कस महसस कर रह ह?... यह कठन थ, ह न? बह!... अचछ; म ठक ह... "पछतछ"?... समनय बत... कछ खस नह... अनय अवसर पर यह लगभग बदतर थ... लडक वह बठ जह वह कवल बठ सकत थ, कयबहल क पछल दवर स जड एक मचन य सटल और दन तरफ क दवर क बच एक गद गदद लपट हआ थ और एक तरफ स टक हआ थ: "बसतर" जह कठर म रहन वल लग सत थ। वह भ उसक हथ पकडकर उसक बगल म बठ गय, जस पर मरएल न कई आपतत नह जतई; व दन कछ दर तक ऐस ह रक रह, उनह हथ स जड रह, बच-बच म एक-दसर क दखत रह और मन रह। अतत वह बल आपन मझस झठ कय बल? तमन मझ कय बतय क वह तम ह ह... वह घणत परण?... तमन मर समन अपन आप पर उस बत क आरप कय लगय जसक लए तम नरदष थ? मर कछ और मनट तक चप रह; जमन क ओर दखत हए, मन वह धयन कर रह ह य उस महल क जवब दन क लए सबस उपयकत शबद क तलश कर रह ह ज मलब और ईट क कठर सतह पर उसक बगल म बठ थ, उस हथ स जसन महल क पकड रख थ। कयक मन उस रत हए दख थ. पहल बर जब म वरजन क डरसग रम म थ, छव क पछ, चपल क रशन म कछ तरटय क मरममत कर रह थ। फर तम आय; वह वरजन क समन झक गय, र रह थ और उस अपन दरभगय क बर म बत रह थ... उसक उजड छव, अकलपन और उदस ज उसन फलई थ, उसन मझ इस तरह परभवत कय जस पहल कस न नह कय थ... और उसक सदरत... वह सवचछ, दवदत सदरत, ज मठस क पर बरहमड क परकट करत ह... कमलत क... मउर कछ कषण क लए चप थ; उसन जब स तमबक नकलन क लए उसक हथ छड और चतर उगलय स सगरट घमई। उसन उस जलय, धआ अदर लय, उस रशन म, कमबश नल-सफद घर म, ज छत क ओर उठ रह थ, बहर नकल और फर जर रख। फर, दन-ब-दन, म उस डरसग रम म जत रह, पर गमनम स, दन-ब-दन, जब भ आप वह लट, उसक बर म सचत रह... जब तक मझ आपक करब आन क ततकल आवशयकत महसस नह हई... आपस बत करन क लए... आपक अपन करब रखन क लए... दन-ब-दन उसक परशस करन क लए... मउर चप ह गय और उसक नजर एक बर फर फरश पर कदरत ह गई, वह मरएल क चहर क दखन म असमरथ ह गय। इस परकर उसन सगरट खतम कर ल जस उसन एसपडरल क अगठ स कचलत हए जमन पर फक दय, बशक उसम लस नह थ। फर, उसक ओर दख बन, उसन बलन जर रख। मझ मफ कर द मरएल... म जनत ह क मझ ऐस नह करन चहए थ। क, जस ह आपन मझ अपन पत क रप म सवकर कय और ववह क सवल और चरच सबध रजसटरय दन म समरथन दय गय, मझ आपस अलग ह जन चहए थ; आप ज वयपक ववहक परधकरण चहत थ उस पर हसतकषर करन क बद अपन जवन स बहर नकल... लकन म असमरथ थ मरएल; मर वद ह तमस; अगर आप चह त म कसम खत ह... म खद क आपस अलग नह कर सक... म आपक दखन बद नह कर सक... हर दन आपक चतन करन... हर दपहर आपक परशस करन... नई खमश, एक नई सगरट क मग करन। जस जबरदसत तनव न उस अभभत कर दय थ वह सपषट स कह अधक थ वस भ, मरएल। आइए इस खतम कर; ज कभ शर नह हन चहए थ. दखभल खन; म उस आजद कर दग; म नटर क समकष उस परधकरण पर हसतकषर कर दग जसक लए आप इतन लब समय स इचछक ह। यद, जस क सरजट न मझ आज सबह बतय, जस ह वह मझ सडक पर दखत ह, मझ रह कर दय जत ह; और यद यह ममल नह ह, त जल म परवश करत ह म एक नटर क उपसथत क अनरध करग। अब, मरएल छड... म तमस वनत करत ह, कपय... लडक बहत दर तक उस दखत रह। फर, उसन उसस हथ मलय और अगल सबह तक अलवद कह, अगर उस उस दपहर रह नह कय जत, त ऐस सथत म जब वह चल जत त वह खद उसक सथ घर चल जत। उसन इसस इनकर कर दय, कयक इसक कई उददशय य करण नह हग, लकन वह दढत स "कल मलत ह" क सथ कलकठर स बहर चल गई। बक दन बन कस घटन क बत गय, मएरस स समचर क बतब इतजर म, ज नह आय। मरएल, जब उसन शहर म सवल गरड पसट छड द, त पडस म मर क घर क ओर भग, जह उसन शष दन ड मनएल क सगत म बतय, ज बद क म र रह थ और दन पररथन कर रह थ, जबक लडक उस पयर छट बढ महल क सतवन दन क कशश कर रह थ। अगल सबह, मउर क हरसत म रख जन क तसर दन क शरआत और उलट गनत क शरआत ज बहततर घट क समपत कर दग, अधकतम समय ज पलस य सवल गरड कस बद क नयय क कटघर म लए बन पकड सकत ह, एक अवध ज दपहर सढ छह स सत बज क बच समपत हग, मरएल और डª मनएल फर स बरक म थ। उस दन, पसट क मखय सरजट न उनह बद क सथ कवल द घट स अधक समय तक रहन क अनमत द, और फरश पर कमबश सफ कमर म, कलकठर क तहखन म नह। म और बट न तब तक चम और रत रह जब तक उनक पस बहन क लए आस य दन क लए चबन नह बच। फर उनक बच एक सधरण बतचत वकसत हई, हलक वकपटत क भर मर दवर वशष रप स उठय गय थ, और जसम मरएल न मशकल स हसतकषप कय, हलक उसन म और बट, दन क अधक कमल और सनह नजर स घर लय। दन अतहन ससत क सथ बत गय, दन महलए बरक स बहर नह नकलन चहत थ, मएरस पसट स समचर क परतकष कर रह थ, हलक कस भ अनय चज क तलन म अधक नरश क सथ, जस-जस घट बतत गए और वह समचर नह आय जसक मतलब मर क आजद ह सकत थ। इस परकर दपहर आ गई, और दपहर क घट म बद क कषतज क सपषट करन वल कई भ खबर नह आई, ज समय बतन क सथ-सथ और अधक अधकरमय हत गई। दपहर क छह बज रह थ और पसट क सरजट कमडर अधक स अधक अधर ह गय थ। तभ सढ छह बज क समय भ आ गय, ज समय स तरत पछ छट गय। फर, सढ छह बज क तरत बद, सरजट न अतत आदश दय क परपत शकयत क रपरट क बद कर दय जए और बद क सथनतरण तयर कय जए, तक उस सबधत सनय नययधश लख परकषक क नपटन म रख ज सक। फर, मउर क म, डª मनएल, सचच नरश स रन लग, जबक मरएल करधत रह; सबस सफद दवर स भ जयद सफद. लकन यह तब भ थ जब "चच" जआकवन क अनययपरण शकयत क दसवपन फक पडन लग, जब एक गरड जलद स सरजट क पस पहच। मर सरजट, मर सरजट!... ओवएड कमड स एक जरर सदश! ह सकत ह क सरजट न सवल गरड नबर क हथ स सदश वल कगज क लन क बजय उस फडन क लए द कदम उठए ह, और फर उस पढन क बजय अपन दमग म भर लय ह। अतत यह खतम ह गय, दवय! कद क ऊपर लओ! वह रह ह गय! डª मनएल अब सचमच फट-फट कर रन लग, लकन अतयधक खश क सथ, जबक मरएल क समझ नह आ रह थ क हस य रए, कयक वह बहत उतसहत थ। सदश म कह गय ह क ओवद सवल गरड मखयलय म एक वषय समन आय थ, जसन अपन पहल पर घषण क थ और तक इस इस शहर क बनमरट क पसट म दरज कय ज सक, क 19 जलई, 1936 क घषणकरत, उस समय ओवद सटशन पर एक समन सभलन वल, घषणकरत क दशवस तथकथत मउर एसटवज क सथ वयकतगत रप स बत कर रह थ, जब तक क मउर एसटवज टरन म नह चढ गए। कछ कषण बद, वह मलशएमन क एक टकड क सथ मडरड क लए रवन ह गय। और इस बयन क बर म सबस अचछ बत यह थ क गवह पपलर फरट मलशय क हमल क खलफ ओवद शहर क रकषक म स एक थ, इसलए उसक बयन क वशवसनयत सभ सदह स पर थ। आखरकर व तन बहर सडक पर आ गए, उनक आतम खश स भर गई। व एक सथ मछल पकडन वल इलक क सधरण घर म गए। वह पहचन पर, मउर न मरएल क सथ घर जन क इरद कय, लकन उसन इनकर कर दय। और त और, अपन आवज क थड कम करत हए, ज उसक सवर म भ बहत अजब लग रह थ, लगभग कमक हन क हद तक, और उसक आख म चमक क सथ-सथ, उसक हठ पर मसकन क अभवयकत भ, सबस शररत और चचल, उसन मउर स कह पत, कय आपक नह लगत क आप पर मझ पर कछ एहसन ह?...उदहरण क लए, मर शद क रत...कहन क अत पठ पर नटस उनह "सवर" दन य "उनह घमन" वह बत थ, ज पशवक वडबन क सथ, उन दरभगयपरण लग क बर म कह गई थ, जनह उनक घर य जल स हतय क लए ल जय गय थ; और यह, कस न कस परतदवदव पकष म समन ह। यह भईचर क नफरत थ, ज आम तर पर सबस हतश, सबस करर हत ह, कयक इसम वयकतगत नफरत और आकरश पनपत ह, जसक अकसर रजनतक रप स सपरदयक और इसक अलव, आतरक परकर क नफरत स कई लन-दन नह हत ह। और बत यह ह क कभ-कभ एक ह परवर म पद हन वल नफरत, द सग भइय क बच पद हन वल नफरत स जयद भयकर कई नफरत नह हत। यह आमतर पर य, कम स कम, सटक समय क पबद क सदरभत करन क लए सपन म कह जत थ। हमश क तरह, वयकतगत नयकतय, कम आद क लए समय क पबद हन, सपनश क मजबत पकष नह थ, परतन वयकतवद क हन और मनदड य नयम क परसतत करन क बहत कम मतर हन। चल, जरमनक क परतपदक वयकत और, इसलए, एगल-सकसन क। कवल एक चज पर तरह स समय क पबद हआ करत थ: बलफइटस क शरआत, ज आम तर पर पसटर पर घषत सटक समय पर शर हत थ। रषटरपत लगतर अपन घड दख रह ह, ज सटक रषटरय समय स मल खत ह, और जब हथ सह समय पर नशन लगत ह, त वह श क शरआत क चहनत करत हए सफद रमल नकलत ह। ज लग नह जनत ह, मखय रप स गर-सपनश पठक क लए, यह शबद "कल" म लडक/लडक क परयय ह, ज सपनश जपस रषटर क वशषट शबदजल ह और, वसतर स, "रमप वई रसग" क सपनश आबद क, ज क जयदतर, जल ह... कय? खर, एक शबद ज म वसतव म नह जनत। शयद इसलए क उस जतय समह क लग, परचन कल स, सपनश जल परणल क वशषट "गरहक" रह ह। इस सबध म, मझ बस म मर पस यतर कर रह कछ "कलज" (जपस) महलओ दवर क गई बतचत यद आत ह, ज कफ दर ह: "अचछ दसत बर समय म दखई दत ह, जब आप असपतल म य जल म हत ह" अय/अय, आरएई डकशनर क अनसर: मखय घर म परभर वयकत, बचच और यव लग क सरकष क सथ-सथ उनक पलन-पषण और शकष क भ धयन रखत ह। रयल सपनश एकडम ऑफ लगवज "वल गरट" सपन म मत क सज दन क कनन तरक थ। इस पदधत क उपयग 1820 स कय ज रह थ, ज फस क सथ सह-असततव म थ, लकन अपरल 1832 म, सपनश रज फरडनड VII क एक रयल डकर न फस स मत पर परतबध लग दय और समपत कर दय, कयक यह बहत अमनवय थ, जस क मल पठ म कह गय ह, "मर सभ डमन म" नशवर नषपदन क एकमतर रप क रप म "नच गरट" दवर मत क सथपन क गई। लखक क ओर स नट: इस कहन क लखन क मर लए एक वशष अरथ ह, कयक लखक, वह वयकत ज छदम नम हनबलबरक क तहत छप हआ ह, उन द सपनय क बट ह ज उस "असभय" यदध म मतय तक लड थ जसन सपन क लहलहन कर दय थ। वसतव म; मर पत मउर क तरह "लल" थ, और मर म मरएल क तरह "फसवद" थ। और अगर, सदधत रप म, कम स कम मरएल और मउर क बच एक लश ह, उसक परम क, त मर पत और मर म क बच भ एक लश थ: मर चच गररड क, जनक करटजन म यदध हरन वल दवर हतय कर द गई थ। लकन मर पत और मर म क बच क पयर उस फलई गई नफरत स कह जयद मजबत थ, लगभग एक तरह क, जसन मर सबस पयर सपन क इतन नकसन, इतन खन और इतन दरद पहचय। इस कहन म भ आखरकर उस पयर क जत हत ह। मर पत मर म स पहल चल गए, लकन वह कछ ह समय म उनक पछ चल गई, कयक अपन पत क बन वह खद क नह प सकत थ। और म खद स कहत ह: उस पयर क दखत हए, सधरण सकस पर आधरत वह दसर, जसक आज इतन परशस क जत ह, कय दरशत ह? वह पयर ज इतन परचलन म ह, वह भ कय दरशत ह, "ज इतन इसतमल हन स टट जत ह" जस क जर न एक गत म कह थ, कछ सल, कभ-कभ कछ महन क बद, इस "शर करन" क बद? अपन परफइल म म कहत ह क म लखन चहत ह, गन चहत ह, म यह भ कहग क वह पयर जवन भर बन रह, जस मर मत-पत न जवत रहत हए अपन पयर बनए रख। मझ लगत ह क यह आप सभ क लए बलकल सपषट हग, उन लग क लए ज मर सथत क करण जनन क जहमत उठत ह। आपक यह पसद आय, यह म चहत ह और चहत ह। और यद आप मर कहन क रटग दत ह, और म यह नह कह रह ह क आप मझ इसक बर म कई टपपण भ भजत ह, त ठक ह, म इसक जशन मनऊग और सबस बढकर, म आपक धनयवद दग। हमश तक, दसत/दसत