चलस क उमर म जग (1) "मझ समझ नह आत क एक गमनम और शत गहण, क अनसर, जसक महन पप एक बहत अचछ शररक और वयकतगत आकरषण क उततरधकर हन ह मर दसत और परशस ज मन कछ परष स सन ह, सथ ह एक पत स भ उदर, मर सथ दखन वल म ऐस तवर भख और इचछए जग सकत ह मर सथ हन पर अनय आख और अजब भवनए, लकन सबस आशचरयजनक बत यह पर मर मन क शत समपत ह जत ह, कयक इतन उतपडन स उनहन मझ हर दय परतरध ......... ववयन। . मर नम ववयन ह, म 42 सल क ह और मन 53 सल क ऑसकर स खश-खश शद कर ल ह। चबस सल तक, जब म 18 सल क थ तब मर शद ह गई और ऑसकर 29 सल क थ, द बचच क सथ बचच, पहल स ह घर स दर, पढई क लए लगभग 800 कम दर, छट बचच दकषण क ओर, और सबस बड स ववह कय। शररक रप स आकरषक जस क मन बतय ह, म न त मट ह और न ह बहत पतल भ नह, म 1.70 लब ह, आकरषक चहर, अचछ पर, अचछ ह नतब और उभर हए तथ अभ भ दढ सतन, इस उमर म म और कय मग सकत ह, --- सतय?। वह मर मल पप थ और अपन पत क परत वफदर रहन मर भकत थ। अटट, जब तक...कपय म आपक यह जबरदसत बत द मर जवन क परसग. कछ सल पहल तक ऑसकर क सथ मर सकस लइफ बहत अचछ थ सकरय, कलपनशल और रचनतमक, जसस मर पत पर तरह सतषट ह, जसन मझ बन कस हचकचहट क दय और हमन अपन अतरग कलपनओ क आनद लय ज हम ऐस बत बतत रह ज हम खश स भर दत थ, रमचत कर दत थ जर-जर स और फर पयर करन क बद हमर जदग समनय ह गई। समनयत और म अपन घर म एकमतर परष क परत एक वफदर महल क रप म अपन वनमरत क पलन करत ह असततव। अब, जस क कई ववह य जड म हत ह समय बतन और बचच क सथ दर और अदर घर पर अकल रह जन हमर कलपनए, तन क कमक भत हमर बसतर पर मडरन लग, और यह तब पश कय गय ह जब हम अपन सरवशरषठ परदरशन कर रह ह पयर और म उस आनद क और अधक तवरत स महसस करन क तलश म ह अचछ डलवर, म वनत करत हए और अनजन म ऑसकर स आगरह करत ह, कयक उस इस लमब खचन चहए अधक सभव ह क उसक हमश सरपट दडत हआ सखलन, क यह मझ इतन जलद नह छडत, क म इस अपन अदर बहत सवदषट महसस करत ह। त ज उस पहचन लत ह वरष स उसक यन कषमतए कम हत ज रह ह और मर जररत बढत ज रह ह उललखनय वदध, वह मझ पर तरह स सतषट न कर पन क वचर स परशन ह और उसन इस अपन छट स पगल दमग म डल लय ह क समधन उसक पहच क भतर ह सकत ह। हथ, कई बर स, जब हम अपन सरवशरषठ डलवर म हत ह, मन उस यह कहत हए सन ह: हम अपन पयर क तलश करन ह, कई ऐस ज तमह लड स भर द। वह थड स सवदषट और आपक उस तरह स पर करग जसक आप हकदर ह। --- सतय परय? कय तमह मर पयर पर वशवस ह? --- तम मर लए कफ ह कयक यह ह तम ज म अपन सथ चहत ह. --- म जनत ह क आपक वह उततर पसद नह ह और मझ भ वह जद करत रहत ह, इसलए कभ-कभ मर पस उसक बत मनन क अलव कई वकलप नह हत। म खलत ह और अपन बखर क चरम बद पर म उसस कहत ह ह, म चहत ह उसक समन एक ऐस आदम क सथ कर ज मझ कल स मर डल और म चहत ह क वह ऐस कर जलद ह सच ह जएग. --- वह यह अनवरय रप स हर चज और मर सथ चलत ह भ। लकन जस क मन आपक समझय ह, जब हम समनय सथत म लटत ह, त म कशश करत ह वषय क न छए, कयक खद क गहरई स उलझ हआ दखन क वचर मझ डरत ह दसर आदम क सथ, चक मर एकमतर आदम मर ऑसकर रह ह, इसलए म खश ह सथ। --- हलक अपन दल क गहरइय स म मनत ह क म वह स नह ह पतथर और मर पत क बहत आगरह क बद इस वचर न आकर ल लय ह मझम और मझ नह पत क म कब तक इस परलभन क वरध कर पऊग। हमर लग महन ह और जतन म पढ पय ह, उसस पत चलत ह इटरनट, लगभग हर कस म समन मनसक चक वकसत हत ह (कलपनए)। यन), व एक दसर क नकल करत ह, बसतर म व उदर ह, लकन नह एक यन-जड क रप म अपन गणवतत म सधर करन पर, लकन उनक समन परसतव रखन पर भ खब खरच कय ज रह ह महलओ क दसर परष क सथ ऐस करन क सभवन, यह तक क उनह इसक जनकर भ दन नषदध और मतर स लकर परयस करन क लए सभवत उममदवर क सच करब रशतदर, जनम चचर भई-बहन, चच-भतज, पडस आद शमल ह। दसत, आद। इस तरह व अपन महलओ क तब तक उततजत करत ह जब तक क व "छड" पर कदम नह रख लत व सध जल म फस जत ह। एक रत ऑसकर मर लए एक उपहर बकस लकर आय, जस क वह हत थ उनक पस दकन म जत ह, मन उममद स उस खल, उसम रख चज पर धयन न दत हए, मन यह भ कलपन क क व जत थ, हलक फयद उठत हए कवल एक सपतह ह हआ थ जब हम एक वशष शपग सटर स गजर त उस कछ लग स पयर ह गय सलवर परट रग म पतल पटटय वल सदर ऊच एड क जत, उनहन मझस इनह आजमय और बहत उतसहत हए, बवजद इसक क उनहन इनक लए बहत अधक कमत चकई सभ अनपलन. वह मझस हमश कहत ह क खबसरत टग वल महल क उनह दखन चहए। अचछ तरह स, मर पर क दखभल क लए मझ महन म द बर पडकयरसट क भगतन मलत ह वह उनह पयर करत ह और भकत भव स चटकर और चमकर उततजत करत ह। लकन उसक उपहर उस रत व जत नह थ, मझ आशचरय हआ क वह डलड क एक सट थ। सलकन, तन आकर म, सहयक उपकरण क सथ, जस बरसज, बटर क लए कपन, कपन नयमक, दहर लग और नरदश क सथ एक वडय सलह, म कलपन नह कर सकत क उसन इस पर कतन खरच कय, लकन यह उसक एक और इचछ थ उनहन उसक मन-यन मसतषक म हलचल पद कर द। एक परट स लटन क बद एक रत हमन इसक उदघटन कय, जह शरब पन और दसर परष क सथ डस करन मझ हमश अत उतसहत कर दत ह। यह पहल बर थ जब उसन ऐस कछ करन क कशश क थ, ऑसकर परतसहत करन क परभर थ मर इदरय मझ कलपन करन पर मजबर कर रह ह क उसन मझ मर पसद क कस अनय वयकत क सथ सझ कय ह मनसक रप स और एक सपरण कमक कथनक क आवषकर कय, जबक मन आनद लय ऐस शनदर उपकरण क सथ असधरण रप स। मर शत यन असततव न मझ इसम परवश करय नयतरण क वसतवक कम क करण, मन अपन कमनमद कषमतओ क खज शर कर द, ज दरलभ और अउततजक हत ज रह थ, व और अधक हन लग बरबर और उततम अनभत. उन उपकरण क परत मर लत बन गई मजबत, पहल मर पत दवर परतसहत कय गय और फर एक दषट क तरह अकल। मर पत क भ शयद उतन ह आनद आय जतन मझ तब आय जब उनहन मझ कम करत हए दख। कभ-कभ, दर रत तक बसतर पर और टव क समन। म इटरनट पर खज रह थ कमक फलम य टरपल एकस और जब म उततजत हन लग त मन इसक तलश क मर पसदद डलड और कहन क नयक बनन क नटक करत हए, मन एक और समपत कर दय फर स मजबत लग क नगन शरर क आनद ल रह ह। म सकषप म इसक सचलन और सरचन क समझन क परयस करग। मर पसदद म स: इसक एक आधर थ जस महल बच म कद कर लत ह पर, कयक उनम द गदददर अरध-महरब हत ह ज दन पर बलकल फट बठत ह जघ, उस आधर क कदर म एक सवचलत पररत करनवल हत ह जसम लग हत ह पहल स ह चकनईयकत सलकन जस यन म और एक नयतरण क मधयम स डल जत ह अदर और बहर क ओर गत करत ह, आकर क मट और समन बनत ह जब आप अपन सवय क हरफर क मधयम स सभग सख परपत करन वल हत ह, त यह आपक फक दत ह एक हनरहत वरय जस तरल क एक धर ज आपक अधक सहन क लए पररत करत ह आनद। जब मर सथ ऐस हआ, त वह आमतर पर गहर नद म सत थ, लकन सथ म अवयवसथत आकषप क करण वह कभ-कभ भयभत हकर जग उठत थ, लकन जब उस इसक एहसस हआ मझ एहसस हआ क मर सथ कय ह रह ह, उसन मझ सहलय और चम और फर फर स स जओ. परण करयकलप म अपन पत क छट स उपहर क सथ अकल, म उस ऑसकर क लगभग सभ दसत क बर म कलपन करन क अनमत द और कभ-कभ इसम शमल भ थ उनक सतरय, उनहन मझ कछ शनदर कहनय सनई, जनहन मझ आशचरयचकत कर दय कछ जबरदसत ओरगसम. जस क आकत और छव लगभग हमश मर समन दहरई जत थ। मगएल, एक लब, सगठत आदम, 40 सल क, एक शकन एथलट, शररक रप स सवधन, जस मन अपन खडक स दख, वह एक गतखर क रप म अपन सइकल पर य सइकल स लट रह थ परक म टहलन। जस मगएल, मर पत क अचछ दसत थ कयक व एक-दसर क जनत थ। एकल समय क और ऑसकर न उस उस खरदन क लए परतसहत कय हमर समन एक अचछ कनडमनयम म अपरटमट। व आमतर पर एक सथ मलत थ पय क सथ गपशप, चह हमर कन क बर म ह य अदर जस मगएल क अपरटमट, बहत कम ह मर अपरटमट म। वह अपन पतन क सथ रहत थ हड और उनक द बटय म स एक, 24 वरषय सलदद, ज पढ रह थ वदश म वशववदयलय (सपन) और चर सल बद उस ऐस करन पड अपन म क बमर क करण वपस लट और दश म अधययन क पन मनय कय। जस मगएल न कई बद अपन पतन क सथ एक नटक कय सरजकल हसतकषप क बद भ वह ठक नह ह पई थ और बसतर पर औध मह पड हई थ कई महन तक। एक रत वह मर पत क नमतरण पर शरब पन क लए हमर पस आय। दवर ऑसकर क सकत पर, जस म हर चज म परसनन करत थ, उसन मझस कछ पहनन क लए कह इस मटग क लए सकस. जस मगएल एक बहत ह आकरषक और सहज सवभव वल लडक ह। बतचत क दरन, बर-बर डरक पन क बद, म उसक वयवहर स मतरमगध ह गय बतचत एनमटड थ, वह मझ दखत रह और मर शरर पर अपन नगह फरत रह। मर पत क मर दखभल करन क लए कहकर मन ज सज द थ, उस और अधक परशन कय ज रह ह बहत कछ कयक उसक पस एक सतर क गहन थ। उनक रप और परशस न मझ बहत अचछ महसस करय इस आदम दवर उतसहत और वछत। फर समन आ रह नटक क बर म बतत हए उसक चहर वकत ह गय। अपन बमर पतन क सथ बसतर पर रहन, यह कछ समय क लए ह यन सबध बनन स रक जत ह, जसस भ उस परशन हत ह और वह पडत हत ह परणम क बद स उनहन यह पहचन लय क उनक लए सकस क वशष महतव ह उनक मनसथत क एहसस उनक बट सलदद क हआ। उसन हम बतय हमस बहत रजरव मग रह ह, क लडक क अपन पत क समसय क बर म पत ह और वह उसक परत कतन सनह महसस करत थ, एक स अधक अवसर पर वह उसक बसतर पर आ गई, इस सपषट इरद स क वह उसक मजबत तनव क कम करन क लए उस पर कबज कर ल, कछ ऐस जसक वह नतक रप स अनमत नह द सकत थ, लकन वह नह जनत थ क यह कब हन वल थ। वरध कर कयक लडक क पस उसक शररक उततजन थ, जसन उस बहत परशन कय बचन और उततजत. म कबल करत ह क उस रत मन असल फलम बनई हग मनव परपकर क करय, जस मगएल क अपन बसतर पर आमतरत करन, जसक बर म मझ यकन ह म अपन पत क सहमत स तपत क सम तक इसक आनद उठत मन इसक भरपर आनद लय, लकन यह वस नह थ।' जब हम बसतर पर ऑसकर क सथ अकल थ, त मन उसस कह उनहन बड दख और चत क सथ टपपण क। बचर, हर बत क लए कतन कषट सहग उसक सथ यह हत ह; दन अपन पतन क सथ और अब अपन बट क सथ। हम कस कर सकत थ आपक मदद कर? --- कय तम कछ सच सकत ह, मर परय? आपक पस अपन बत ह --- ऑसकर न बन कस असपषटत क मझस कह। म! --- लकन... आप मझस कन चज क बर म बत कर रह ह? --- मन जवब दय दष नरदषत क सथ. मर परय, तमहर पस परचर मतर म वह चज ह ज तमहर पतन क पस नह ह। द सकत ह और अगर ऐस हत त मझ बहत खश हत और हम हसल भ कर लत इस परकर हमर लब समय स परतकषत तरगट कलपन। ओह, कसपट! --- मन कह --- खश स लगभग पगल ह गय, हलक मन उस सफद झठ बलकर इस छपन क कशश क --- पतज! मन जड आध गभरत स --- यह मझ डरत ह क हम ऐस कछ करग, म तमस बहत पयर करत ह और म ऐस कछ नह करन चहत जसस बद म हमर पस ज कछ ह उस नकसन पहच। त हम इसस खश ह हमर कलपनए और आपक सलकन उपहर जबरदसत सफल रह ह मर पयर और हलक म मनत ह क यह हमश स हमर महन कलपन रह ह लकन हम इस वस ह छड सकत ह जस यह ह और इसस अधक कछ नह। . म तमह समझत ह मर पयर, लकन मझ लगत ह क तमहर डर ह नरधर, अगर हम दन कस ऐस चज पर सहमत ह ज हम हमश स चहत थ इसस हम बद म नकसन कय हग। इसक अलव उनहन कह ---- मझ लगत ह क हम ऐस करन चहए एक परण और एक मतर क परत उदर ज कषट सहत ह और यद ईशवर न हम सब कछ दय ह परचरत कय न उस परचरत क कस ऐस वयकत क सथ सझ कय जए ज पहल ह आ चक ह हमर दरवज पर दसतक दन क लए. कय आपक लगत ह? लकन यह उदरत मझ पर ह और मर ह भतक परचरत, जस म चद क थल म सजकर दन ज रह ह, मर पयर कह। म इस सवकर करत ह, मर जदग, तम इसक लए बहत बड परसकर ह कई भ आदम, लकन म तमह अपन जनन म अपन गरव क कछ हसस भ दत ह हमश क लए और हमर बचच क म --- उसन उततर दय --- और दसर बत ह तम अचछ तरह जनत ह क म तमह कस दसर आदम क सथ कम करत दखन क लए मर ज रह ह। और चह वह इनकर कर य न कर, म उसक तरह क औरत ह। उसक बर म भल जओ, वह तमहर सथ ऐस करन क सपन दखत ह, --- कय तम नह दखत उसन तमह अपन आख स कस नगल लय? --- उसन मझस कह क वह सवसथ तरक स मझस ईरषय करत ह तमहर जस महल हन क करण, उसन मझ पर कछ पय क बर म भ वशवस कय ह, अपन छट पतन क खयल रख, वह दन-ब-दन अमर हत ज रह ह और कई अमर भ ह मरदन परष जनक नजर उस पर ह। ओह? -- ऑसकर, तम झठ ह --- मन उस डट, नह? चज क आवषकर कर मर परय, तम अचछ तरह स जनत ह क यह मझ बहत कमक बनत ह और फर म जवब नह दत. चह हम ऐस कर य न कर, यह हमर महनत ह हमर लब तरगट कलपन क सकर करन क मक --- उसन मझस कह लगभग वनत भर सवर म.. ह! --- हम ऐस करत ह --- मन उनस कह, लकन यह बत द क ऐस कय गय ह यह आपक वचर और आपक इचछ थ, फर शकयत मत कर, अर! उस रत हमन असमनय कमकत क सथ उस पश कय मर शरर न इस दढ सकलप क लए उदरतपरवक परसकर दय। अगल कछ दन तक, हम अपन दमग स बहर नह नकल सक। इस उततजक दबव क नततव करत हए, हम सभ ववरण और यह तक क दव क भ कवर करत ह फरचयन हमर पकष म थ, कयक जस मगएल न ऑसकर क यह सचत कय थ सपतहत म उनह एक नरमण परयजन क लए तट क यतर करन थ कमशन कय गय थ और यह सयग हआ क यह वह सथन थ जह कछ समय क लए थ वरष स हमर पस समदर तट पर एक वशरम गह ह। हमन जस क पषट परपत क मगएल उस शनवर क रत क खन क लए हमर सथ शमल हग, इसक बर म कछ भ कह बन आशचरय ह क हमन उसक लए तयर क थ। अपन हसस क लए, उसक पतन एक क सथ थ उसक दखभल क लए नरस. यह वह ऑसकर थ जसन मझ अपन समन पक करन म मदद क थ। हम समदर तट क घर म ल जएग, उसन जन क लए मर सबस सकस कपड, अलमर क तलश क कलब म नतय करन क लए और अपरहरय ऊच एड क जत, करम शररक उतपद और परफयम, म अपन शद क रत खद क एक दलहन क तरह पश करन चहत थ, न क वह मझ सलह दत रह क म उसक दसत क सथ दसतन और जशल वयवहर रख। उस शनवर क रत, मझ यह सवकर करन हग क म सपर थ घबरई हई, मर शद क बद यह कस दसर आदम क सथ मर पहल मक थ, मन ऑसकर क लए वनत क क सब कछ ठक ह जएग, कम स कम मर दढ सकलप क करण म रकन वल नह थ। मर पत क लए उसक हसस मझ सनकस और शबद स उततजत करन लग। इसन मझ शत कर दय यह वचर क म जस मगएल क जनत थ और यह तक क, जस क मन पहल ह उललख कय ह, म जनत थ उसक वयकततव क परत एक छप हआ आकरषण, जसक छव मझम बदल गई थ पसदद जब मर कपन म मर कलपन क खल छट दन क बत आत ह डलड. जस मगएल क आगमन समय क बहत पबद थ, उनहन सपरटसवयर पहन रख थ, तज नहए हए और मनभवन सगध क सथ, उनहन मर बहत परशस क, लगतर ऑसकर क दहरत हए --- मझ तमस ईरषय ह रह ह बढ आदम, मझ तमस ईरषय ह रह ह। एक सपरश म ममबतत क रशन म रतर भज क लए मज सजई गई थ रमनयत स भरपर. बढय समदर भजन और भन हए मस क एक कषधवरधक हमर सवद कछ हलक थ तक बझ न पड पट, लकन ह, मर लए, हमन खद क शरब और डउनगरड पर खरच कय नज तर पर, बच-बच म शरब क सवन मझ बहत उततजत करत ह यन भग और मर वयकततव क वघटत करत ह, ऑसकर क सथ भ कछ ऐस ह हत ह उनक चरम पर कय परभव थ। जस मगएल न मझ नह खय हलचल हई और उसक आख सथर हन ह वल थ क सफ पर बठ-बठ उसन मर आख खल द। पर न सथत बदल और एक पल क लए उदरत स मझ थम लय उस दशय उपहर जसन उस हतश दख। बतचत बहत ववध थ और शररत स भरपर, जस क वह हमश हआ करत थ। कछ मनट क लए मन उनह अकल छड दय, कयक यह सगनल थ ऐस वयवसथ क गई क ऑसकर न उस हमर सथ बसतर पर जन क परसतव दय, मर यन वसन स जल रह थ और मर दल परत मनट हजर क सखय म धडक रह थ। कछ क बद कछ ह कषण म, म दब पव वह लट आय जह परष क सनन थ क कस परसतव ज रह थ और इसलए जब जस मगएल, म सपषट रप स सन सकत थ उसन बहत आशचरयचकत हत हए कह: म आपक बत पर यकन नह कर प रह ह ऑसकर---यह सबस जयद ह यह अवशवसनय ह क मन कफ समय स सन ह, लकन आपस झठ न बलन क लए यह ह मन तमस और भ अधक चह ह --- कपय मझ बतओ क यह कई मजक नह ह, मतर। म तमहर सथ कस मजक करन ज रह ह, दसत, इसक सथ नह यह एक मजक ह, लकन वरष स हम एक-दसर क जनत ह और आपक जबरदसत समसय क दख रह ह हड क सथ, हम आपक मदद करन चहत ह। और कय ववयन सहमत ह? मर लए उस मनन आसन नह थ, यह पहल बर थ जब मन ऐस कय ऐस ह कछ, वह भ आपस बहत पयर करत ह और आपक आकरषक भ लगत ह, वह ह इस बत क लकर चतत ह क आपक और आपक बट क बच कय हत रहग। --- सपषट वह पप (जस) ह और हम यह जनन हग क इस रहसय क कस गपत रख जए। कमपडर, यह छट बचच क लए कछ नह ह --- वह कहत ह मर सथ. मन समझत और आखर क लए कछ आलगन सन ऑसकर क शबद ज उसन उसस कह: मर दसत, जमन बहत बई गई ह अचछ फल, अब यह आप पर नरभर ह क आप उस अपन तरक स जत, म ऐस करन ज रह ह बखबर --- कय हम ह? --- ठक ह, कपडर और उनहन चशम खटखटय। जब म उनक पस लट त ऑसकर न सगत चल कर दय थ और मझस ऐस करन क आगरह कय अपन दसत क सथ नतय कर, जस मन नय लन क बद सहरष सवकर कर लय शरब क घट मर गलस म डल गय, ऑसकर न हम अकल छड दय, जबक मझ लग मतर और क मजबत भजओ दवर आलगन क सवदषट अनभत जस आदम क मन अपन खडक क बहर परशस क, उसक चहर क नकटत और उसक मसकन न मझ परभवत कय नश म, मन भ खद क कमकत स भर हरकत क लए पररत कय क हमर नगह सथर रह और एक नरम लकन परभव चबन न हम सल कर दय कछ सकड बद बहत भवक तरक स मह दहरय जन चहए। म डरत-डरत अपन मह हटकर नरदष हन क नटक करन चहत थ वह और उस दलन क ओर दख रह थ जह ऑसकर दखई द सकत थ, लकन उसन धयन नह दय। वह वह रक गय और मर बलउज क पहल बटन उसक कशल हथ क समन खल गय। वह मर एक उभर हए सतन क तलश म फसल जसक नपलस पहल स ह मजद थ व कठर और बहत सवदनशल थ. ओह, कपय पप, ऑसकर हम आशचरयचकत कर सकत ह! ववयन, तम वह महल ह जस म इस दनय म सबस जयद चहत ह म आपक अपन दसत ऑसकर क सथ सझ करन क लए कछ भ करग। और कय आपक लगत ह क वह मझ आपक सथ सझ करन चहग? वह एक बहत अचछ दसत ह और उसन हमश मझ यह बतय ह मझ उसस ज भ चहए, मझ बस उसस पछन ह। जसम उसक पतन भ शमल ह? उनहन मर लए कई सम तय नह क ह फर---उसस पछ---मन मसकरत हए जवब दय और नडर हकर मझ फर स जश स चमन। मझ उसक कठरत क एहसस हआ शकतशल लग लगतर मर जलत हए सकस और मर भवनओ क खलफ रगड रह ह उस कषण क उस महन लग दवर भदन थ जसक मन अनमन लगय थ पट । उस जशल नतय क बद, म अपन शयनककष म भग गय, मन जलद स अपन कपड उतर दए और म कवल अपन छट स अडरवयर म रह गय। "कललस", मर ऊच एड क जत और एक आकरषक और परदरश बब डल खद क आईन म दख रह थ और सच रह थ क कछ ह मनट म म इतन जबरदसत ह जऊग एक लडक मर पत क सकष मनकर मर सर नजत म परवश कर रह थ, म लगभग एक ह चक थ कमततजन, ज तभ रक जब मझ अपन दरवज पर दसतक महसस हई। जस मगएल मर नजर क समन अवशवसनय लग रह थ। आशचरय!--- मन अपन सबस अचछ मसकन क सथ उसस कह--- जस ह म उसक पस पहच. ओह --- ह, म इतन सदरत स सबस जयद आशचरयचकत ह एक सथ एक ह वयकत म --- उसन मझ सर स पव तक दखत हए मझस कह, जबक म म उसक शरर स जड गय, उसक कपन और बर-बर धडकन क महसस कर रह थ कठर शशन. जब ऑसकर वह स गजर त मन उसक कपड उतरन म उसक मदद क पय, तन मनट बद मन उस हमर बड बसतर पर अपन ऊपर अपन हथ म ल लय उनहन मझ ऐस छआ मन व चहत ह क मर तवच उनक हथ, उनक खड लग स चपक जए पहल ह अपन वसतवक आकर ल चक थ, शबद सटक (सपन-आकर) ह लगभग 23 सटमटर लबई न, मर ऑसकर क लबई स अतर पद कय बस लगभग 14 सटमटर अचछ तरह स मप गय। दख कय डवइस ह! --- मन ऑसकर स आशचरय स कह जब वह डरकस लकर अदर आय। वह ह! - आदम! --- तम चप रह दसत, उस चज स ज मर "वव" क तडन म सकषम ह---कय आप उस जबरदसत चज स मर मदद कर सकत ह पयर? --- ऑसकर न मझस पछ --- जबक उसक आख डवइस स नह हट रह थ उसक दसत क. "ओह, तमहर पस कय अदभत उपकरण ह, पप!" मन कह थ। मसकरत हए --- आपक पत क अनमत स म यह सब आपक हथ ख दग क तम चहत ह यह कस दसर आदम स मर पहल मलकत थ, ज भख थ मर लए, हमर बसतर पर उसक सर महन परमपरण और परष कषमत शर ह गई मझ, उसन अपन दलर स मर दम घट दय, मन उसक हथ क अपन पर शरर और उसक मह पर महसस कय मर कठर सतन स उसक पट भरन क बद, म अपन पर क फलन क लए बतब रहत ह और फर महसस कर क उसक मह मर यन क परवश दवर क चख रह ह और मझ पर हमल कर रह ह इतन नपणत क सथ अतयत उततजत भगशफ क इसन मझ ऐठन म डल दय पहल सभग सख, जसन मर पत क आशचरयचकत कर दय, मझ पर तरह स उततजत कर दय, वशषकर तब जब म उसक आनद क वशल अश क अपन मह म लन म कमयब ह गय। आपक वचर मझ पर पर तरह कबज करन स उसन मर सथत क दरन अपन सथत बदल द मलटओरगसमक कई वरष क बद पनरजवत हन लग थ। जब पप क मट और मजबत अग मर अदर घस, यह एक बहद खश क बत थ, ऑसकर नकड न भ इसक ववरण नह छड जबरदसत परवश और फर गहर दरद क नरम झक जसन मझ झकझर कर रख दय व मर उततजत गरभशय क नचल भग तक पहच गए, म करहन और चललन स खद क रक नह पई, जब उसक सवदषट धकक नच तक पहच, त मर यन क नलक सकड गई जस मगएल क बचन लग क लए एक वध चमड क दसतन क तरह। सब कछ कस चल रह ह मर परय? --- मर पत न मझस पछ --- सवदषट मर परय, म लग स भर अपन छट लमड क सथ ह... ओह, कतन सवदषट ह पप! --- जब पप न मझ अपन पस रख त म करहन लग, लकन वह ऐस नह कर सक उनह बतए क वयभचर क उन कषण म मझ कतन जबरदसत आनद महसस हआ जस मगएल क वशषतओ वल एक वयकत दवर मलभगत क सथ और आपक अपन पत क सहमत, जसक लए वह कस तरह स यह चहत थ और इसक लए तयर, यह कछ अवरणनय थ, उसक हथ न मझ हर जगह सहलय जबक उसक मट लग न मझ अदर ह अदर पगल कर दय, उसक मह न चस मर सवदनशल और कठर सतन उनमतत। म हर कस क उनक अनशस करत ह व इसक बर म सच रह ह, यह कछ ऐस ह जसक तन बर वरणन नह कय ज सकत ह म अपन परम क समन मजबत लकन उनमदपरण ओरगसम क आग झक गई सब कछ लकर आय, अपन ऑसकर क घसटत हए, ज अपन दसत क रप म खश थ उसन अपन पयर छट पतन क वरय स भर दय। मर पत न मर पसन सखन क लए खद क समरपत कर दय थ उसन मझ कमनमद स दरवत कय, मझ सहलय और कतजञत क सथ मझ चम। मर पहल डलवर क अनभव, हलक तनव स भर हआ थ यह पहल बर थ क परसननत और सवदनए असधरण थ। वह मर ऑसकर क लए रत, उसक छट पतन और उसक लए कछ परवश परयपत थ यह हर चज क सथ थ, उसक चहर पर म दख सकत थ क मझ कम करत हए दखकर उस कतन आनद आत थ वह खश और परसनन लग रह थ कयक मन उस पहल शयद ह कभ दख थ, उसन मझस ऐस पछ वह अपन दसत क सथ हमर डबल बड पर रक और वह दसर कमर म चल गय जह वह नशचत रप स बहत परसनन हकर स गय, जबक उसक छट पतन अदर थ सदर जस मगएल क बह म हमन पर दसर सतर बतय जश और पगलपन क, थकन तक परबल समरपण क थककर म अपन जबरदसत परम क बल स भर छत पर स गई। अगल दन रववर थ, ऑसकर न मझ जगय दपहर क समय, जस मगएल सपषट रप स जलद चल गए थ। ऑसकर, म थ एक नए खलन स एक बचच क तरह खश हकर, उसन मझ चम और बड कमलत स मझ सहलय। वह मर सथ बहत सनह और नजक थ। उनहन मझस पछ क मझ कस लग मन उसस कह क मझ अब स बहतर कभ महसस नह हआ, मन उस चमबन स भर दय और द दय इस वचरशल कलपन क सकर करन क अनमत दन क लए धनयवद। समकषत मर छट लमड उस लल और सज हई दखकर घबर गई, उसन उस पयर स चम और वह सजन कम करन क लए बरफ क पन वल कपड लन क लए दड। और आप इस अनभव क बर म कस महसस करत ह, कय यह थ? आप कय चहत थ? मन उसक कन म पछ. एक वयकत क लए यह कछ शनदर रह, मर कलपन स कह अधक उस पल मझ लग क वह जबरदसत कलब आप पर वर नह करग, लकन आप पर ऐस असर हआ असधरण, म दख सकत थ क पप क अडकष कस उछल और उनहन आपक अमर छट फहड क परवश दवर पर दबव डल। तमह खतम हत दखन कतन रमचक थ उसक सथ और कस आपन अपन उन वनशकर हरकत स उस नच गर दय शरण. --- जबरदसत, मर पयर! --- तमन बहत अचछ वयवहर कय मर पयर. मझ लगत ह क हम एक आदरश परष क तलश कर रह ह, मझ नह पत क कस और क तलश ह य नह यर, मझ जस लइस क सथ उतन ह अचछ महसस हत --- मन उसस कह, जबक उसन वह कतजञत क चमबन दत रह। मझ पर वशवस ह क उनह पत हग क भडर कस बनए रखन ह ममल और यह हमर कलपनओ क एक अचछ सहयग बन सकत ह। उनहन मझ सचत कय क जस मगएल न इस जर रखन क लए छड दय ह लगभग दस बज उनक परजकट क गणन और मप हई और उनहन हम आमतरत कय एक वशषट सथनय रसतर म एक सथ दपहर क भजन करन। दपहर क भजन क बद, ज बहत सखद थ और दन कह थ आदम न अपन सर धयन मझ पर दय, हमन जस मगएल क सथ जन क फसल कय जमन पर उनक परजकट दखए, जब उनहन फन कय त हम वह थ मर पत क सल फन कय, उनहन उनस शहर लटन क लए कह कयक उनह उनक जररत थ जस पलट म वह कम करत थ, वह एक तकनक समसय थ और उनह उसक जररत थ नयतरण। मन उसक सथ लटन क पशकश क, लकन उसन सफ इनकर कर दय, उसन मझ यह बतय जस मगएल क सथ थ और इसम कवल कछ घट और उसस पहल क समय लगग रत हन तक वह फर हमर सथ हग, कयक समवर खतम ह चक थ। मगलवर क धरमक अवकश हन क करण अवकश घषत कय गय। उनह क तहत म खश थ, पप न जलद ह अपन मप पर कर लय और वह स चल गय हम लगभग एक सनसन समदरतट पर गए और एक-दसर क गल लगत हए चलत रह छट-छट लहर हमर नग पर क गल कर दत ह, वह एक अदभत दपहर थ परष जनत थ क कस महल क चपलस कस क जत ह और उस कस उततजत कय जत ह। हम अपन घर लट आत ह उतसहपरवक अपन आप क पयर करन क लए समरपत कर द। मन पप म उसक जबरदसत कषमत क पत लगय कमकत और मझ पर तरह स सतषट करन क इसक महन सतभन कषमत स म आशचरयचकत थ। तट पर रत हन लग थ और हम कई रहत दए बन उसन मझ कनर पर ल खड कय एक महन सभग सख क, तभ मर सल फन क घट बज, यह ऑसकर क कल थ, ज उनहन मझ चतवन द क एक बयलर म समसय अधक जटल ह गई ह और मझ ऐस करन पड एक ऐस अतरकत हसस क तलश कर जस हसल करन आसन नह थ। जस मगएल हट ह जब म बल रह थ, उसन मझम और अधक इचछए भर द, ज वकत ह गई मर आवज अतत ऑसकर न मझ तट पर और अगल दन रकन क लए कह आग अगर सब कछ ठक रह त वह हमर सथ लटग --- धयन रख यद नह वह बछड तमह अपन मटठय स मरन ज रह ह! --- वह पहल स ह ऐस कर रह ह --- मन उततर दय शकयत करत हए --- ठक ह, उसन मझस कह --- हम ऐस ह चहत थ और चज इस तरह चल रह ह चज, उसक सथ उदर रह, उस कस भ चज स इनकर न कर, बचर पप, उस अचछ समय द दसर हनमन, जस क आप जनत ह क यह कस करन ह।----- यह म ह मर पयर, म म आपक सभ नरदश क अकषरश: अनपलन करत हआ पत ह, आप यह जनत ह आपक एक छट पतन ह ज आपक हर बत मनत ह और अब म इस बछर क करण आपक छड रह ह यह --- सब कछ क सथ आ रह ह!!! ओहहह! उस रत मन रहत और आरम क तर पर पप स पछ, उसन हम डरक करन क लए एक बर म ल गय और फर हम वयसत ह गए डसक, हमन सबह चर बज तक नतय कय और लगभग नश म धतत हकर हम चल गए घर, लकन द क परवश क बजय तन परवश कर गय। कय हआ थ? हआ य क जब हम डसक पहच त सब कछ भर हआ थ वह बठन क लए कई मज नह थ, सगत इतन अचछ थ क हम हमन डस करन शर कर दय और फर हम बक चज क चत हन लग। जब हम नच रह थ, एक यव जड न भ ऐस कय, मर धयन आकरषत करत हए कह क उसन नह, मन नह थड दर रकन क बद उसन अपन नजर हट ल और मझ परशन करत हए मसकरन लग सगत, हमन एक टबल ढढन क कशश क, लकन हमन दख क यह लगभग असभव थ वह यवक ज मझस परमलप कर रह थ, पस आय और उसन हम मज पर आमतरत कय उसन उस यवत और एक अनय लडक क सथ सझ कय जसक सथ उसन नतय कय थ। हम पहचत ह नमतरण कयक उसन हम सचत कय थ क उसक दसत सवनवतत ह रह थ और उसन फसल कर लय थ अधक समय तक रह. सबसटयन, ज उस यवक क नम थ, मर ह गय लगभग पर रत डस परटनर रह कयक जस मगएल उस बहत पसद नह करत थ इस आधनक सगत और एक अनय वसतकर स बतचत करक अपन मनरजन कय जसस वह मल वह बर म, मझ नह पत क सगत क गडगडहट क बच व एक-दसर क कस समझत थ। मर पस पहल स ह ह मन कह ह क नचन और शरब पन मझ बहत उततजत करत ह और उस रत म यह कर रह थ जस मगएल और बद म लगभग चबस सल क लडक सबसटयन क सथ, मनमहक और लब, म कबल करत ह क म परपकव महलओ क आद ह, जस उसन मझ बतय जब हमन शरब पकर खद क तरतज कय, त उसन भ मर समन कबल कर लय क म उसक ह एक परकर क सतर, जसन मझ परवश करत दखत ह मन ह मन कह, यह त मर ह रप ह कभ दख ह, महन परचत ह लकन कह ह, कब ह, कय ह, यह मझ नह पत क यह वह महल ह जसक म इतन वरष स तलश कर रह थ।" मझ ऐस लग रह थ यह तक क उनक भषण भ रमटक थ, बदल म मन उनह एक तज और पगलपन भर चबन द दय हठ. जस मगएल क सथ एक पल म अकल रहन और मझ ऐस दखन सबसटयन क बर म उतसहत हकर, उसक मन म एक पगलपन भर लकन शनदर वचर आय, म उसन उस मर समदर तटय घर पर शरब पन क लए आमतरत करन क परसतव रख। मर परतकरय यह थ क म यह एक अचछ वचर परतत हआ और म इसक वरध नह कर रह थ, लकन फर भ इसस मझ चत ह रह थ। मझ कतन अचछ लग क ऑसकर क उस चज क बर म पत थ ज हमर अदर नह थ यजनए. पप न मझस कह क इसक बर म चत मत कर। उस रत द नगन परष क हन अदभत थ बसतर म मझ परशन करत हए, मझ एहसस हआ क मर जबरदसत पप न, उसक उमर क करण, उस मजबत कय ह "वयगर" क सथ परषत जसन उनह एक असधरण परणम दय, म ह जसन खश-खश इसक परणम भगत। अपन हसस क लए, सबसटयन, फल म अपन यववसथ म, उसन मझ अपन मथन कषमत क परदरशन कय और म उसक थ इसक लए वछत महल क परकर। उनहन मर सथ सभ आकर और सथतय म ऐस कय, मर ओरगसम एक क बद एक दहरए ज रह थ, मझ बदल म महसस ह रह थ, नह एक सधरण और कवर गहण क रप म समझ जत ह जसन एक बर उसक परयग कय थ सदर छव बनए रखन क एकमतर उददशय क लए शकषक क पश अपन पत स मल एक उपहर क करण उसन अपन वयवहर म आमल-चल परवरतन क अनभव कय ह। यन, परष म इतन आकरषण पद कर सकत ह और मन उनक सथ इसक अनभव कय , पप और सबसटयन जनह मन दख थ, उनक समन जरदर ऐठन क सथ दम तड दय मर शरर क आनद और वह उततम आनद ज मन उनह उनक रहत दय उनहन मन मझम तवर भख घसकर अपन परष परवतत क तपत कर लय व अपन बड लग स मर मसतषक तक पहचन चहग। इनम स सबस अचछ परसव वह सनह और दलर थ ज उनह उनस मल, यह दखत हए क उनक परसव नह हआ व गपतग थ, लकन बहत भवक थ जस क हर महल क पसद हत ह। मझ मर ऑसकर न समवर क रत, उस रत बचय थ मन इस पर तरह स उनह समरपत कर दय कयक मर पस कस और क लए कई ओरगसम नह बच थ। सबसटयन दपहर क चल गय थ और जस लइस भ शररक रप स थक गय थ। उनहन आरम करन क लए खद क हटल क कमर म बद कर लय। मझ घर लट एक सपतह ह गय, मझ मर नह मल सतवन दत हए, मर म, ज दस सल स वधव ह, मर पध क पन दन आई पय और इस "उधर" ल लय, एक कगज क अनसर उसन मझ छड दय, उसक पस ह 59 सल क उमर, ज उनक बलकल भ परतनधतव नह करत, मन जर दकर कह ह क वह एक परष क तलश कर उसक सथ जन क लए, लकन वह जवब दत ह क उसक पस अकल बहतर समय ह। उसन मझ यह बतय जब वह मझस मलन आएग त वह मझ वह सब कछ बतएग ज उस महन वयकत क सथ उसक सथ हआ थ वह गजट. जस मगएल, दपहर म मझस मलन आत रह ह वह दपहर जब म अपन महन दवर परवश पन क लए असमनय उतसकत क सथ परतकष करत ह परम, हम इस सभ आकतय और मदरओ म करत ह, और यह मझ कमततजक रप स शषण करत ह, कयक म उसन कबल कय ह क उस मझ दखन और मझ बर-बर सहत हए महसस करन पसद ह। कल दर स मर पत समनय स पहल पहच और चक उनक पस चब ह समन क दरवज, जब उसन परवश कय त हम इसक एहसस नह हआ, उसन हम सबस अचछ रप म पय बसतर पर, मन जस मगएल क सरपट दडय, उसक सखत लग पर बठ, वह रक रह वह यह दखकर सतबध रह गय क कस उसक छट पतन उसक उपसथत म अपन परम क आनद लत थ वह खश लग रह थ और फर पर तरह स नगन हकर हमर सथ बसतर पर आ गय, म हम कररवई म दखन जर रखन चहत थ, लकन बचर जस मगएल, म पहल ह ऐस कर चक थ पर तरह स नचड हआ, तब भ जब ऑसकर मर गड म मझ चद रह थ उसन पप क लड तब तक चस, जब तक वह फनकस क तरह रख स पनरजवत नह ह गय। जस मगएल क बट हमर बर म कछ नह जनत और जर रखत ह अपन पत क बर म चतत हकर, उसन फर स उस आग बढय लकन उसन उस रक दय। ऐस लगत ह क जस मगएल न मझस उनस सपरक करन और परकष रप स उनह मनन क लए कह ह यरप म उसक परवस न उस बहत उदर बन दय ह। सबसटयन न भ मझ फन कय, मझ नह पत क उस मर फन कस मल फन नबर, शयद उस यह मर सल फन स मल थ, उसन मझस वनत क वह मझस मलन चहत ह, जसक पस एक बहत ह गपनय अपरटमट ह जस वह सझ करत ह एक अनय मतर क सथ, जस उसन समदरतटय घर पर उस रत क बर म और अपन मतर क बतय उनहन जद क ह क वह मझस मलन चहत ह. मझ नह पत क कय कर, मर छट स पट गल ह रह ह म बस यह सच रह ह क कछ लग क सथ मलकत म कय हग व आसन स मर बचच ह सकत ह। मर अगल डरवन कहनय क इतजर कर, तक जन क सकस क परत मर वसतवक जगत कस जर रह। मर ईमल offerrada@hotmail.com
