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जस दन मन अपन भई क धख दय: इस अवसर पर म आपक उस दन क बर म बतन चहत ह जस दन मन पषप-वचछदन कय थ मर भई। अनय कहन क वपरत, जआक क बर

जस दन मन अपन भई क धख दय: इस अवसर पर म आपक उस दन क बर म बतन चहत ह जस दन मन पषप-वचछदन कय थ मर भई। अनय कहन क वपरत, जआक क बर म जसन दन बतय मर 18 सल म स, इस बर यह मर भई क सथ हआ जब म 16 सल क थ और वह लगभग... 12, लगभग 13. मर भई शत सवभव क वयकत थ, वह बहत आकरमक नह थ म और उसक सहपठ पहल ह उस सकल म परथम वरष म परवश कर चक ह और पहल स ह कछ लग दसत लडकय स आध शरमल थ और सकस क बर म बहत बत करत थ। एक दन मर भई अपन दसत स मलन गय और व सकस, फलम क बर म बत करन लग परवण, उनक लड क आकर, यन सथत और हडजब... मर भई न इसक जकर इतन बर कभ नह सन थ। दसर शबद म, वह वसतव म नह जनत थ क यह कय थ, कय ह रह थ, और उसन इसक हममत भ नह क उनस पछ कयक चक व इस वषय क कफ जनकर थ, उनहन मन सच क व उसक "दर रहन वल" सथत पर हसग। वह उस शकरवर रत 11:30 बज पहच। टकस स, म थ एक बहत ह मनरजक एकशन फलम दख रह ह। उसन मर अभवदन कय और बसतर पर चल गय। मर फलम करब 12:15 बज खतम हई और म थड दर क लए स गय। लडक क सथ गदबज करन क लए 3 बज उठन... म अपन बसतर पर लट गय और मझ बहत आरम मल, मन उठन क बर म सच "नतय" क उस रत कई लडकय बसतर पर जन क कछ दर बद मझ अपन भई क एहसस हत ह वह पछत ह क कय म स रह थ, म आध कडवहट स जवब दत ह क म स नह रह थ, और इस तरह यह शर हआ। वरत: -अर!!, कय तम स रह ह? -नह, कय गलत ह? -म आपस एक वयकतगत परशन पछन चहत ह, कय म पछ सकत ह? -ह, यकन स बतओ... कय तमह कई लडक पसद ह? -एक तरफ, लकन म इस बर म बत नह करन चहत... -इसलए? -कछ समय पहल, व लसय, मनअल और जआन क सथ थ और बत कर रह थ अलग-अलग सकस सबध चज क बर म और उनहन तब बत क जब व शवर म झटक मर रह थ, यह ह मर समसय यह ह क म नह जनत क "पआल" कय ह। -हआ!!!, बस इतन ह..., खर हणडजब हसतमथन ह, जब हम जस लडक यन उततजन महसस करत ह त उसक लड खड ह जत ह रक, कभ-कभ उसक लग क तवच पछ हट जत ह, और एक बर रक जत ह वह उस अपन हथ स पकडत ह और अपन हथ क अपन लड पर पछ स आग क ओर घमत ह, जब तक ऐस समय न आए जब आपक लग क आपक डक अब आपक हथ म फट नह बठत, जब तक आपक हथ म ऐठन न ह जए, यन क आप ऑरगजम तक नह पहच रह ह, तब तक यह ह जब आप कस लडक क चदत ह त सबस जयद आनद यह हत ह हथ यन क रप म करय करत ह; लकन आपक यह करत समय सवधन रहन हग कयक कभ-कभ एक नशचत उमर म जब आप ऑरगजम तक पहचत ह त दध जस सफद कछ नकलत ह। अतयधक दबव स उछलत ह, जस वरय कहत ह, जसस नकलन क लए शकरण हत ह यद आप कस लडक क सथ ऐस करत ह त गरभवत हन पर यद आप असतर नह पहनत ह, त कय आप समझ? -ह!, वह अचछ थ, अब म शत महसस करत ह... और इसलए हम स गए और फर म बलग एल पर गय, मन बलकल भ फलरट नह कय उस रत.... उस दन, दपहर म मर मत-पत अपन कम करन ज रह ह खरदर क, मर भई न टव दख और मन रसयन वजञन क अधययन कय। तभ मर भई अनदर आत ह चथ, ज हम दन क थ और वह मझ बतत ह क एक बर म बलग एल पर गय थ, वह उसन अपन लड क छआ और उसन उस रक दय लकन न कर पन क डर स उसन झटक दन क हममत नह क वह... फर वह मझस पछत ह क कय मन वसतव म उस नह पढय ह अभयस। त, मन बसतर स समन उतर दय और उसस कह क वह अपन कपड उतर द, उस नगन रहन द, इसलए उसन ऐस कय और उस समय मन भ ऐस कय। इसलए हम दन सरफ अडरवयर म रह गय थ. उनहन उस आदश दत हए यह बत कह अपन हथ उसक पट क नच रख और उस तब तक सहलए य हलए जब तक उस महसस न ह जए रक गय, और रक गय, फर हम दन न अपन अडरवयर उतर दए और हम रह गए द पर तरह स नगन. उसक लग लगभग मर लग क बरबर ह लमबई क थ उसक जघन और नभ क नच थड अधक बल थ, इसलए, हमन पकड लय हमर लड और मन उस सखय क अपन हथ क कस हलन ह, और इस तरह हमर शरआत हई घस... म बन हडबड कय धर-धर चल गय, उसन भ अपन लड मसल दय धर-धर, यह एक वशवसनय परतलप थ क मन यह कस कय, मन उस बसतर पर छड दय और म टयलट पपर क तलश म बथरम म गय, म बसतर पर लट गय और मन खद क सपन शर कर दय जर-जर स, करह रह थ, चलल रह थ, और एक झटक म, वह भ करह रह थ खश, एक रमचक करह, कयक यह उसक पहल बर भस म और हर चज म, हर बर थ मर हथ और अधक मजबत ह गय, हम दन न इस अपन लड पर दबय और भ अधक। तज स, और अधक स अधक जब तक म टयलट पपर और अपन कम क पर नह कर लत भई कछ सकड बद. हम बसतर पर लट हए आरम करत ह यह उसक पहल बर थ, सखलन क सथ उसक पहल सभग सख सब कछ और म इस दखन क लए उतसहत थ कयक अतत मझ उभयलग महसस हआ... थड दर बद मन अपन बटआ अपन पट स बहर नकल, जह मर पस एक बटआ थ कडम, मन उस पहन और उसस कह क वह अपन पर खलकर घम जए, क म उस हडजब क एक नय तरक सखन ज रह थ, उसन मर सथ अपन गद क सथ ऐस कय म उस अपन हथ स.... इस तरह मन धर-धर उसम परवश कय, तक वह ऐस न कर सक दख हआ, एक बर जब मर लड पर अदर चल गय, त म उसक पठ पर झक गय, उस पकड लय लड अभ भ बहद उततजत थ और हरकत शर ह गई। हम दन खश स करह उठ, म म उसक हसतमथन कर रह थ और सथ ह उस चद भ रह थ... हर बर म और मजबत हत जत थ तज, तज और तज और तज जब तक क वह टयलट पपर पर सखलत नह ह गय और म जर रह उस और जर स तब तक चदत रह जब तक क मर लड उसक गद म बहत चड नह ह गय। उसन अपन अतम करह नकल, जसस अतत म उततजत ह गय और मर दध न पर परत क भर दय। जसन उस ढक लय... मन झट स अपन लड उसक गड स बहर नकल और भई क पलट दय. और मन उसक लड चस, एक सखत, सध, शनदर लल लड, थड स दध ज मन पय और उसक सवद सवदषट थ। फर मन असतर हट द, एक गठ बध द और हम चल गए आगन क जल द कयक हम इस कडदन म नह फक सकत थ, इसस पहल अपन आप क फर स तयर करन। यह मर भई क पहल और पहल बर कमनमद थ मन एक आदम म परवश कय, मर बचर भई क अब पत चल क कय हडजब, लकन मझ नह पत थ क उसन समलगक सकस कय ह य कय ह, ऐस कवल परष ह करत ह मर जस वशयए और टरल, लकन ह, यह जवन क नयम ह, सबस जवत ह भल-भल और अजञन क फयद उठत ह, लकन अचछ बत यह ह क यह आखर य एकमतर नह थ समय, खर दसर अपन एक दसत क सथ थ और मर सथ भ कमर म थ। एक शनवर, एक गरम और समलगक शनवर। सपरक क लए मझ यह लख: Juanperez20x4@hotmail.com, धनयवद....