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"जहज क तबह...खत पर" यह एक ऐस कहन ह ज बदल म मर पस आई एक सइबर मतर क सथ ईमल और बद म उसक सथ चट करन पर उसन मझ बतय क यह थ, ...

"जहज क तबह...खत पर" यह एक ऐस कहन ह ज बदल म मर पस आई एक सइबर मतर क सथ ईमल और बद म उसक सथ चट करन पर उसन मझ बतय क यह थ, ...."एक अकलपनय सथत ज मर दन क सथ घट छट बहन और म, यह वसतव म अकल ह हआ कयक परसथतय कस थ। अब म आपक बतन ज रह ह क कय हआ. सबस पहल म अपन परचय दत ह, मर नम रउल ह, लकन मर पर परवर और परचत मझ "रल" कहत ह, वस मर लबई 1.73 मटर ह, हलक भर रग और बहत सगठत शरर क सथ, यह इसक लए धनयवद ह वह खल ज मर लए मर जवन ह; चक मन हमश "टरयथलन" क अभयस कय ह यह एक ह परतयगत म 3 अलग-अलग खल वधए ह। इस जनन न मझ अनगनत बर परतसपरध करन क लए पररत कय जनम स मन कछ य शयद अधकश जत... लकन भगय मर सथ थ कछ समय स समजक समसयओ क करण मर दश क सरकर भटकन क कशश कर रह ह सभ नगरक क धयन जनहन कई मग क; म खद क दत ह उस वरष क खल परसकर; मझ 1.5 मलयन क उदर रश द रह ह डलर... यन अकल मर लए बहत सर पस, ज 19 सल क उमर म बस इतन ह थ एक भगय... और मझ लगत ह क यह कस क लए भ ह, ह न? मतर और परचत स परशस... वशषकर मर सभ स परवर क सदसय न इतजर नह कय... मझ हर तरह क परशस, उपहर आद दए बधइय, ज मर लए सवरगदत क गत क तरह थ। थड समय बद, लगभग 6 महन बद, मर एक दसत बहत अतरग, मझ आशचरय ह क म उस सर पस क सथ कय करन ज रह थ... और सचचई यह ह जसक मझ कई अदज नह थ कयक यह एक बक खत म जम कय गय थ.... ए उस टपपण क परणमसवरप म सचन लग क म उस ऊन क सथ कय करन ज रह ह, जब तक म इस नतज पर नह पहच क जमन क एक टकड य खत खरदन सबस अचछ चज ह, हम गरमण इलक स आए थ और म वह बड हआ थ, इसलए म इसक ओर आकरषत हआ एक दन गरमण जवन म लटन क वचर बहत अचछ ह। अब और परतकष कए बन, मन इस वचर क नरदषट करक करयनवत कय एक सथनय बक न मझ इसक तलन करन क सलह द नलम म, कवल इस कस भ शहर स कछ हद तक हट दय गय थ। हमन अपइटमट लय और उनस मलन गए....पहल स उस पल न मझ मतरमगध कर दय, यह पहल स ह एक दहत लकड क घर थ लकन इसम सब कछ थ सवए; इतन क उसक पस ऊरज सव क लए अपन सवय क सयतर थ इलकटरकल, लवग रम, डइनग रम, कचन और तन बडरम पर तरह स वशल और अचछ सशभत, भम क वशल वसतर क अतरकत मर पसदद खल क अभयस करन क लए पड और जलधरए। एक भ थ कछ हद तक बड झल जसक मधय म लगभग आध वरग क.म. क एक टप ह। सचलन यह बद ह गय और म शनदर कमत पर उस जगह क मलक बन गय। मन अपन समनय सकल गतवधय जर रख सपतहत म म लगभग हमश कस मतर य क सथ अपन "गफ" म जत थ दसत, सकस और परकत क आनद लन क लए। "दवप" पर, जस क म इस कहत थ, मन एक कबन बनवय थ उचचतम भग म लगभग 6X8 मटर, कछ भ नह तक म कछ आरम कर सक मर खल गतवधय. सब कछ बढय चल रह थ, तभ एक दन मर पतज न मझ फन कय। और उसन मझस कह क घर म चज बलकल भ ठक नह चल रह ह; य ह व मर द छट बहन सकल म बहत खरब थ और उनहन मझस इस छटट क लए कह मर सथ "खत" तक चलन क लए तक व कह जन क लए न कह छटटय, कयक व सज पर थ। यह मझ पर बम क तरह गर, कयक मर पस यजनए थ दसत क अतहन सच... सकषप म, वह मर पत थ, खर वह मर पत ह और मझ इसम कई सदह नह थ उस यह बतन क लए क म सहमत ह क व दन मर सथ आएग, व लगभग 2 महन क छटटय. म पहल स ह खरब ह - मन सच। मन उनह लगभग 2 वरष स नह दख थ, जन क बजय मर घर पर, मर मत-पत इस समय मझस मलन आए थ, इसलए मन उनह उस समय नह दख। समय। खर, हर बर क तरह, म पहच और पतज न सकल म मझस बत क और मझ बतय क मर बहन अगल शनवर क आएग। उस पर सपतह क दरन मन अपन अधकश लग क सथ बहर जन क कशश क दसत इसलए म उनम स परतयक क सथ सकस कर सकत थ कयक मझ पत थ क म भग जऊग। जस कषण मर बहन आई। लकन जवन म हर चज क तरह, समय आय और म अपन छट बहन क तलश म गय। सच त यह ह क म परशन थ, कयक व मझ ज गदग द रह थ। डलत हए, म खश नह थ क व आय, मझ ऐस ह लग और मझ लगत ह क ऐस ह थ मन दख... म उनक इतजर करन क लए बठ गय और मन दख क कस लग बहर नकलन लग, मन ऐस नह कय खड हन क थड स भ कशश क बद भ म बठ रह...हर तरह स लग और मन उनह तब तक परकट हत नह दख जब तक कई और बहर नह आय... मझ लग क कछ हआ ह, मन कल करन क लए अपन सल फन उठय मर मत-पत, जब मझ लग क हथ मर आख क ढक रह ह... -म कन ह? आवज न पछ -कय तम मग बनग? -उसन मझ पहचन लय!!! उसन मझ पहचन लय... वह बहत जर स चललय। आख स हथ हटए बन मझ मसल हठ क अहसस हआ मर गल पर चमन तक म बन मतलब उततजत ह जऊ। मन एक खलखलहट सन, और हथ मर आख स दर चल गए, मन उनह ऐस रगड जस क म उनक आकतय क बहतर ढग स और अपन आख क समन दख सक मर द छट बहन. जस क मन आपक बतय थ, मन उनह लगभग द वरष स नह दख थ जब मन उन पर बहतर धयन कदरत कय, त सबस उतकषट आकतय मर आख क समन रह... लडकय क वह जड ज मर मन म थ, गयब ह गई, कयक व पहल स ह महल सकस क द शनदर उदहरण बन चक थ क 15 और 16 सल क उमर म व शनदर दखत थ। व जह छट-छट जस शरटस पहनकर आए थ आप उसक लब और सडल टग दख सकत थ और अत म बड और टग दख सकत थ नतब सटप ज दन दवर लड कए गए थ। मझ पत ह नह चल क कब उनहन पकड लय मझ गल लगन और मझ चबन स भरन क लए... मझ यह बतन क लए क व मझ दखकर कतन खश थ... हम चल गए और घर क ओर चल दए, रसत म हमन मजक कय और मझ एहसस हआ क मर छट बहन कतन बड ह गई ह... व सब बड ह गई ह शनदर महलए... जब हम घर पहच, त मन उनह करब स दख... मग वह बहत सदर थ, वसतव म व दन थ, अतर यह ह क मग ह एक परकतक शयमल, जसक रग सफद ह लकन लहरत कल बल ह बड सतन और सथ ह नतब क एक शनदर जड। लल, अभ-अभ 15 सल क हई ह, उसस एक सल छट मग एक शनदर लल बल वल, घन बल वल और उतन ह अमर लडक थ मर दसर बहन क तलन म शरर म कवल बल क रग क अलव अतर ह व उसक सतन क आकर क थ कयक य छट नह बलक थड छट थ। कवल मधयम वल, मर हथ क आकर क बर म। उनहन सनन कय और हम कर म बठ गए और बन और इतजर कए हम नकल पड दहत.... उनक चटकल और चटकल क करण यतर बहत मनरजक थ... आखरकर हम पहच, रत क लगभग सढ दस बज, हमन समन खल और मन उनस पछ यद व अलग-अलग कमर म रहन चहत थ य एक ह कमर म रहन चहत थ... त उनहन मझस यह कह एक म हमन सन और आरम क अलवद कह दय। अगल दन मन सझव दय क व टहलन जए और कछ चढई कर। कयक वह बहत बढय सरज थ... उनहन तरत सवकर कर लय। हम मल आरमदयक कपड पहन और हम टहलन क लए नकल पड, मन उनस आग बढन क लए कह मन पछ स दख. म उनक सटप क हलत हए दखकर मतरमगध ह गय नतब और उसक कठर सतन. लगभग 3 घट क बद, हम अपन "दवप" क करब थ मन पछ क कय व उसस मलन चहत ह और उन दन न ह कह। हम वह नव लत ह मन उस वह टक दय और चपपओ क सथ हम आग बढन लग। उनहन मझस पछ उनह नव चलन द कयक उनहन ऐस कभ नह कय थ। करब 20 मनट बत गए और अचनक तपमन म गरवट महसस करत हए आसमन म अधर छ गय और हव घन हन लग। बहत जर स झटक मर, उनहन डर हए चहर और सबस शत भव स मर ओर दख म उनह बत सकत ह... -चल जलद कर, आन क लए जयद कछ नह बच ह, लकन रहन द सथ सवधन रह... कछ नह हग. मन और जर स नव चलन शर कर दय और बरश भ कम हन लग समय क सथ बरश तज हत गई और मर लए वह पहचन और भ मशकल ह गय, हर कई पहल स ह वह पहच रह थ हम भग गए थ, जतन ह सक हम कनर पर पहच और मन उनह गल लगय कयक व थ रत हए, मन उनस शत हन क लए कह तक चज हमर लए अचछ ह जए... हमन एक-दसर क हथ थम और उस खबसरत दपहर म हम एक-दसर स मल। रत लगभग अधर हन क सथ ह बरश तज ह गई और हम आग नह बढन दय बहत... मन उनह दडय... मन उनह खच और उनस कह क हम वह कबन म ह ऐस हन तक हम पहर दग, उनहन मझ कभ उततर नह दय.... पन और कचड क अधकत क करण हमर लए आग बढन मशकल थ यह बन चक थ, इतन क कई मक पर हम गर भ। हम पहच और कबन म गए, वह जयद बड नह थ मन उनस कह, लकन समसय यह ह क लगभग हर चज स पन टपक रह थ, व बस थ कन क हसस क सख ल. उस कषण तक मझ एहसस हआ क हर कई हम बहत गल और कचड स भर हए थ... हम एक कन म गए और हमन तरत गल लग लय. मझ एहसस हआ क हम ठड स कप रह थ कयक तपमन बहत गर गय थ, हव बहत तज सट बज रह थ पहल करण, मन अपन बग चक कय और मर पस मचस य लइटर नह थ अलव जलओ... अचनक व दन रन लग... मन कशश क शत ह जओ, उनह बतए क गरमण इलक म यह सथत समनय थ, लकन कवल म उनहन कह क व डर हए थ और बहत ठड थ.... मन उनस एक-दसर क रगडन क लए कह, लकन इसस कई फयद नह हआ उनक कपड बहत गल थ... हमर दत कप रह थ, अब उनक बर थ हथ और चहर और सच म व ठड नह थ, व जम रह थ!!! -हम कछ करन हग, कयक हम बहत गल ह!!! -सघ... सघ... लकन कय, अब म ठड बरदशत नह कर सकत लल न कह. "हम अपन कपड उतरन हग तक हम ठड न लग," मन कह। लल न कह, "तम पगल ह, म इस नह उतरग, तम मझ दखन ज रह ह।" -बवकफ मत बन लडक, अगर तम ऐस नह करग त मर खओग हइपथरमय!!! म चख उठ -मझ शरम आत ह... नह... म नह चहत!!! लल चललई -बस, बत यह नह ह क आप इस चहत ह य नह, बत यह ह क हम कय करन ज रह ह। कर और बद मन ऊरजवन सवर म कह। मग न मर परसतव क मजर दत हए सर हलय और मझ छड दय। उसन मर आख म दख जस वह मर पहल कदम उठन क इतजर कर रह ह। इस तरह मन इस समझ, म खड हआ और उदहरण परसतत कय, मन अपन चहर शत कय। शरट और शरटस, बकसर म रहन क करण मझ कपड उतरन क हममत नह हई पर... मन अपन हथ-पर रगड और उनस कह... -चल, कसक इतजर कर रह ह, अभ उतर!!! दन सवचलत मशन क तरह खड हए और अपन कपड उतर दए। उसन धर-धर अपन कपड उतर दए, जब तक क वह कवल अडरवयर म नह रह गय... म उनक खबसरत शरर क परशस करन बद नह कर सक और करन क कशश भ क म आपक यथसभव शत स बत सकत ह... -यह परयपत नह ह, हम कचड और कचड स भर हए ह हमर भग और हम उनह सफ करन हग और खद क गरम रखन हग... इसलए म म ज रह ह नकल और ध ल... ठक ह? फर आप... "ठक ह," मग न कह, लकन जलद कर, म तयर ह रह ह। जमन। म कमर क कदर म गय और अपन पर पखर म डल दए पन ज पहल ह बन चक थ... मन एक गहर सस ल और अपन बकसर शरटस नच करक चल गय पर तरह नगन हकर, बन सच-समझ मन अपन हथ स पन उठय और अपन पस ल आय महन भग, कतन ठड क करण चख-पकर मच रह थ.... -तमहर सथ कय गलत ह? मग न मझस पछ. -बहत ठड ह... बहत ठड ह!!! उततर "दख, म अब और बरदशत नह कर सकत, म भ धन ज रह ह," उसन जवब दय। परतकरय क परतकष कए बन, वह वह गय जह म थ, और यह ह गय छत पर और पर क बच पन... अयययय... यह ठढ... मझ दरद ह रह ह... म उस दखन क लए वपस गय और वह बलकल मर तरह कप रह थ... कयक म सहज रप स उसक पस गय और उसक पठ और टग क जतन जर स रगड सकत थ, रगड। हथयर...इस मजबत स तरशत हए। -इस तरह...इस तरह...मझ अभ भ थड गरम लग रह ह!!! चख मन उसक शरर क तरशन जर रख और जब मझ एहसस हआ क लल पहल ह तयर ह चक ह वह हमर बगल म थ... मर जबड हव म बहत तज स घम रह थ। जस ह म अनदर घस, मर दत टकर गय और आवज सफ सनई दन लग... -रल... रल... तम गलत ह... तम गलत ह.... लल न मझस कह -तम नह... तम लग, गरम रह... मन आध कह। इस सबक दवर मग न पहल ह सब कछ उतर दय थ और वह थ पर तरह स नगन, मन उसक गल सतन, उसक छट कमर क परशस क और मन उस बलय उसक बच मजद परचर मतर म घघरल बल पर धयन द सडल पर... वह मर पस आई और मर हथ पकड लय, अब वह ह थ म बहत जर स रगडत ह.... -बचकनपन बद कर और सब कछ उतर द... लकन जलद लल मग चललय. मर छट बहन, एक मशन क तरह, अपन सब कछ छन कर उसम ह रह गई शनदर नगनत भ... वह मर दसर बहन क तरह ह सदर थ, उसक सतन थ थड छट लकन बहत गलब नपलस, सपट पट और क सथ खड ह आग क तरह घन और घघरल लल बल क जगल क सथ.... -उस एक हथ स पकड और म दसर हथ स और हम उस कन म ल जएग मग न कह. मझ पत ह नह चल क हम वह कस पहच, यह तक क मझ रगड भ महसस हई मर पर शरर पर हथ, इसस मझ थड नयतरण पन म मदद मल। -और...अब...आप...अब आप...मन आपक बतय क म कस कर सकत ह व एक सर म एक-दसर क रगडन लग, एक-दसर क गरम करन लग... 10 मनट बद लल न कह... -मझ ठड लग रह ह, यह दर नह हग... म मरन ज रह ह!!! और शर हआ रन "ऐस मत कह, हम इसस बहर नकलन वल ह... म तमह कसम खत ह," मन उसस कह। -और हम कय कर, मझ बहत ठड लग रह ह!!! यह सच थ, तपमन पहल ह बहत गर चक थ और इसक अनमत नह थ गरत पन स, अब हडडय म घस ठड... -करब आओ, एक-दसर क गरम रखन क लए एक-दसर क गल लगओ... कय ह अब करब आओ!!! म उन पर चललय उनहन परतकरय वयकत क और मझस चपक गए, उनह मर बच म गल लग लय बह, मन महसस कय क कस उसक कठर सतन मर छत म दब गए, व रक नह कप, म पहल स ह बहत चतत थ... -आइए कछ कर, मर ओर मह करक कस क गल लगए और दसर कछ दर तक पठ पर बरसटसटरक कर, फर हम ऐस ह जर रखत ह अनयथ... यह ह एकमतर तरक जसस हम ठड नह लगत... मझ लगत ह क लल क पस इतन ठड य डर थ क वह इसक बन थ इसक बर म सचत हए, वह मर पर क बच आ गय और मझ कसकर गल लग लय, जबक मग उसन अपन पठ क अपन शरर स ढक लय... उस वशवस दलन क लए उसन अपन हथ उसक गल पर फरय बल उसक कन क शत हन क लए कह रह थ... मझ इसक एहसस नह थ मन उसक चत क अपन लड स तब तक चपकए रख जब तक मझ नह लग क उसक परचर बल उलझ गए ह। मर सर पर... मग क हलन स मझ उसक दन क घरषण और अधक महसस हआ उसक बल क तरह नपलस... जस क उममद थ, मर लड न परतकरय करन शर कर दय, लकन म यह असवधजनक थ कयक उसन इस अपन बलल स कचल दय थ, यह ऊपर क ओर नह थ, इसलए ज सवततर रप स खड नह ह सकत थ, मझ लल स एक आह महसस हई और कस उसन अपन चहर मर गरदन म डल दय, मझ नह पत क यह शरमदग क करण थ य उततजन क करण... म अब और नह करत। म और कर सकत थ, पहल स ह दरद ह रह थ और मझ कछ करन थ... इसलए लर नगलत हए मन उनस कह। जतन सवभवक म कर सकत थ... -मर बत सन बहन, यह सथत अकल नह बनई गई थ घटत, और बन कपड क और जस सथत म हम ह... म पहल स ह ह मर पस एक ह इरकशन और यह पहल स ह बहत दरद कर रह ह... लल न ऊपर नह दख। म जस थ म थ, लकन मग न मर आख म दख और मझस पछ... -कय आपन इस रक ह? लकन कयक... हम आपक बहन ह!!! -मझ पत ह, लकन यह उसक बर म नह ह, मझ आश ह क आप मझ समझग, हमर उमर ऐस हन बहत आसन ह, म सरफ इतन चहत ह क तम मझ समझ, ऐस नह ह रगणत स बहर बत बस इतन ह क यह कस भ घरषण य सपरक क सथ कम करत ह... -और आप कय करन चहत ह य आप कय परसतवत करत ह? मग न कह. -कछ नह, म कछ नह करन चहत, अचछ ह, बस मझ करन द उस छड द उठ कयक म इस अब बरदशत नह कर सकत, दरद हत ह बहत... -ठक ह, तम सह ह... चल दखत ह, लल, थड उठ वह बहतर फट... आग बढ, आग बढ... आग बढ... लल मझस थड अलग हई और मर लड पर खड ह गय कठरत, जस पर मर द बहन क धयन नह गय, कयक व चल गई थ दख रह ह क कस सममहत ह गय... मन इस अपन हथ स लय और इस तब तक रगड जब तक मझ महसस नह हआ रहत... मन लल क वयवसथत हन क लए कह और लटठ अटक रह उसक यन क घघरल बल. हम फर स गल मल और लल न अपन छट स चहर फर स हमर बच रख दय। मर कध और मर गरदन, मझ नह पत क उसक सर म कय चल रह थ लकन सच त यह ह क उसक पस यह थ उसक भई क लड न उसक चत क भगतन कय। फर मग न अपन बह फल द और उस पछ स फर स आलगन कर, उस पर तरह स ढक द तक उसक हथ उसक ऊपर आ जए व मर दमग म रह, उसक चहर मर बहत करब थ और मन दख क वह मझ कस दखत थ। उसक खबसरत आख स. कभ-कभ वह लल स बहत चपक जत थ इसलए उसक सड भ मर लड उसक यन क हठ क बच म घस गय... इस तरह हम कछ दर तक रक रह मग न कह... -म इस और बरदशत नह कर सकत... मझ ठड लग रह ह!!! -अब तम, आओ और मझस चपक जओ... उठ छट और कर आपक जस ह कय मग... लल मन कस सपन स जग गई और धर-धर खद क उसस अलग कर लय मझ, तभ मझ लग क मर लड गल ह गय ह... मझ लग क यह डसचरज ह गय ह... मग कपत हए, वह खड हआ और मर शरर क बच आ गय, लकन वह फसल गय और जर स गर गय। उसक सर भर मर खड लड पर.... -अयययय.... अगगगगगग... म दरद स चलल उठ -कषम कर, कषम कर, म फसल गय...कय मन आपक चट पहचई? म दरद क बर म बत नह कर सक, मन बस अपन हथ अपन लड पर रख दय और मन इस सवधन स रगड, यह तक क मर गद म भ दरद हआ... कयक इसस मर उगलय गल ह गई व आसन स फसल गए तक उसक इरकशन कभ न खए... जब उसन दरवज थड स खल उन दन क आख बवकफ क तरह मझ अपन लड मसलत हए दख रह थ... म मन थड दबय त सर सज गय और बहत लल ह गय, मन हव छड द मह और मन उसस कह... -अब...यह खतम ह गय ह, आओ, घर बसओ, लकन सवधन रह। जब मन अपन सखत लड पकड रख थ त मग उठ बठ जब तक वह मझस चपक रह, मन उस छड दय और सपरग क तरह वह मर जल क बच फस गई बल ज उसक चत क ढक रह थ... उसक मह स आह नकल गई... -अहहहहहह... -कय मन तमह दख पहचय? पछन -नह... बलकल नह... मझ बस अजब लग... - चल, लल, उसस चपक जओ तक वह गरम ह सक जस उसन कय थ। तमहर सथ... उसन मग क गल लगय और उस सथत म रक रह उसन ज कय थ, अतर यह थ क मग न अपन हठ मर गरदन स जड दए थ मन उसक हठ क नम और उसक सस क महसस कय... जसन मझ और भ सफल बन दय... उसन लल क छट स चहर अपन कध पर और बहत बड आख स दख मझ खलआम घरत हए... मन उसक कपत हई दढ दख... और मन उसस पछ... -कय तमह फर ठड लग रह ह? -ह, यह मझ मर पठ पर और मर पठ पर हव दत ह... मर पस ह ठड... उसन कह -अगर तम चह त जतन करब आ सक, आ जओ तक मर हथ आपक पस आय वपस और तमह गरमहट द सकत ह.... उसन उसक बत मन और जतन ह सक मग स चपक रह, उसक लए यन क हठ और अधक खल गए, जसस मर लड क सपड अदर सम गय उनह... मन महसस कय क कस उसन मर गरदन क नजक ढग स चम... मन अपन बह फलई और ढक लय उसक पठ क आध हसस उस गल-गल रगड रह थ जसस उस भगतन करन पड उसक बहन और भ अधक और परणमसवरप मर लड उसक बच और अधक रगड गय उसक यन क हठ, ज बहत गरम और गल लग रह थ। अब मन न कवल उस रगड बलक उस अपन ओर खचकर उस अपन ओर खच लय हर हरकत क सथ मर तन मर छट बहन क चत म और गहरई तक धस जएग... मन महसस कय क उसक जभ क नक मर गरदन पर घम रह ह... इसलए यह उतन सवभवक थ जतन म कर सकत थ। मन लल स पछ... -आपक कस लग रह ह, कय आपक अभ भ ठड लग रह ह? -पठ पर लगभग नह, लकन बहत नच स म उततर दत ह मन धर-धर अपन हथ उसक नतब क शरआत तक ल आय, जब वह खड हआ त उसक सखत मस पर ज वकर बन, उस मन महसस कय... -यह... कय यह ठक ह? फर मग न अपन मह हट लय। मर गरदन और उनहन हमस कह... -बकवस बद कर और रल, उसक नतब क अचछ तरह स रगड। क लए ह मर तरह ठड रह... यह एकमतर चज ह ज हम कर सकत ह तक ऐस न ह हमर सथ सचमच कछ गभर घटत हत ह... इसक अलव यह अकल हन वल ह बच म हम, कय आप सहमत ह? हम तन न एक-दसर क आख म दख और कह ह... त म सतषट ह क उस कषण स हम सथ कम करन जर रखग दसर क सहमत... मग न फर स अपन मह मर गरदन पर रख दय और मन अपन पहन सबस पहल, मर दसर छट बहन क कठर, कठर नतब पर हथ नजक ढग स रगड, यह महसस करत हए क यह मर उगलय क सपरश स कस कपन लग म इस अब बरदशत नह कर सक और मन उनह भयनक तरक स सहलन, नचडन शर कर दय और उस अपन ओर खच लय, जसस मर लड फर स उसक बच म फट ह गय। मर बहन मग क यन क हठ, वह पहल स ह उनह नचड रह थ और उनह रगड रह थ जनन, उनम स एक म मझ लग क मर कन पकड ज रह ह, मन उस फर स दख बन सच-समझ हमर हठ मल गए, उसन अपन मह खल और मझ चमन लग। अपन गल जभ क तब तक अदर डलन जब तक क वह मर जभ स उलझ न जए... यह सब मझ इसक इजजत नह दत थ मर दसर छट बहन क नतब क रगडन क, जसन हम बहत चड आख स दख थ। खल.... इस दरन उसन उसक सखत नतब पर मजबत पकड बन ल म मग क सथ सबध बनत रह, जब हम अलग हए त वह वपस मर लड चसन लग। और अधक नरलजजत क सथ गरदन झकत हए, मन एक हथ उठय और लल क सर पकड कर अपन करब ल आय मर ओर, जब उसन दख क म नह आय ह त वह थड उठ कर बठ गय और अब उसक चहर समन थ अपन बगल म, मन उस अपन उगलय स रगड और तब तक खच जब तक हमर हठ मल नह गए। सथ म, मर मह आध खल थ इसलए मन अपन जभ क नक उस पर फरई उसक मसल हठ क बच जब तक क उसन उनह मर सलब स गल नह कर दय, मन उनह कट और चस धर स जब तक उसक मह पर तरह स खल न जए जसस मर जभ खलन लग उसक सथ. मझ एहसस हआ क मझ नह पत क कस कस करन ह, मन तब तक उसक मरगदरशन कय लय मल गई और अब हमर जभ आपस म उलझ गई और हमन एक-दसर क चस रष... उनम स एक म मग न अपन चहर उठय और भवक चबन दख ज नह थ हम द रह थ, तभ वह अपन तरफ घम गय और हम दन क तब तक चमन लग क हमन हम तन क बच य वकलपक रप स चबन कय। वह बन कछ कह थड पछ भग और मर हथ पकड लय। सज गय लड, जब मझ उसक उगलय महसस हई त म उछल पड, जस पर कस क धयन नह गय मर छट बहन लल क लए, वह मझस अलग ह गय और उसक बह क हरकत दख बहन जब तक उसक नजर उस वयकत क हथ तक नह पहच जसन मझ मजबत स पकड रख थ लड क पकड कर धर-धर आग-पछ करत हए… उसन आख खल द। आख और मह आशचरय स लकन उसन कछ नह कह, बस दखत रह दशय। मग अब नयतरण स बहर ह गई, उसन उसक बल पकडकर उस नच गर दय उसक हठ क बच जभ उस एक बहत ह भवक चबन द रह ह। पहल त लइक कर उसन वरध कय लकन फर उसन खद क जन दय, आप दख सकत ह क उस यह पसद आय, जबक व व चबन कर रह थ, मन उसक दन नतब क फर स पकड लय और उनह अलग कर दय, उन पर अपन उगल फरई कस हई छट गड ज बल स घर हई थ। अचनक मग न मर लड छड दय और लल क हथ पकड लय उसन मर लड क तब तक पकड लय जब तक उसन मझ उस मजबत स पकड नह लय, उसन उस हलन शर कर दय। उस दखन क लए क यह कस कय गय और थड दर बद मन उस जन दय तक वह इस अकल कर सक। जर रखग। छट बचच न हम नरश नह कय, वह अपन हथ हलत रह लकन बहत धर-धर, मन मर लड क हर हसस क पहचन रह ह ज उस पल तक पहल ह तयर ह चक थ उस तरल पदरथ स नहलय गय... जबक उसन खश स अपन बहन क जभ परपत क म वसतव म उस कठन समय द रह थ... उस पल मन नयतरण ख दय, उसन मन लल क नतब क दबय और मग क पस स गजरत हए उसक एक सतन क पकड लय पहल उसक सखत नपपल पर जभ फरई, जब तक क मन उस अपन मह म नह डल लय, उस चसत रह नरश। उसक परतकरय ततकल थ, वह अपन छट बहन स अलग ह गय और मर जर स करह नकल... अहहहहहहहह.... अहहहहहहहह... यह मर कन क लए सगत थ कयक गन क लय बढ गई थ। तब तक चसन, जब तक जर-जर स उसक कठर, उभर हए सतन क न चसन... आहहहह... सइइइइइइ... आहहहह... बहत सवदषट... उसन उसक नपलस क जर स चस और कट, ऐस लग रह थ वशभत हकर, म पहल ह भल गय थ क व मर बहन थ, कयक लल क अलव मन अपन उगल क एक टकड उसक बद छट गड म डल दय थ... हम तब तक ऐस ह थ हमन लल क मर लड क छड बन कय कहत हए सन... -और म कय कर??? म मग स अलग हआ और उसक आख चमकत हई दख मझ समगर चहए, इसस पहल क वह जवब द मग न उसस कह... -यह आओ, उस चम, उसक शरर क चम, उसक छत क चम, उस चम आप जह चह... बस इसक आनद ल... यह इसस भ अधक मरदन चज ह फर म जत ह त म इसक आनद लत ह... ऐस लग रह थ जस वह बस इतजर कर रह थ क व उस बतए क उस कय करन ह कयक उसन ऐस नह कय। वह पहल करन चहत थ, लकन उसन अब और इतजर नह कय, वह एक तरफ खड ह गय और तन हम एक घर म खड ह गए, मन मग क आध सतन फर स अपन मह म डल लय मन वह मधर मखमथन फर स शर कर दय ज म उस दसर हथ स द रह थ मकत हकर मन उसक कड नपल क नचड, अब न कवल हम ठड थ बलक हम अपन उतसह स पसन-पसन ह रह थ। लल न पतर क अनसर वह कय ज उनहन उसस कह थ, वह मर गरदन क चमन लग जस उसन अपन बहन क ऐस करत दख ह, उसन अपन जभ मझ पर फर उसन गल चमबन दय जसस म सहर उठ, व मर कध पर ऐस ह चमत रह, मर बह, मर छत, मर पट जब तक क उसक नक मर बल म न दब जए। पयबस... उसन खद क नच कय और मर पर क चम, अपन जभ बहर नकल और मर सथ फरई मर सर बल. इस बच, मन उसक अमर और सखत सतन क खन जर रख मर छट बहन, ज खश स छटपट रह थ, अपन हथ नच करक अपन वमन क ओर दड। जब तक आप पट क रकष करन वल परचर घघरल बल क उलझन तक नह पहच जत उसक चत, मन उनक सथ खल, उनह अपन उगलय क बच उलझय और धर स मसल। उसक भग हए यन हठ. जब उस मर दलर महसस हआ त उसन मझ इजजत दत हए अपन टग खल द उसक सज हए हठ क बच एक उगल रख, बन डल ऊपर-नच रगड जब तक वह उसक भगशफ पलव स नह टकरई... बचर इस और बरदशत नह कर सक और वह आ गई मधर सवर म.... आहहहहहह…अगगगगगगहहहह…अहहहहहहहह…. म रक गय तक वह अपन सभग सख क आनद ल सक और मझ लल क एहसस हआ उसन मर लड क गल सर क अपन पर चहर पर तब तक रगड जब तक मन उस उस पर नह रगड हठ, अपन दसर हथ स उसन मर अड क बड खबसरत स पकड लय और उनह तल म सहलत ह, फर अपन जभ बहर नकलत ह और उस अपन चटल सर पर फरत ह, ऊपर क ओर जत ह हर सम और सर पर-कम अपन मह म ल रह ह। म इसक सवद चखत भ ह और नह भ यह अपरय थ कयक उसन उस चमन शर कर दय, पर टरक पर जकर। जब तक म अपन अड तक नह पहच जत; वह वस ह लट और अब उसन अपन खल दय छट मह और धर-धर उस अदर डलत हए, उसक चर ओर अपन हठ बद करत हए, वह शर हआ इस चसन और अपन जभ क तब तक घमन जब तक गत न बढ जए और मझ एक शनदर मख-मथन द लड क मझ सवरथ लग कयक मझ कवल आनद मलत थ, इसलए मन अपन लय कठर सतन ज उसक बहन स थड छट थ लकन उतन ह य उसस भ जयद सदर, लमब और बहत सखत, उनक तवच बहत गर थ और उनक नपलस बहत गलब थ, मन दन क अपन उगलय क बच लय, उनह रगड और तब तक दबय जब तक क उनहन अपन मह नह खल दय मर लड बहर नकल और आह… अहहहहहह… अहहहहहह…. अचनक मझ महसस हआ क एक जड सखत नपलस मर अदर दब गए ह। वपस, यह मग थ ज पहल ह अपन सभग सख स उबर चक थ और अब सकरय रप स भग लय। उसन मर गरदन क पछल हसस और मर पठ क चट, मझ उलझन महसस हई मर कलह पर घन बल हन क करण वह सज हई थ, मन लल क एक नपल क छड दय और मन उसक एक सडल टग पकड ल और उसन अपन मखमथन क गत बढ द, मन खश स उनह रगड और सहलय, खसकर यह जनत हए क पहल कभ कस न ऐस नह कय थ। बनय। म उसक जघ और उसक परचर जगल क जकशन पर पहच गय मर उगलय क बच लल घघरल बल आ गए, यह आग क टकड जस लग रह थ, मन जच क क व कतन मट और लब थ, उनह खचकर और खचकर लकन धर स. इन सबक बवजद उसन मझ चसन बद नह कय, अब वह एक वशषजञ क तरह लग रह थ, मग उसक बगल म खड ह गई और चक वह झक हई थ इसलए उसन उसक गरदन क पछ चम। वह करब आई और मर लड क उन हसस क चमन लग ज खल थ। लल क हठ. मन अपन सबस दखद सपन म भ यह कलपन नह क हग क मर द छट बहन मझ मर जवन क सबस अचछ लड चसव रह थ। लल न इस अपन मह स नकल और अपन बहन क दय, वह थ उसन तरत इस थड अनड तरक स अदर डल दय कयक उसन मझ अपन दत स घयल कर दय थ, उसन सधर कय। तरत और इस कवल अपन हठ स चस, जबक लल न खद क टरक और समरपत कर दय मर अड क. लल क कलह जस सथत म थ, उसक करण व ह गए थ मर चहर क बगल म, इसलए मन उसक सडल पर पकड लए और उनह अपन ऊपर रख लय। जब तक व दन कनर पर न ह जए, मन अपन उगलय उसक कमर क चर ओर फस द और मन उस अपन चहर क ओर नच करन क लए दबय। पहल त उसन थड वरध कय, लकन उसक तवर दखकर मग, कतन भवक ह, उसक एक नपल क पकडकर चसत ह जलन, जसक करण मर छट बहन क आरम मल और उसन खद क जन दय; अब ह जब तक उसक बल क घन जगल मर ऊपर न आ जए, तब तक उस अपन कलह क नच करन आसन थ। चहर, मन उसक जघ क चम, वह कमल और यव मस ज अभ-अभ जग थ सकस... म बहत दर तक ऐस ह रह जब तक क मन अपन जभ उसक बद जभ क बच स नह गजर यन क हठ, उनह बर-बर ऊपर-नच चलन, बहत थ गल, मन उनक अदर क गलब मस दखकर अपन उगलय स उनह अलग कय यन और शरष पर उसक सज हई भगशफ उभर हई थ जसक बर म बन सच समझ मह म ल ल. महहहहह… अहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह…। वह दहड और मर दलर स ऐठ गय, मन उस अपन बह म ल लय। हठ क तब तक दबय और चस जब तक क वह एक परचर सह शट म नह आ गय जसन मझ भर दय। परवह चहर. वह मर समन स गयब ह गय, जसक मन फयद उठकर उसक मह खल दय। झडय स घर उसक गलब गड क चमन और चसन क लए शनदर नतब लल बल... मझ लगत ह क वह अब इस बरदशत नह कर सक और उसन खद क एक तरफ गरन दय, ज मन मग क फयद उठय, ज मर लड क छड बन मर ऊपर वस ह खड रह, जस उसक पस थ। मजबत स पकडकर, उसन इस अपन बल वल हठ क बच स गजर जस क वह ह हसतमथन.... -म इस महसस करन चहत ह... म इस और बरदशत नह कर सकत... उसन मझस कह -यह बहत जयद ह, छट बहन, तमह बद म पछतन पडग मन उसस कह "नह...नह, म इस महसस करन चहत ह, भल ह यह थड स ह कय न ह," म जवब दत ह। -कय आपक यकन ह? "ह... ह... बलकल ह," उसन उस मसलत हए कह। -यह ठक ह, ऐस ह रह, मर ऊपर और जब तक तम नयतरण न कर कह कय आप चहत ह क यह आप तक पहच, कय यह ठक ह? -ह... ह... म इस नयतरत करत ह... वह थड और खड हआ और उस अपन भग हठ क बच रख लय। यन म, उसन उस गल-गल घमन शर कर दय, जबक वह ऊपर-नच ह रह थ और अदर डल रह थ बमशकल सर... मझ लगत ह क मन यह सब सतर अतरजञन क मधयम स कय, लकन म बहत अचछ कर रह थ. वह पहल ह सर स थड आग पहच चक थ जब उसन जन दय और अपन द डल दए मर सन पर हथ... -आप कय कर रह ह, आप फसल कर नच तक ज सकत ह द मन उसस कह, हम बहत चकनई वल ह -नह... मझ पत ह... मझ पत ह क कतन दर... तम रक... मझ मझ पर छड द मर दवर जवब दय जत ह यह दखकर क वह कतन दढ थ, मन उसक कलह क पकड लय और उस जन दय उस उस गत स चलन द ज वह चहत ह... -मर नतब पर... अपन हथ मर नतब पर रख... मझ सहलओ लल क तरह, आपन लल क सथ ऐस कह कय... म समझ गय क वह चहत थ क म उसक गड स खल, वह तभ स इस महसस करन चहत थ उसन दख क उसक छट बहन क इसम बहत मज आय, उसन उसक गल नतमब पकड लय म तब तक अलग हआ जब तक क मन अपन एक उगल अदर नह डल द और उसक तग छट गड क रगड दय, वह सकड गई। आग क ओर जसस उस मर लड क एक और टकड तब तक अदर चल गय जब तक क वह टकर नह गय। उसक वरजन हइमन क सथ.... अययययय… अहहहहहहहह… "अभ भ रह, तमह चट लगग... बहतर हग क म कद जऊ," मन उसस कह। -नह... यह खतम ह गय ह... आप हल नह... वह मर लड क अपन यनदवर क झलल स चपकए हए गल-गल घम रह थ, यह म जनत थ एक पल स दसर पल तक टटन ह वल थ...तभ मन लल क हठ क अपन हठ पर महसस कय मह और मर चहर क सचच पयर स सहलन.... "म तमस पयर करत ह... म तमस बहत पयर करत ह," उसन मझस कह। "म भ तमस पयर करत ह, बचच," मन उततर दय। "उठ और थड आरम कर," लल न अपन बहन स कह। -इसक अलव, आपन अपन चज पर उसक मह नह आजमय ह, यह शनदर ह उसस कह म उसक बह पकडत ह और उस ऊपर उठन म मदद करत ह... म उस बठत ह मर चहर क बच म टग रख और उसस कह क मर मह क पस आ जओ... उसन तब तक ऐस कय उसक बल मर मह म आ गए, मझ ऐस लग जस मर लड धडक रह थ, व पहल स ह धडक रह थ फट गय, मन हतश हकर मन उसक चत पकड ल और सचमच उस ख गय उस खश स चखन पर मजबर कर दय... अहहहहहह... अगगगग... बहत सवदषट... ऐस ह... अहहहहहहहह... मन उसक हठ कट, मन अपन जभ उसम दब द, मन उस अपन जभ स चद जतन गहरई तक जभ गई, मन उसक भगशफ क चस और कट... मझ लग फर कछ हठ मर लड पर बद ह गए... मन नच दख और लल क दख उस बतब क तरह चसत हए, मन उस दए जन वल मखमथन क बढ दय और मझ लग क म म भग...कस, मन अपन हठ हटय और कह... I CUM... I COOOO...RROOOOOOOO.... AHHHHHHHHHH.... लकन लल न मझ चसन जर रख त मन उसक मह म पन भर दय वरय, जस उसन नगलन क कशश क लकन पर नह नगल सक, मग न झककर ऐस करन क कशश क मर वरय क सवद चख, मर लड क और उसक हठ क कनर क चट छट बहन, तक कछ भ बरबद न ह.... वह बफकर रह और तब तक चसत रह जब उसन अपन हथ स हसतमथन कय त उसन इस मर लए सफ छड दय... मग वपस लट आई उसक चत क अपन हठ स चपक लय और जतन ह सक मन उसक चत क फर स खन शर कर दय। द रह थ, जबक दसर हसतमथन करत रह और मर लड चसत रह, त यह उनहन अपन इरकशन नह खय. मन कशश करत हए अपन दसर छट बहन क चत खन पर धयन कदरत कय उस वह सर खश दन क लए ज वह महसस कर सकत थ... और लडक न इस इसलए हसल कय कयक वह आग बढ मर मह पर मन मर चहर पर आन चहत ह, वह एक-द बर आय जब मन उसक चत क चस. अचनक मझ महसस हआ क बल क एक जल मर लड क घर रह ह और फर यन क हठ क गरम... लल ह थ ज मर ऊपर चढ गई थ और मन अपन लड उसक चत क अदर रगड... म अब उनह कछ भ बतन क लए वह नह थ, इसलए क म अपन मह म मग क चत और लल क यन क आनद लन क लए खद क समरपत करत ह मर लड पर और व भ बहत टइट थ... इन दहर अनभतय क सथ मझ सबस अधक खश महसस हई। नशवर, मझ लग क उनहन एक-दसर क गल लगय और ऐस बत कह रह थ ज म हसल नह कर सक समझ, चक मग क मट टग मर चहर पर दब रह थ... जस म लल क नतब क पकड कर सहलन और दबन म सकषम थ तब तक अलग ह गय जब तक उसक गलब गड उजगर नह ह गई... उस चसन बद कए बन मर दसर छट बहन क भगशफ... मन उसक झररदर गड पर अपन उगल फरई जब तक क वह जब वह और हल त मन उस अदर डल दय। जब मन थड और अदर डल त उसन खद क गरन दय और मझ ऐस लग मर लड उसक तग यन क तह तक चल गय, जसस उसक वरय तरत खरब ह गय। अपन बहन क हठ स दब हई चख सनकर... अययययययय.... अगगगगग... अहहहहहहहह... म सथर रह और मग मर चहर स उतर गई, इसलए म लल मर ऊपर गर पड और आख म आस लकर मझ चमन लग.. -म तमस पयर करत ह... म तमस पयर करत ह... अब म तमहर ह... सघ... यरयआआ... आहह... मग उसक पछ खड ह गई और उस हर जगह चमन लग। वपस जब तक वह उसक नतब तक नह पहच गय, जस वह बड पयर स चमत रह मन उसक हथ पकड लय और अपन उगल उसक गड स हट द... मन तरत उस अपन उगल स बदल द। तमहर.... मर बहन अपन छट बहन क गड म हसतमथन कर रह थ, वह उठ गई चहर और बहत सर हव खच लकन अपन शरर क हलए बन, उसन उस फर स हथ स पकड लय। नतब और मझ एहसस तब हआ जब उसन अपन उगल बहर नकल और उसक जगह अपन जभ ल ल... अब मग लल क गड ख रह थ... यह सबस अचछ थ, यह बहत अचछ थ... मर द छट बहन आनद क परत समरपत थ.... मझ कभ-कभ ऐस महसस हत थ जस म उस हसस पर अपन जभ फर रह ह जब वह बहर आय त मन अवसर क लभ उठय और हल ह म फल हए फल क भ चस लय उसक छट बहन क चत... लल न हरकत करन शर कर दय और मगई न उसक नतब क पकड लय और मन गत बढत हए उनह उठय और नच कय, जब तक हम रक, मन गत बढन शर कर दय हम पगल क तरह चल गए; म उसक चत म छद कर रह ह और वह उस उसम दफनन क कशश कर रह ह जतन म कर सकत थ उसस अधक गहर। वह कई बर आय जब तक म बड बझ लकर नह आय। सह शट, उसक बलल वरय स भर गई, जस मर दसर बहन न बरबद नह कय, तब स उसन ननह लल क यन स नकलन वल लगभग हर चज ल ल। मझ नह पत क कतन समय बत गय, लकन मझ लग क लल अपन घड स गर गई ह। म, धर-धर अपन लड बहर नकल रह ह... और जतन ह सक लट सकत ह... मझ लगत ह क वह म परयस स स गय. दब-दब चख स मर नद खल गई और मन अपन सर उठय। वह... मन दख क छट लल क चहर उसक मट टग क बच फस हआ थ उसक बहन क. जब उसन मझ दख त उसन मझ बतय क मग बहत ठड थ और वह नह थ उसन उतन ह आनद लय जतन उसन कय.... -चत न कर, आप जर रख, कयक यह एकमतर रसत ह अदर जए गरम मन उततर दय मन दख क मग कन म फल हई थ टग खल हई, अपन छट बहन स मखमथन परपत करत हए, उसक सतन क मसलत हए... मर लड न तरत परतकरय क, म उनक पस गय और फर एक हथ उसक सतन स हटओ, अपन जभ बहर नकल और उसक झररदर नपल पर हथ फर मन उसक अधकश चच क अपन मह म डल लय, मन उस खब चस और उसक खबसरत नपल क पयर स कटत हए... वह मझस बहत जयद उततजत ह गई थ मह और मर छट बहन दवर दए गए मखमथन स... म कप रह थ, लकन ठड स नह बलक जश स, उनक करण उसक खबसरत शरर क मल सवदषट अनभतय... लल मर पस आई और मन पयर स उसक कन क चम, मन फर उसक तरफ दख और उसन अपन जभ मर मह म डल द, थड दर चमत रह... व अलग हआ और मझस बल... -अब उसक लए... उसक लए... उस एक ऐस महल बनओ ज इस और नह सह सकत... बन उततर दय मन मग क टग खच और फसल गय दवर क सथ-सथ जब तक वह फरश पर लट नह रह... मन अपन लड उसक बच स गजर यन म पन भर गय और सर उसक हठ क बच सम गय.... म तब तक रक रह थड दर बद वह अकल ह हलन लग, धर-धर मर चट म आ गई तब तक सर हलओ जब तक म उसक पतल हइमन पर न आ जऊ... उसक दवर बनए गए चहर क दखकर, लल, ज पहल स ह जनत थ क कय ह रह थ, नच झक गई उसन तमह चसन और उसक सतन मसलन शर कर दय, मन उसक एक हथ पकड लय और उस मसल दय जब तक मग फर स आह भरन और हलन-डलन न लग, तब तक उसक भगशफ क कमलत स सहलत रह, मन उसक भगशफ क छड दय, उस खन बद कए बन उसक एक नतब क पकड लय और सहलय सतन और उसक सज हए नपलस क कटन... यह मग क लए बहत जयद थ, मझ लग उसन अपन शरर क सकड लय और करर तरक स वरयपत करत हए चललय... अहहहहहह... अहहहहहह.... एजजजज... असIII... महहहहह... इसक करण उस अचनक अपन शरण ऊपर उठन पड मर लड उसक हइमन क छद कर पर तरह स उसक चत क दवर क बच दब गय थ। मझ महसस हआ क व मर लड क कस दब रह थ कयक यह कतन टइट थ... अययययय....अयययययय...ओओओओओओओजजजज... एजजजजज.... लल न उसक दरद भर चहर दखकर फर स अपन चहर उसक बच रख दय। उसक खल नतब क चटन और उसक गड क फर स चसन, जबक वह सहलय... यह उस टरगर क तरह थ जसन मग क परतकरय करन क लए पररत कय उसन मर मह पकड लय, मझ एक जबरदसत चबन दय, जबक उसन मझ हर जगह सहलय। शरर, म उसक मलदवर क अपन नतब तक ल आय और जस उसक छट बहन न मर सथ कय थ म जश स पकडत और पकडत ह... हम अलग हए और मझ फर स उसक सतन स पयर ह गय, उनह चसत हए। और उनह बर-बर स कटत हए खद क रगडत हए गल-गल घमन लग उसक यन क दवर क मधयम स पर लड ज अदर गहरई तक दब हआ थ व बहत धर-धर ऊपर-नच हन लग... मझ ऐस लग जस मर लड भग गय ह चपचप और गरम तरल पदरथ, जब म गत पकडत ह त लल क चहर उसक चहर स हट दत ह मर गतवधय क नयतरत करन क लए उसक नतब क कस कर पकड लय, इसलए मन उसक हरकत म उसक सथ दन शर कर दय जब तक क उसन मझ पर नयतरण नह कर लय आकरमण. लल अब बन कस कररवई क मर बगल म बठ कर सपरभ क दख रह थ बकवस वह अपन बहन क द रह थ और सहज रप स उसक ऊपर एक हथ रख दय उसक गल चत क कमलत स छत हए। इस पर कस क धयन नह गय मर लए, बचर भ कररवई चहत थ, इसलए मन उसस कह... -आओ अनमल, आओ... मर चहर पर बठ, म करग कम...और ह कय आप मग क सथ दलर और चबन करन चहत ह तक आप ऐस न कर शत ह जओ... उसन मझ उततर नह दय, उसन वह कय ज मन उसस कह थ, इसलए वह बठ गय। मर चहर पर और उसक बहन क चत क पप करन बद कए बन, मन उस खन शर कर दय परचर मतर म बल क लल उलझन स सरकषत उसक दवय बलल... व उनहन गल लगय और सचमच अपन मह ख लय... हम तन ऐस चल गए हम दसर क सबस बड खश दन क कशश कर सकत ह... हम दन करब आध घट तक ऐस ह रक रह व कई बर आए, अपन लब समय तक सभग सख क आनद लत हए, उनम स एक न मझ नहलय लड और दसर मह... चक मझ अपन अग म जबरदसत मतर म महसस हआ उनक यनय स चपचप दरव बह रह थ... म अपन घषण करत हए ऐठन लग मग क चरमतकरष क एहसस हआ कयक उस लग क मर लड और भ अधक फल गय ह उसक फल हई चत म गहरई तक, एक आखर धकक म इतन अधक परयस करन पड उस पर हमल कर और उस लगभग फरश स उठ द कयक उसन अचनक उस दफन दय थ म भग.... यआआ... यआआ... म झड रह ह... अपन वरय क महसस कर रह ह... आहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह.. मझ लग, म सचमच इतन उतसह स पगल ह गय थ म डब रह थ कयक लल, अपन आखर सभग म, मर चहर पर गर गई थ। उसक चत क अपन नक म दब कर, म अपन चहर कस लट सकत थ और सस ल सकत थ गहरई स... इस तरह हम 10 मनट तक रक रह... जस मर गए ह, ठक ह सचमच खश स मर गय.... लल न खड हन क कशश क, लकन मन उसस कह क नह, हम हम तन ऐस ह रहग, कयक हम ठड कम लगग.... हमम स कई नह मन वरध कय त मन अपन लड मग क चत म ह दब कर रख लल क सडल टग और चत मर चहर पर, हम एक दसर क सहलत और गल लगत ह टग, बह, सतन, यनय और लड क एक जल बनत हए... सब कछ पर तरह स जब तक हम स नह जत तब तक आपस म जड रहत ह। सपन क बच मझ हलचल महसस हई और टकरकर मन अपन आख खल घन घघरल बल क लल बल वल जगल और मर खल हई चत स भर हआ छट बहन मर चहर स चपक हई थ, मन उस हलत हए उसक कलह स चपक लय मन अनजन म अपन नतब क सकड लय और मर लड क सर थड स फल गय, मझ एहसस हआ क म अभ भ अपन छट बहन क चत क अदर थ मग... भगवन क लए मन सच क मन सपन म नह सच थ क यह सब हआ, यह सच थ, मन उनस चदई क द.... म यह अनमन लगन क कशश म वचरमगन रह क उसक कय हग। मन परतकरय वयकत क और सभ सभवनओ क बर म सच और परतयक क लए मर परतकरय कय हग। उनम स एक... बन एहसस हए मर हथ पहल स ह गल क रगड रह थ मर छट बहन लल क नतब, लकन वह हल नह, वह अभ भ स रह थ... यह सच रह थ अब पछ मडन सभव नह थ, मन अपन चहर थड स घमय और मर नक उसक चत म चल गई। मर छट बहन, मझ लग क कस मन उस गल कर दय ह, डसचरज स य अपन वरय स नह, लकन नह। हम जस तरह थ, उस म तडन चह सकत थ य नह चह सकत थ, जस क कवल सच ह ज सकत ह। हम वह सब कछ यद ह ज हमन कय थ और उसक नतब और चत क रगडन थ मर चहर पर अकत, यह मझ उततजत करन लग... इतन क मर लड बच क रसत ढढन लग मर छट बहन मग क यन क दवर.... उनम स कई भ नह हल, इतन रगणत स मन अपन आप स कह क शयद यह आखर बर ह जब मझ ऐस करन क अवसर मलग उनक सथ रह... इसलए मन अपन जभ नकल और बच-बच म कई बर उस चलय लल क लग स उभर हए लल बल जब तक उसन अपन हठ क बच नह रख यन, उस एक वसतवक मख-मथन दन शर कर रह ह, जबक मर लड नह द रह ह यह मर दसर छट बहन क यन म तब तक बढन बद ह गय जब तक यह पर तरह स वकसत नह ह गय अदर खड हन. म नह जनत क दन म स कसन पहल परतकरय वयकत क, कयक मन मर धयन लल क चत क खन और धर-धर खद क चदन पर थ मग... सच त यह थ क मन उन दन म सहमत ह गई ह व मर चहर पर और मर लड पर घमन लग.... म यह सच कर रक रह जब व स रह थ त यह एक समनय परतकरय थ... लकन नह, ऐस नह थ कयक लल क चत इतन फल गय थ मन जसक फयद उठय, उस अपन चहर पर छप लय और अपन जभ क जतन सभव ह सक उतन अदर तक घसय, जब उस यह महसस हआ त वह कप उठ... उस तज सकचन भ महसस हआ मर लड पर मग क चत, जसस पषट ह गई क व दन पहल स ह जग रह थ... हम कछ दर तक ऐस ह चलत रह और मन अपन छट बहन क गर नतब क छड दय और उस पकड लय मट जघ स और मन उसस कह... -उठ मर जन, म बहत सनन ह... उसन अपन एक पर उठय और मर बगल म बठ गय, अब मन उसक पर दख खबसरत नल आख मझ घर रह थ, म उसक नजर क रक नह प रह थ कयक मझ मग क शरर म हरकत महसस हई त मन उसक तरफ दख और उसन भ मझ दख लय। अपन कल आख क फलकर घर रह थ, मन मर कछ कहन क इतजर कर रह ह... म आध बठ गय और उसक कध क पकड लय और उसस कछ कहन ह वल थ, लकन व आख न मझ महत कर लय, मझ अपन छट बहन क लए कमलत और पयर महसस हआ; त इसक बर म सच बन मन उस अपन ओर खच और उसक हठ पर पयर स चम, वह उछल पड लकन फर उसन मर चमबन क परतउततर दय ज सकषपत थ, उसन सहजत स अपन आख मर दसर ओर लय छट बहन जसन हम दख त मन चकत ह गई और उसन मर हथ बढय और मर उगलय उसक बच रख द हर-भर लल बल, मन उस अपन ओर खच और पयर स उस चम भ... म और अधक पयर स सचत ह... उसन धर स अपन जभ उसम डल और उसक जभ क चस अधक जनन, मझ लगत ह क मन ऐस इसलए कय कयक म सबस छट थ य कयक मझ यह वसतव म पसद आय। म और अधक आकरषत ह गय... तभ मझ लग क मर लड मर यन स बहर आन शर ह गय ह। जब तक मग पर तरह स बहर नह आ गई, मन इस पर तरह स खड कर दय, सवरग एक और यन यदध क लए तयर... मझ एहसस हआ क मर द छट बहन क आख थ मर बहद सखत लड पर लगभग बन पलक झपकए कल ठक द, तभ मन इस बत पर धयन दय उसक शरर पर वरय और खन क नशन थ... मन बरफ तडन क लए, मन उनस कह क सभ परष सन क बद हम ऐस ह वरन ह गए, कयक रत क सर पशब जम ह गय थ। मन उनस कह क म पशब करन ज रह ह और दखग क बहर कस महल ह। जस ह सक, मन उठ कर दख फरश पहल स ह सख थ कयक सर पन लकड स रस गय थ। म एकमतर दरवज तक गय और अफसस क सथ दख क पन बहत ऊपर बढ गय थ, यह उस कबन स लगभग 15 मटर क दर पर जम हआ थ जह हम थ, मन एक गहर सस ल। और मन उनक सथ नरशवद न हन क नरणय लय तक व भयभत न ह, लकन हककत त यह थ क इस तरह पर करन मशकल हन वल थ, खसकर नव क करण यह कह दखई नह द रह थ और अनमनत कनर भ अब दखई नह द रह थ, कवल पन और बहत कछ। पन... अब हम एक बड लगन क बच म थ। मन पशब कय और दख क सरज पहल ह उग आय थ। पन दरज कर म अपन वचर क वयवसथत करन क कशश कर रह थ और मन अपन छट बहन क एक-दसर स चपचप बत करत दख व। कछ शरम क सथ म उनक पस गय लकन अपन खन क ससज क ढक बन। लड, हलक खड नह थ लकन कफ आकर क थ। -तमह कस लग रह ह... कय तम ठक ह? उनहन मर आख म दखन क कशश क लकन उनक नजर दसर ओर चल गय मर अरध-खड लड क ओर। मन अपन चहर ऊपर उठय जस क और अधक खचन चहत ह, लकन यह मन ऐस इसलए कय तक व मझ आजद स दख सक, म ऐस मड जस क कछ ढढ रह ह और उनह अपन महनत दखई नतब न इतन खल स हसल कय। उनक पस लट और उनह बतए क कपड नह ह म शयद इस फरश पर छडन ज रह थ कयक पन इस खचकर ल गय थ, लकन म बहर जऊग और उस ढढग, यह दखन क लए क मर कसमत कस ह। दन न अपन पर फलए हए थ और उनह गल लग रख थ, मझ शरम आ रह थ क मन उनह नगन दख। मग सबस पहल कछ कहन वल थ... -मझ भ पशब करन ह... -कद और वह कर, बस सवधन रह क फसल नह... वह खड ह गई और उस समझ नह आ रह थ क वह अपन कठर सतन क कस छपए मर पर क बच घन कल बल थ। म जतन तज स चल सकत ह चलत ह कर सकत थ और बहर आ गय, म लल क पस गय और उसक पस स गजरत हए उसक बगल म बठ गय उसक नजक चहर पर पयर स अपन हथ फरत रह, जब तक क मन उसक लल बल क सहल नह लय। उसक बल क बल, और मन उसस कह... - चत मत कर छट, सब ठक ह जएग... तम भरस रख मर? मन दख क कस उसक बड-बड आख आसओ स भर गई... मन उस गल लग लय। और उसक मथ क चम, जस उसन कई बर कय थ। जब मन उस जयद मर त मझ लग उसक कठर नपलस मर छत स चपक हए थ, मन दखव कय क मन धयन नह दय और मन नटस करन शर कर दय कमलत स बल, जस म उसक बड भई ह ज उसक रकष करन वल ह परवह... -अब मर जन, शत ह जओ... महतवपरण बत यह ह क हम सथ ह और इन सब म हम इस हल करन ज रह ह, म आपक वफल नह करन ज रह ह, आप बहत अचछ तरह स जनत ह क कतन मझ तमस पयर ह -कय तम सच म मझस पयर करत ह? उसन बन ऊपर दख मझस कह -बशक म तमस पयर करत ह, म तमस बहत पयर करत ह छट बचच... तम मर ह पज करन... हम बत करन जर नह रखत कयक हम मग क कदम क आवज सनत ह वह वपस आ गई, वह शत ह गई, खद क ढक बन और वह पर तरह स अदभत लग रह थ दन क उजल म नगन, लहरदर, कल चहर क सथ वह सदर लग रह थ बखर हए बल, उसक सध छत न उसक सथ-सथ गरतवकरषण क भ चनत द छट नपलस, उसक सपट पट और छट कमर, एक शनदर जड क सथ दढ एव सडल जघ जनम स परचर तथ क घन झडय उभर हई थ घघरल कल बल, मर छट बहन एक असल महल थ... जस तरह स मन उसक परशस क, लल न दख और चपचप कह... -मझ भ पशब करन ह... "चल, मग जस ह कर, आग बढ और कर," मन उसस कह। "मझ डर लग रह ह," उसन मझस कह और पहल बर उसन मझ घरकर दख। आख -चल, म तमहर सथ चलग, ननह... चक मग पहल ह हमर बगल म बठ चक थ, जब म म खड ह गय, मर लड उसक चहर पर लगभग उछल गय, जसस उसक मह खल रह गय। चक यह कवल कछ सम क दर पर ह। मन लल क हथ पकड कर खच लय जब तक वह खड नह हआ, हम बहर नकल गए और मन कगर क लए शरष पर दख इतन घस क बन... -आप यह कर सकत ह, मन उसस कह वह वह बठ गय जह मन उसस कह थ और पशब करन लग कयक वह सन रह थ। उसक दवर क गई फसफसहट क आवज स मन सन क उसक पशब नकलन बद ह गय, लकन वह अदर ह रह वह सथत... -कय गलत? मन उसस पछ। -मन खद क नह सखय...वह, तमहर पस कय ह? म आशचरयचकत ह -नह, मर पस कछ भ नह ह, सवय इसक क सब कछ गल ह... "अब कय कर?" उसन कह। -अचछ, ऐस ह रह... य अपन उगलय वह फरओ... -मन उनह गद कर दय ह... लकन इसक बर म सचन क बद, उसन ऐस कय। वह उठ और मर ओर आय, हम मग क पस लट ज शत थ बठ, हमन भ यह कय... जब हम तन एक सथ थ त मन उनस कह... -दखए, सथत कछ जटल ह, फलहल त आज क दन ज रह ह कठन हन हम यह स नकल सकत ह, वह बहत जयद पन ह और बहव भ ह बहत म मजबत, इसलए म खद क ठड स बचन क एक तरक ढढग पहल रत ह गई... कयक मझ हमर कपड भ नह मल सक... चहन क हम हर उस चज पर टपपण करत ह ज हमर सथ छडन क लए घटत हई ह चज सपषट ह... जब तक आप भ कस चज क बर म सचत ह और बहर जए तक सरज क रशन आप पर पड, यह आपक लए अचछ रहग। उसक परतकरय क परतकष कए बन, म खड हआ और कबन स बहर चल गय, मन फर दख क सब कछ जलमगन ह गय थ, झल क समनय चडई लगभग 300 मटर थ अब यह लगभग दगन चड ह गय थ, इसन दवप क कछ हसस ख लय थ दसर कनर म पन क कनर-कनर कस ऐस चज क तलश म चल ज हमर लए उपयग ह, लकन कछ नह, म आग बढत रह और दख क दसर तरफ नव बच म फस हई ह वनसपत; मझ रहत महसस हई, कम स कम हम आज बहर जन क सभवन पहल स ह थ वह स वह. मझ यह भ यद आय क मर शक म वह भ शमल थ ज मन सख थ। जब म बचच थ त म एक "बय-सकउट" य खजकरत थ, और चक मझ वह जन बहत पसद थ पहड म, उस कछ रणनतक सथन पर बचत करन क आदत थ जस क मन उनह उततरजवत भडर कह थ... मझ वह भ यद ह मर दसत न एक बर मझस कह थ क यह मर पस क बरबद करन जस ह कयक कई उनह ढढकर ल ज सकत थ; इसलए म हमश उस जगह क तलश म रहत थ यह लगभग छप हआ ह और मझ यद ह। म खश स भर गय कयक कछ समय पहल ह मन दवप छड दय थ। समय मर "आरकषण"... मन उस सथन क पत लगय और जनत थ क यह बड चटटन स थ कबन क दश म लगभग 17 कदम, मन जलद स उनह गन और खश स दख म सह थ, वह पन नह थ, मन कछ पतथर रख दय इस चहनत कर और इसक सथ कछ करन क तलश शर कर, मझ कछ मट शख मल और मन पततय तड, दडकर नशन मटय, जतन तज स म कर सकत थ खद और पय बकपक लगभग 30 सम दर थ, सथ ह जमन ढल थ। एयरटइट पलसटक बग क बहर नकल, उनम स एक "ईट" वल जब आप इसम अपन उगलय चलत ह और जह बकपक थ, त व आर क तरह सल ह जत ह। मन जच क क सब कछ सह थ कयक इतन पन क बवजद बकपक बच हआ थ अचछ तरह सरकषत थ और सख थ और खरब नह हआ थ। मन बकपक खल कयक मझ यद नह थ क मर पस कतन थ रख, मर पस बनयद चज थ: लइटर और मचस, एक उपयग चक और एक बड शकर चक, एक पलसटक बलट, पन क लए एक कटन, 3 पन क बतल, सख अनज क 6 पकज, ककज, 3 फलझडय, 2 सम क डबब और टयन क तन डबब और एक छट परथमक चकतस कट। म लट आय सब कछ बकपक म रख और कबन म लट आए। जस क मन उनस कह थ, मन उनह धप सकत हए पय, जब उनहन मझ दख त उनहन मझ दख उसक आन तक उनहन अपन नगनत आध ढक हआ थ। उसक पस ज बगपक थ उस दखकर वपस, उनहन पछ.... -तमह वह कह स मल... मन बतय क मर पस वह कय थ और उनहन कह... -आप बलकल महन ह... सरहनय... आप हर चज क बर म सचत ह!!! -सचचई यह ह क मझ नह पत थ क यह कभ मर लए उपयग हग य नह और मझ आश थ नह, लकन आप नह जनत क म सभ क शकषओ क कतन सरहन करत ह वह असततव उनहन मझ मर अचछ सकउट मतर दय। -इसक अलव, मर पस आपक लए बहत अचछ खबर ह... -कन स...!!! कन स ह... हम बतओ... कन स... -मझ नव कनर क दसर ओर मल, त उसक बद कस बर म खओ, म उस लन जऊग... -लकन आप हम अकल छडन ज रह ह... और अगर आपक कछ ह गय... नह... नह बहतर जओ चल सब चलत ह... और बहन न तरक दय। -बस, यह चरच क वषय नह ह, मन आपक रय नह पछ, म व ह सचत करन क कय कय जन वल ह और बस!!! कय यह सपषट ह?...और म रहन उनक आख म दखत हए... -यह ठक ह, उन दन न कह। "अब दखत ह हम इसम स कय ख सकत ह," मन उनस कह। पन, अनज, ककज, बनस और टन नकल ल, मन समपत तथय क जच क और दख क हम उनह खन क समय पर थ... मन हमस कह क हम परवश दवर पर सढय पर जए और वह खल म बठ परतयक चज म स एक और मन उनस कह क जब तक म रक, व ख ल खड हआ; मझ हस आई जब मझ यद आय क व कतन नकचढ और मग करन वल थ। व भजन क सथ घर पर थ, लकन यह और अभ उनहन इस ऐस खय जस क यह थ दनय क सबस अचछ वयजन, मन उनह कवल इसलए थड पन पन क लए कह थ अब और कछ नह थ; मन उनह फर स हर चज क एक और हसस दय और उनहन इस खरच कर दय। -और तम खत कय नह? छट लल न पछ। -अभ नह, मझ नव लन क लए तरन हग... - कम स कम पन त प ल न? -बद म, शयद आपक इसक आवशयकत हग, मन उततर दय -लकन अगर 3 नव ह, त यह उचत ह, अब हमर बर ह!!! चख -मर तरक स नह, शयद बद म। पहल मझ यह दखन हग क यह कस ह नव... लल न मर और उसक आख म दख आसओ स भर कर, वह उठ खड हआ और अपन आस छडत हए मझ गल लग लय... -तमह कय ह गय ह, कइकवट, तम कय र रह ह? -कयक आज मझ एहसस हआ क तम हमस कतन पयर करत ह.... सघ -म उनस पयर नह करत, म उनस पयर करत ह और म उनक पज करत ह कयक व मर छट बहन ह। और तमहर लय "म अपन जन ह द दग," मन पर दल स जवब दय। -रल... ज कछ भ पहल ह घटत ह चक थ उसस मर सर चकर गय थ व म मझ यह बहत पसद आय और मझ डर भ लग, लकन अब दख रह ह क आपक कय हल ह।' वयवहर कय आपक जवन क उजगर करन क हद तक हमर सथ... कछ भ नह यह मयन रखत ह, म चहत ह क आप जनत ह क म आपस एक भई क रप म बहत पयर करत ह, लकन म आपक पज भ करत ह मझ तमस पयर ह एक आदम क रप म... म तमस पयर करत ह... म तमस पयर करत ह और मझ कस बत क अफसस नह ह कन हमन कय, इसस भ बड बत यह ह क म इस हमश तमहर सथ करन चहत ह... तम मर ह आदम... म अवक रह गय और सब कछ हन क बद उस रत हए दख रह थ उसन कय कह और मन मझ अपन शबद दखन क लए, उसन मर शरर और मह क पकड लय, मझ पर समरपण क सथ सबस भवक चबन दय, बन यह सच क मन इसक जवब दय। उसक लब जभ क ख रह थ और उस नतब स तब तक खच रह थ जब तक मझ महसस नह हआ क वह कस थ उनहन अपन कठर नपलस मर छत स चपक दए, यह सबस गरम चबन थ ज मन कभ महसस कय थ। मर जदग म उसन मझ दखय और अपन सर पयर मझ दय.... जब हम अलग हए त मन दख क सबस बड मग अपन सथ हमर ओर दख रह थ मह और आख खल क खल रह गई जस क उस वशवस ह नह ह रह ह क कय ह रह ह... बन जन दए छट लल, मन अपन दसर बहन क ओर दख और उसस पछ... -और आप इस सब क बर म कय सचत ह... -म... ठक ह, मझ लगत ह... सच त यह ह क मन सच थ क यह थ क बत परसथतय और हम इसक बर म वस ह बत करग जस आपन कह... कयक तमह यद हग क हम दन कवर थ और बन कस अनभव क, लकन तक सन और दख क लल न आपक रवय पर कस परतकरय वयकत क ह... मझ लगत ह क वह बलकल सह ह... मझ यकन ह क हम उस कभ नह ढढ पएग। कई नह वह मनषय ज हमर लए अपन जवन दन म सकषम ह और वह... वह ह पयर क सबस अचछ सबत ज एक औरत क दय ज सकत ह!!! -त, म चहत ह क आप जन क म भ बलकल वस ह सचत ह यह क वह, कवल अगर म ईमनदर हत त मझ नह पत क म कर पत य नह आपक बतए और मझ लगत ह क आप भ ऐस नह करत, कयक जतन अधक हम बढत ह, उतन ह अधक हम जटल बनत ह चज... दसर ओर, लल, मझ लगत ह क कयक वह छट ह और मसम, उसन इसक बर म नह सच और उसन ज कछ भ तमस कह, उसन अपन दल तमहर समन खल दय, बन सच समझ नतज म... लकन म भ तमहर बनन चहत ह, य क अपकष क तम भ मर आदम ह य य कह क दन क.. व आप बतओ???? मन महसस कय क लल क उगलय मर लड क पकड रह थ उसन अपन छट स चहर मर कध पर झक दय... "त, आप कय चहत ह क म आपक बतऊ, बस दख क उसन मझ कस पकड लय ह।" मन जवब दय -यह सबस अचछ सबत ह क वह झठ नह बलत और म भ झठ नह बलत... और रखन पर हमर ओर बढ रह ह... वह मर चहर अपन हथ म लत ह और मझ पर पयर स चमत ह ज जश एक औरत अपन मरद क द सकत ह, उसन मझस अलग हकर दख छट बहन क आख म और वह चबन दहरय ज उसन मझ दय थ, जब वह अलग हआ त उसन फर कह... -म उनस पयर करत ह और म उन दन स पयर करत ह, व मर परवर ह, व मर जदग ह और म उनस पयर करत ह अपन पर आतम क सथ, हमन खद क भइय और भइय क रप म समरपत कर दय ह परम, इसलए म नह चहत क यह यह खतम ह जए जस क यह ह चक थ ए रमच... म उन दन क, अपन द परमय क पन चहत ह म जर दत ह लल न मर लड क दबय और अपन दसर हथ स उस गल लग लय. बहन, हम तन भईचर स बढकर गल मल रह ह... उनहन मर ख लय चबन क लए चहर और फर उनहन एक-दसर क फर स चम... व अलग ह गए और उनहन मर आख म दखत हए पछ... -आप कय सचत ह, कय आप सहमत ह? आपन कछ नह कह... -म नह जनत क कय कह... उनहन मझ नशबद कर दय ह सभ क मझ बतय गय ह... लकन ईमनदर स कह त, म बहत परसनन महसस करत ह और आपक शबद स धनय ह क म आपक बत सकत ह... क म आपक बत सकत ह चरच करन, सच त यह ह क एक परष क रप म म भ उनह चहत ह और महसस करत ह वह यह जनकर सबस जयद खश हई क व द महलए और अधक म पयर करत ह व मर शरर और आतम स मल खत ह... और म उनह चहत भ नह थ। खतम करन एक सहसक करय क तरह, लकन म उनह अपन पस नह रखन चहत परम... म हमश उनह अपन महलओ, अपन सदरय क रप म रखन चहत ह औरत... -ह... ह... व एक सवर म चललए... मझ चमन क लए आग बढ मह स जड और एक और छत य जह भ उनहन सच... यह बन रक मर लड क रगडन स... म उनस सकरमत ह गय उसन उनक खबसरत शरर क रगड और सहलय, चट और चस। दन क सतन और मह क बर-बर स, जब तक मझ नह मल ववक... मन धर स उनह अपन स अलग कय और उनस कह... -शत ह जइए, आइए शत ह जइए... अब सबस पहल आग बढन ह नव इसस पहल क फर स अधर ह जए य धर उस बह ल जए, इसलए मझ यह बतओ और म उसक लए ज रह ह तक ज मर सथ हआ वह दबर न ह। कल रत मन कह लल न अपन आख स कह, "लकन म चहत ह क इस दहरय जए।" खल, मन मसकर कर उततर दय -ह, म भ चहत ह... लकन यह नह... अभ अलग मत हन म वपस आ गय ह परतकरय क परतकष कए बन, मन उनक हठ क फर स चम लय, म अलग हआ और झल क ओर चल गय... मन कछ कलसथनकस कय और उसम कद गय वह। पन बहत ठड थ, इसलए बड-बड छट पडन लग। जब तक हम रकरड समय म नव तक नह पहच गए, म उसम चढ गय और खश क सथ मन दख क चपप वह थ, मन अपन सर हलय और उनह ढढन क लए बहर चल गय... म उनक सथ पहच उनक पस मर तरन स तन गन अधक समय थ कयक करट मर अदर थ इसक वपरत, मन उनस बकपक और उस पर चढन क लए कह, और उनह दसर चपप द दय तक म ऐस कर सक मदद, यह लगभग अनवशयक थ, कयक धर क पकष म हन क करण वयवहरक रप स मन ज कय वह नव क उस कनर क ओर नरदशत करन थ ज हमर लए सबस उपयकत थ। यह अनकल ह हम पहच और हमन मलकर नव क उठय और जतन सभव ह सक उस सफ कय। जतन ह सक और हम घर क ओर चल दए, सब कछ ह गय कड-कचर, सडक नह थ, सब कछ पन म डब हआ थ और कचड स भर हआ थ, इसन हम लल लय हम लगभग द घट तक बन यतर और गरवट क पहच, सबह क लगभग 2 बज चक थ। दपहर क, परवश दवर स कछ मटर क दर पर म रक और उनह दखन क लए मड, व ऐस थ मझस 15 मटर क दर पर, मन अपन बह खल और व हम गल लगन, चमन और दन क लए मझस मलन क लए दड हम जशन मनत हए उछल पड क अब हम सरकषत ह। हम अदर गए और मन उनस सनन करन और कपड पहनन क लए कह। मन व सहमत ह गए थ, उनहन मझस कह... -नह, छट, अब स हम तन नहएग!!! हम बथरम म गए और अचछ स नहय. हम मज आय सवचछ रहन क तथय, तभ मझ एहसस हआ क जब आपक पस कय ह त उसक महतव नह ह सब कछ हथ म ह... सकषप म, उनहन मझ सबन लगय और मन उनह, अधक दखभल करत हए सबन लगय उनक बल वल चत म और व मर लड म। जब हमन समपत कय त म एक क सथ थ चपयनशप इरकशन और व बहत उतसहत थ... हम सख गए और म अपन पस गय कमर और मन उनह मर पछ आन क कह, म उन दन क सथ सकस करन चहत थ। लकन मग न दखय क वह कतन परपकव ह, कयक उसन मझस कह... -नह मर बचच, पहल त तम बहत अचछ खओग कयक तमन नह खय कशश क कट, बक लग इतजर कर सकत ह, कयक हम जन क यजन नह बनत ह; इसलए वह जब तक हम आपक लए खन बन रह ह तब तक आरम कर... म बसतर पर लट गय और स गय, मझ नह पत क कतन दर तक। समय... जब म उठ त मन दख क कछ सपषटत थ और मन सच, अर यह त ह गधल बल; मन भजन क तलश क, लकन वह वह नह थ, इसलए म उठ गय। और म रसई म गय, कछ भ नह, वह कछ भ तयर नह थ... मन बरतन और बरतन खल दए। और उनम स एक क ढककन बहर कर दन वल आवज करत हए गर गय.... मन खद क कस। कयक म कतन अनड थ और मन सचन शर कर दय क खन क लए कय बनय जए... म यह कर रह थ, तभ मर बहन मग वह ट-शरट पहन हए दखई द यह नभ स थड नच तक पहच गय... त यह ह सडल टग और उस पर परचर कल बल क घन जल दशस कण। मर लड तरत रक गय, तभ मझ एहसस हआ क म अभ भ रक हआ थ पर तरह स नगन हकर, म अपन लग क छपन चहत थ, लकन मर बहन न मझस कह... -अब मझ शरमद मत कर, ठक ह? मन उस दखकर मसकरय और अपन हट द हथ -मझ आपस उममद नह थ, मझ मफ कर दजए, म स गय और मन दख क मझ पहल स ह पत ह यह रतर उततर बनन -शम??? मर दवर जवब दय जत ह -हहहह... हहह... रत... हहह -अर कय हस रह ह, कई बत नह, म स गय, बहत थक गय थ और मझ म भख स मर रह ह - मन उततर दय -ओह मर जन, मझ तम पर वशवस ह, कयक तम मत जस लग रह थ, लकन म दख रह ह क आप पहल ह हर जगह जग चक ह... लकन आपक जनकर क लए, यह भर... आप लगभग 15 घट स चक ह, और ज म दख रह ह उसक अनसर आप पहल स ह बहत सवसथ ह चक ह उसन मझ उततर दय म सथर रह, अपन जवन म 15 घट सय, 15 घट सय... इसलए मझ बहत जर क भख लग थ, मन एक दन स जयद कछ नह खय थ। मन उसस पछ क कह उनहन उसक लए ज कछ तयर कय थ, वह थ और उसन मझ बतय क उनहन इस इसलए खय थ म बहत गहर नद म थ और व मझ जगन नह चहत थ। -लकन चत मत कर, मझ बतओ क तम कय खन चहत ह और अभ म तयर करत ह -हमन इस आपक लए तयर कय ह - और लल क आवज हमर यह सनई द पठ हम उस दखन क लए मड और म यह दखकर दग रह गय क वह कस थ, उसन कय पहन हआ थ अपन सतन क ठक ऊपर एक बहत छट टक टप पहनन और कछ नह... इसलए क मर आख क समन परचर और घन लल बल क जगल जगल थ उसक चत पर यन उसक सडल और सखत टग क बच म उलझ हई... "म अपन आदम क खयल रखग," उसन बहत आतमवशवस स कह। हम हस, अपन हस स उस सकरमत करत हए, मन उनह गल लगय और मन पयर स चम... उनहन मझस मज पर बठन क कह और मर सथ कछ कय खन क लए... म उसक हर हरकत क सथ उसक सखत और सखत नतब क दखकर खश ह गय। उनहन ऐस कय, मझ नह पत थ क कसक पस जन ह, और समय-समय पर व मझ दखन क लए मडत थ; व सदर, शनदर थ और व मर 15 और 16 सल क छट बहन भ थ... यह पगलपन थ!!! मझ यह भ नह पत क उनहन मझ कय खन क दय, लकन मन वह सब नगल लय। इतन बतब और इसक सवद मर जवन म अब तक खए गए सबस अचछ वयजन जस थ। व वह सब कछ दख रह थ ज उसन कय थ और वह पहल ह कस कर चक थ समपत, मर मन म उनस यह पछन क वचर आय क कय हम बन ऐस ह कपड पहन इस तरह चलत रहग अब तक... उनहन एक-दसर क आख म दख और मग ह थ जसन उततर दय। -यह हमर लए ठक ह और हम चहत ह क आप भ इस तरह आग बढत रह, कम स कम उनहन कह, "बहत ठड ह य कई आ रह ह।" -ठक ह, ठक ह... कयक म हमश अरध-नगनवद रह ह य और ह लगभग हमश बन कपड क, मर लए कई समसय नह... "बलकल सह," मग न फर कह। -अब आरम कर तक आप अपन तकत दबर हसल कर सक -म अब ठक ह। मन उनह बतय थ -जरर? म अब लल बलत ह -अगर मझ सचमच बहत अचछ महसस ह रह ह... -परतयक वसत क लए? उसन फर कह -आपक ज उततर दय गय ह उसक लए -अचछ, पहल बत त यह ह क ज हमर आदम कहत ह, वह कर, यह यह एक नगनतवद घर हग... त वह कपड क बहर चललय लल न उसक तरफ दख लकन बन कछ कह उसन भ उसक तरह ह अपन कपड उतर दए उनक बहन न एकमतर वसतर पहन हआ थ, जसस उनक गरवशल सतन थ दखत ह दखत... ऐस दशय क दखकर मर लड हल गय, द जड सतन बहत सदर थ एक दसर क तरह लकन अपन सबधत मतभद क सथ, मग थड ह थ बड और कल नपलस क सथ, छट लल क कछ सतन थ मधयम और बहत सफद, एक छट आभमडल और बहत गलब नपलस क सथ खड... जस क मन कह, मझ नह पत थ क दन म स कस चनन ह। -आपन ज दख कय वह आपक पसद ह? मग न पछ. -बहत जयद, व सदर ह!!! - मन जवब दय "मर सझव ह क हम कमर म जए," उनहन आतमवशवस स कह। हम खड हए और उनक कमर म गए, कमर पहल स ह मजद थ। वह द बसतर थ, उनह जडन म उनहन मर मदद क... उनक पस यह पहल स ह थ नयजत. उनहन मझस बच म लटन क कह और म वस ह लट गय, व सहमत थ। मर समन मझ घरत हए... अचनक मगई न अपन उगलय बच म डल द उसक छट बहन क हर-भर लल बल और उस एक सपर चबन दन क लए खच ककनड... उनहन उनक खबसरत शरर क तब तक चम और सहलय जब तक व आग नह बढ गए मर... म त मन कई चमबक ह, लल न मर लड पकड लय और मर बगल म लट गई उसक बहन सध मर मह क पस गई और मझ जश स चमन लग... छट लडक क हथ मर चटल लड क सथ ऊपर और ऊपर जकर खल रह थ वह जतन बर चह उतन बर नच ज रह थ, जबक उसक बहन न मर जभ क चस... मझ लग लल क हठ न मर लड क छआ, अपन जभ फरई जब तक क उसन उस अपन मह म नह डल लय। मह स उस धर स चसत हए हम तन मग तक कछ दर तक ऐस ह रक रह कह... -आओ बदल छट बहन... चल बदल!!! यह परव नयजत नह थ कयक लल न मझ चसन जर रख मझ अपन फल हआ लड बहत पसद ह, लकन उसक बहन खल क लए तयर नह थ, इसलए म म उस यह कहत हए पछ हट गय क अब उसक बर ह... लल बन कछ जन मर बगल म रक गई कर... त मन उस अपन ओर खच और उसक मह क आवशपरण चबन स ख लय... मन उसक नतब क पकड और उस थड ऊपर उठय जब तक क उसक नपलस क मसल न लय व मर पहच क भतर थ, मन उन पर अपन जभ फरई और उनह अपन मह म डल लय एथलज बलजब... म कसम खत ह क मझ वह बलजब भ महसस नह हआ ज मर दसत मझ द रह थ। एक और बहन... इस करण स, मझ यह सवकर करन हग क मन अपन सथ रहन पसद कय छट बहन, छट बहन क सथ, 15 सल क... लल क सथ... कयक म उसस महत ह मसमयत, वह दससहस जसक सथ उसन बन सच-समझ बत कह और कयक वह ऐस थ बहत अचछ, मझ उसक लल बल, उसक सदर चहर, उसक सतन, वह सब बहत पसद आय टग, उसक नतब... उसक सर, लकन सबस ऊपर घन लल झड उसक पर क बच परचर मतर म बल थ... यह बहत ह जयद थ कमक... सबस जयद, म उसस पयर करत थ। म अपन अनमन जर नह रख सक, कयक मर मह दसर क थ बहन अवशवसनय तरक स मर लड ख रह थ... अहहहह… अहहहहहह… धर क करण म कवल अपन करह ह वयकत कर सक न चहत हए भ वरय नकल पड, मन पहल त उस अपन बहन क मह म भर दय पहल त वह आशचरयचकत रह गई और उसन अपन चहर हट लय, लकन कस भ महल क तरह उसन इस पर कब प लय वह तब तक चसत रह और नगलत रह ज म फक रह थ, जब तक क उसन वह सब नगल नह लय। मर मह म ज दध थ, वह कछ अनख थ... मझ लग जस म मर गय ह। मर लड पर और मर चहर पर चबन न मझ परतकरय करन पर मजबर कर दय जब तक मझ एहसस नह हआ क उनहन सथत बदल ल ह; जसन मझ चम मह मय थ, ज मझ चस रह थ और ज अब मझ चस रह थ लल, मर लडक, छट बचच... मन मग क सतन क पकडकर उस फर स उततजत कय वह मझस भ बड कतय थ, वह मर चहर क ऊपर चढ गई तक म उस ख सक रसल चत, मन इसक बर म नह सच, मन अपन चहर बल क घन उलझन क बच रख दय ज कछ भ मर हथ म आय, मन उस चस य कट, जबक छट बचच इसक लए सघरष कर रह थ म, मर लड और अडकष क पयर करत हए, उसन उनक समकष क और उनह अपन जभ स, अपन मह म डल लय अपन हठ पर, उसन इस अपन चहर और हठ पर तब तक फरय जब तक क उसन इस फर स अदर नह डल दय एक वशषजञ क तरह इस चसत रहन क लए मह... मन मग क ममम पकड लय और उनह मसल और नचड जनन, मझ लग क वह शकयत करग कयक मझ लग जस यह मर सथ हआ... लकन उसन कछ नह कह उसन कवल अपन शरण क मर चहर पर अधक घमय, मर उततजन इतन अधक थ क मन उस कट लय दसर भगशफ क ज मर चहर पर थ और वह मर लए परयपत थ म एक महन सभगसख म आ गई जसन मर मह क उसक परवह स भर दय... यह आग क ओर फक पड गय जसस मझ इसक घमव स मकत मल गई पर, लकन उसक गल नतब बलकल शत रह, जस मन बरबद नह कय लल न उनह चम और उनक टइट गड म अपन जभ डल द, जसस व मचलन लग यह मडग और फर स चलग... मग एक तरफ गर गई जस मर गई ह, वह पर तरह स भर गई थ आनद, जसक फयद उस छट लडक न मर ऊपर चढन म उठय। उसन मर आख म दख और मझ आशचरय ह... -कय आप ठक ह? कय आप जर रख सकत ह???...... -ह मर जदग, तमहर सथ नरक म मन उततर दय मन अपन कडक लड फर स उठय और अपन बच म ल लय उसक रसल यन क हठ क, म पर तरह स पर करत ह और चड करत ह, उस रगडत ह उसक खड भगशफ पर जसन उस खश स ऐठन पर मजबर कर दय... जब वह मर सन पर गर पड, मन उस पर ईमनदर स बतय और यह मर दल स नकल... -म तमस पयर करत ह खबसरत, म तमस पयर करत ह... तम सबस अचछ चज ह ज मर सथ हई ह जदग। मझ नह पत क कय हआ, लकन वह रन लग और आग बबल ह गय। मर मह स आस, एक वशषजञ क तरह मर हठ और जभ ख रह ह... अचनक ह वह अपन आप क मर सखत लड पर गरन दन लग और उसक चत क ऐस लगन लग म इस चसत ह, सर क फट करत ह ज थड-थड करक उस कसकर पकड लत ह परजनन नलक। -तम मर सथ कय कर रह ह, मर लडक... तम मर सथ कय कर रह ह... म चललई। -कस भ महल क तरह खद क तमह सप द ज खद क तमह द दत ह आदम... उसक शबद न मझ चकत कर दय, लकन उसक हरकत न मझ चक दय लड मर वचर स बहतर थ... इसलए मन उसक बट सटप क पकड लय और मन उस तब तक दफनय जब तक क मर शरण उसक शरण स नह टकर गई, जसस वह शकयत करन लग। अययय… अगगगगगग… सइइइइइइइ… आहहहह… म तमहर हआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ -कय मन तमह दख पहचय? मझ मफ कर दन मर जन... म त बस तमह बनन चहत ह खश... -ह... नह.. नह... हत यह ह क आप मझस और अधक जड जत ह वह गहर पहल... और मझ अजब लगत ह... मझ लगत ह क इसस थड दरद हआ... -लकन कय तम ठक ह? मन उसक पर चहर क चमत हए उसस कह। -आप जर रख, ऐस... ऐस, कछ नह हत... म ठक ह... आहह... मन उसक लड जह थ वह स हलन शर कर दय दब हए... उसक यन क नचल हसस म... व उस हटए बन छट-छट हरकत कर रह थ बहत कछ और हर बर जब उसन हमल कय त वह जर स कय जसस मझ बहत आनद आय, म यह जनत थ कयक म जह भ सभव ह अपन नखन खदत थ। अचनक मझ अदर झटक महसस हआ चहर, यह मग ह थ, जब वह स रह थ, उसन हथ बढय और मर चहर पर मर... लल क यन म मर पर लड गहरई तक दब हआ थ, मन उस पर हथ फर। गल क उस पर पयर स ज समरपण क सथ कवल उसक जस महल ह द सकत ह कल। अब मझस बरदशत नह ह रह थ, मन उसक लड क फर स सबस गहर हसस म दब दय। उसक यन क अदर गहरई तक और उसन अपन कलह क तवरत गत क सथ मझ जवब दय मडलय म... -कय आप यह करन चहत ह??? मन उसस पछ -हsssssssssssssss ह sssssssssssssssssssssssssssssssssssssssss म चहत ह!!! एक गत म मन इस नच तक जन दय और मझ ऐस महसस हआ उसम कछ खल, मन उसक ओर दख लकन उसक आख सन थ, इसलए मन जर रख उसन उस तब तक पकड रख जब तक उसन अपन आख नह खल और मर सथ चलत हए उसन मझस कह... -म तमस पयर करत ह... म तमस पयर करत ह... तम सब कछ तड रह ह... और वपस लट आय रओ... लकन उसन मर मह क चमबन स भर दय और जह भ वह कर सकत थ, मर मह म भर दय चहर, म मर कध, मर छत म और फर मर घव म हठ...यह थ एक चबन मशन और फर भ कई थकन नह दख... -मत रओ, म भ तमस पयर करत ह और म तमह छडन वल नह ह। कभ नह, कभ नह!!! -वसतव म??? सचमच कभ नह??? -कभ नह मर जन... तमन मझ पगल बन दय ह, अब स तम मर ह औरत... ठक ह अगर तमहर इचछ ह... उसन अपन कलह क अधक गलकर घमय और अपन शरण क जतन सभव ह उतन करब चपकय। वह मर सथ कय कर सकत ह, उसन मझस कह... -हsss... ह म चहत ह... म हमश तमस पयर करत ह और इसक बद आप म मरत दम तक पयर करग!!!! म सब तमहर ह... कवल तमहर!!! हमन बतहश चदई क, यह जनत हए क यह एक थ परण समरपण क सथ, हमन एक-दसर क मह और शरर क हर हसस क चम जह हमर पहच थ, म आपस झठ नह बलग, यह कछ शनदर थ, वह मर मलकत हई सच म पयर... उन सभ सधरण चज क करण नह ज मर सथ घटत हई थ अलपय नह!!! यह दन पकष दवर परण समरपण थ, a जस कषण हम एक असततव म वलन ह गए, कम स कम मझ त ऐस ह महसस हआ... मर छट बहन शनदर थ... म उसस पगल क तरह पयर करत थ!!! जस क आप कलपन कर सकत ह, यह सथत हर समय दहरई जत थ। क हम खत म, हर समय और कस भ सथन पर थ; यह इसम स सबस कम थ. मग न भ मर समन कछ ऐस ह कबल कय थ और मझ नह पत थ क कय कर, कयक सचचई यह ह मर दल छट बचच क थ, लकन म अपन दसर बहन स भ पयर करत थ... इसलए म हमन हम तन क बच बतचत क और इस नतज पर पहच क हम सभ यह चहत थ यह तब तक जर रहग जब तक हमम स कई इस जर नह रखन चहत। करब डढ सल तक दन क बच यन सबध बन रह तन, मग कस स मल और हम बतय क वह वसतव म पयर म थ। उसक बर म, लकन यह कई बध नह बनन वल थ क हम समय-समय पर हम पहल क तरह एक सथ मलकर अपन शरर क आनद लग। दसर ओर, मर छट लल न कभ भ रखन क परयस नह कय कस लडक क सथ रशत और चहन वल क कई कम नह थ; म हमश उसन कह क ऐस इसलए थ कयक वह कवल मझस पयर करत थ और मन उस एक महल क रप म पर कय... म अदर ह उनक रवय क अनरप, अगर म उनक सथ बहर जत त मर कई औपचरक रशत भ नह हत लडकय और उनह घर ल गए तक अगर म न दख त मर मत-पत क कछ भ अजब न लग यह वस ह थ... नयत न मर खबसरत बचच क मर सथ रहन क लए तयर कर दय अधययन क करण स, जस मर अपन मत-पत न तब स परतसहत कय आज तक हमर रशत पत-पतन क ह, बशक बन कगजत य आशरवद; लकन मझ वशवस ह क ऊपर स व हम आशरवद दत ह कयक अगर ऐस नह हत, त इनम स कछ भ नह हत... म उसस पयर करत ह, म उसस पयर करत ह, वह सबस अचछ ह मर आख क तर... वह मर पतन ह!!!! मर दसत, मझ पत ह क कहन बहत लब ह, इसलए म कषम चहत ह, लकन लखक चहत थ क यह बहत वसतत ह, यद आप। यद उनह पत हत क उनहन मझ ज समगर भज ह वह कतन वयपक ह, त व इस पर वशवस नह करत... म आपक वशवस दलत ह क यह कवल एक भग ह, एक अश ह, इसलए यद आपक यह पसद आए त मझ बतए पत ह... कयक अगर म जर रखग त यह उतन ह वसतत हग जतन क यह थ मर लए इस परकशत करन क शरत, इसलए यह लखक क परत एक परतबदधत ह।- धनयवद आपक समझदर क लए। सभ क लए शभकमनए... जशआ1731@hotmail.com